फिल्म रिव्यू: कमजोर और थकी हुई फिल्म है 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर-3'

ये फिल्म कहीं से भी तिग्मांशु धूलिया की फिल्म नहीं लगती. इश्क, नफरत और ताकत के तानेबाने से बुनी गई ये फिल्म रचनात्मकता के लिहाज से सिफर है.

फिल्म रिव्यू: कमजोर और थकी हुई फिल्म है 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर-3'
फाइल फोटो

नई दिल्ली: अगर आप तिग्मांशु धूलिया के जबरदस्त फैन हैं और हासिल या चरस फिल्म के एक-एक डायलॉग आपको याद हैं, तो साहिब बीवी और गैंगस्टर- 3 आपको निराश करेगी. अगर आप साहिब बीवी और गैंगस्टर सीरिज के कायल हैं, तो इस सीरिज की ताजा फिल्म आपको दोबारा सोचने पर मजबूर करेगी. ये फिल्म कहीं से भी तिग्मांशु धूलिया की फिल्म नहीं लगती. इश्क, नफरत और ताकत के तानेबाने से बुनी गई ये फिल्म रचनात्मकता के लिहाज से सिफर है. सिर्फ साहिब के नशे, बीबी की खूबसूरती और गैंगस्टर की हिंसा भटकी हुई लगती है. इनके भटकाव में फिल्म की कहानी गुम हो जाती है. फिल्म अपनी लय खो देती है और दर्शक निराश होकर हॉल से बाहर निकलते हैं.

निर्देशकः तिग्मांशु धूलिया
कलाकार: जिमी शेरगिल, माही गिल, संजय दत्त, चित्रांगदा सिंह, सोहा अली खान

कहानी
फिल्म में राजा आदित्य प्रताप सिंह यानी साहेब के किरदार में एक बार फिर जिमी शेरगिल हैं. बेगम यानी रानी माधवी सिंह के किरदार में माही सिंह हैं. साहब पिछले गैंगस्टर (इरफान) के कत्ल के इल्जाम में जेल में हैं. माही गिल अब विधायक बन गई हैं और इस बार उनके हुस्न से ज्यादा उनकी सियासत के रंग आपको फिल्म में देखने को मिलेंगे. जिमी शेरगिल अपने एक पुराने साथ की मदद से जेल से बाहर आने में कामयाब होते हैं और अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिस में लग जाते हैं. इसके साथ ही शुरू होती है साहिब और बीबी के बीच की जंग. माही किसी काम से यूरोप जाती हैं और वहां उनकी मुलाकात होती है गैंगस्टर यानी संजय दत्त से. गैंगस्टर के अंदर राजनीतिक महत्वाकांक्षा जग जाती है और फिर शुरू होता है इश्क, षडयंत्र और हिंसा का गंदा खेल.

क्यों देखें
अगर आप तिग्मांशु धूलिया की कोई फिल्म नहीं छोड़ते या फिर अगर आप माही गिल और जिमी शेरगिल के फैन हैं, तो आप ये फिल्म देख सकते हैं. फिल्म में संजय दत्त की रखैल की भूमिका में चित्रांगदा सिंह ने अच्छा काम किया है, अपनी छोटी भूमिका के कारण बहुत अधिक प्रभाव नहीं छोड़ पाती हैं.

क्यों न देखें
अगर आप अच्छी कहानी की तलाश में हैं या फिर आपके लिए फिल्म का म्यूजिक भी मायने रखता है, तो ये फिल्म आपको निराश करेगी. फिल्म में संजय दत्त ने भी निराश किया है. तिग्मांशु उनसे काम नहीं ले पाए हैं. दरअसल पूरी फिल्म में तिग्मांशु भटके हुए लगते हैं. फिल्म की कहानी और निर्देशन सधा हुआ नहीं है. ऐसा लग रहा है कि लंब समय से अटकी रहने के कारण तिग्मांशु किसी तरह इस फिल्म को खत्म करना चाह रहे हों. यही वजह है कि साहेब, बीवी और गैंगस्टर-3 इस सिरीज की सबसे कमजोर फिल्म है.