Movie Review : ‘परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण’, भारत के महाशक्तिशाली बनने की कहानी

भारत विश्व में न्यूक्लियर सुपरपावर कैसे बना? फिल्म इस पर विस्तार से प्रकाश डालती है. यह ऐसी अनकही कहानी है जिसे पूरी शिद्धत से प्रस्तुत किया गया है.  

Movie Review : ‘परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण’, भारत के महाशक्तिशाली बनने की कहानी
‘परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण’ फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है

नई दिल्ली : जॉन अब्राहम द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्मपरमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरणआज शुक्रवार को रिलीज हो गई. 'परमाणु' उन नायकों के बारे में है जो कभी लाइमलाइट में नहीं आते. ये हीरो हैं - इंजीनियर, वैज्ञानिक और सैनिक जो न्यूक्लियर सुपरमैसी में देश का गौरव स्थापित करने में हमारी मदद करते हैं. फिल्म शानदार और मनोरंजन से भरपूर और पैसा वसूल है. भारत विश्व में न्यूक्लियर सुपरपावर कैसे बना? फिल्म इस पर विस्तार से प्रकाश डालती है. यह ऐसी अनकही कहानी है जिसे पूरी शिद्धत से प्रस्तुत किया गया है.  

आपने अभी तक कई ऐतिहासिक फिल्में देखी होंगी लेकिन 'परमाणु' कई मायनों में उनसे अलग है. यह फिल्म देश की एक ऐसी उपलब्धि पर आधारित है जिसने भारत की ताकत को दुनिया के मंच पर शानदार तरीके से पेश किया. देशप्रेम से भरी यह फिल्म देखने वालों के अंदर रोमांच पैदा करती है. पोखरण में 1998 में किए गए परमाणु परीक्षण पर बनी यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है. गहरे शोध के बाद यह फिल्म लिखी गई है. अभिशेष वर्मा द्वारा निर्देशित फिल्म एक्शन ड्रामा है

स्टार कास्ट : जॉन अब्राहम, डायना पेंटी, बोमन ईरानी
निर्देशक : अभिषेक शर्मा 
निर्माता : जॉन अब्राहम

हर किरदार के साथ इंसाफ
कहानी 1995 की उस घटना से शुरू होती है, जिसमें प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी अश्वत रैना (जॉन अब्राहम) एक मीटिंग में भारत को परमाणु संपन्न देश बनाने का प्रस्ताव रखते हैं. देशभक्ति रैना को विरासत में मिली है, लेकिन मीटिंग के अंदर अश्वत रैना के प्रस्ताव का मजाक उड़ाया जाता है. लेकिन इसी उपहास के बीच रैना का आइडिया चोरी हो जाता है. इसी दौरान विभिन्न आरोप लगाकर देशभक्त रैना को सस्पेंड कर दिया जाता है. फिल्म में एक मोड़ आता है और रैना की फिर से वापसी हो जाती है और इस बार परमाणु मिशन का दायित्व उसे ही सौंपा जाता है. रैना की कोशिशों से भी भारत परमाणु संपन्न देश बनता है. 

जारी हुआ जॉन अब्राहम की फिल्म 'परमाणु- द स्टोरी ऑफ पोखरण' का First Look

सच्ची घटना पर आधारित फिल्म को मनोरंजक बनाया गया है. फिल्म की लोकेशन भी शानदार हैं और एक-एक पात्र ने अपने चरित्र को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से निभाया है. 

सफल प्रोड्यूसर साबित कर चुके हैं जॉन
जॉन अब्राहम इससे पहले ‘विकी डॉनर’ और ‘मद्रास कैफे’ जैसी फिल्मों के जरिए खुद को सफल प्रोड्यूसर साबित कर चुके हैं. खास बात ये है कि प्रोड्यूसर होने के बाद भी जॉन ने फिल्म में खुद को हीरो साबित करने की कोशिश नहीं की और हर कलाकार को अपना रोल अदा करने का पूरा मौका दिया है. 

इस पर जॉन ने, 'एक प्रोड्यूसर के तौर पर मेरे साथ सिर्फ यही समस्या है कि मैं फिल्मों के लिए समय लेना पसंद करता हूं. एक प्रोड्यूसर के रूप में मेरे साथ सही बात यह है कि मैं खुद को सभी फिल्म में हीरो के रूप में नहीं देखता हूं. अगर मुझे लगता है कि इस फिल्म में वरूण, टाइगर, राजकुमार राव या सोनाक्षी सिन्हा सही साबित होंगी तो मैं उन्हें ही लेता हूं.' उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन उनके लिए गुमान वाला विषय नहीं है. एक प्रोड्यूसर होने के नाते मुझे जिन कहानियों में विश्वास होता है, वह फिल्में बनाना पसंद है.

कुल मिलाकर यह फिल्म हर कसौटी पर खरी उतरती है. जब आप इसे देखकर सिनेमा हॉल से बाहर निकलेंगे तो कहीं ना कहीं आपके मन में देशप्रेम हिलोरे जरूर मार रहा होगा.