इरफान खान और करीना कपूर की 'अंग्रेजी मीडियम' देखने से पहले REVIEW तो पढ़ लें

इरफान खान की 'अंग्रेजी मीडियम' देखने जा रहे हैं तो फिल्म का रिव्यू पढ़ लें और साथ ही जानें फिल्म को कितने स्टार मिले हैं.

इरफान खान और करीना कपूर की 'अंग्रेजी मीडियम' देखने से पहले REVIEW तो पढ़ लें
फोटो साभार : इंस्टाग्राम

नई दिल्ली : बीमारी को मात देकर बड़े पर्दे पर लौट रहे इरफान खान (Irrfan Khan) की 'अंग्रेजी मीडियम' से फिल्म की स्टारकास्ट ही नहीं, दर्शकों को भी बड़ी उम्मीदें हैं. इससे पहले रिलीज हुई हिन्दी मीडियम में दिखाया गया था कि एक अच्छे स्कूल में एडमिशन के लिए क्या-क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं. अब तीन साल बाद फिर संघर्ष करना पड़ रहा है, लेकिन स्कूल एडमिशन के लिए नहीं, यूनिवर्सिटी के लिए. वो भी विदेशी यूनिवर्सिटी के लिए. 

कलाकार: इरफान खान, राधिका मदन, दीपक डोबरियाल, करीना कपूर, डिंपल कपाड़िया, कीकू शारदा, पंकज त्रिपाठी, रणवीर शौरी
निर्देशक:  होमी अदजानिया
स्टार: 3

कहानी 
कहानी की बात करें तो इरफान खान यानी चंपक की मिठाई की दुकान है. पैसे की कमी नहीं है. चंपक ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन अपनी बेटी तारिका बंसल (राधिका मदन) को बड़े सपने देखने से नहीं रोकता. बेटी पढ़ाई में बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन लंदन में पढ़ने का सपना देखती है. उसे लंदन की ट्रूफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला चाहिए. वह अपनी बेटी को खुद से दूर नहीं करना चाहता लेकिन बेटी की जिद के आगे झुक जाता है. लंदन में तिकड़म लगाकर वह बेटी को एडमिशन दिलाने की कोशिश करता है. उसकी मदद करता है उसका दोस्त घसीटेराम (दीपक डोबरियाल). दोनों कई सारे हथकंडे अपनाते हैं, झूठ बोलते हैं, बहुत कुछ बर्दाश्त करते हैं. इसके बावजूद चंपक अपने मिशन में कामयाब होगा या नहीं, यह फिल्म देखेंगे तो पता चलेगा.

एक्टिंग 
कमजोर स्क्रिप्ट के बावजूद इरफान खान अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब हुए हैं. दीपक डोबरियाल ने भी बेहतरीन एक्टिंग की है. इमोशनल सीन हो या कॉमेडी दोनों की दमदार एक्टिंग आपका दिल जीत लेगी.दीपक डोबरियाल की नेचुल कॉमिक टाइमिंग हर सीन में जान फूंक देने में कामयाब हुई है. दोनों साथ में मस्ती भी करते दिख रहे हैं, जिससे कई दृश्य इंटरेस्टिंग बन गए हैं. राधिका मदन ने भी अपनी भूमिका ठीक-ठाक निभाई है. फिल्म में करीना कपूर का रोल एक पुलिसवाली का है, लेकिन फिल्म में उनकी उपस्थिति न के बराबर ही है. फिल्म की कहानी आगे बढ़ाने में उनका कोई रोल ही नहीं है. अब जबकि करीना अपने रोल का चुनाव बहुत सोचसमझकर कर रही हैं, ऐसे में इस रोल के लिए उनका 'हां' करना दर्शकों के गले नहीं उतरा है. कीकू शारदा, पंकज त्रिपाठी, डिंपल कपाड़िया और रणवीर शौरी ने अपने रोल के मुताबिक ठीक-ठाक काम किया है, लेकिन कुछ ऐसा नहीं किया कि उनके काम की अलग से तारीफ की जाए. 

फिल्म में कमी
दर्शकों ने 'हिन्दी मीडियम' देखी है तो वह उससे बेहतर फिल्म की उम्मीद के साथ ही ये फिल्म देखने जाएंगे. जहां पिछली फिल्म एडमिशन की दिक्कतों पर फोकस थी वहीं ये फिल्म अपने असल मुद्दे यानी एडमिशन की चुनौतियों से अधिक पिता-बेटी के रिश्ते की तरफ ज्यादा झुकती दिख रही है. कहानी में नयापन नहीं दिख रहा. कहीं-कहीं परिस्थितियां जबरदस्ती ठूंसी हुई या कहें अप्रासंगिक-सी लगती हैं. 

फिल्म की खासियत
इस फिल्म की खासियत सिर्फ इरफान खान और दीपक डोबरियाल की एक्टिंग हैं. दोनों की नेचुरल एक्टिंग और कॉमिक टाइमिंग आपको निराश नहीं करेगी. फिल्म कई बार बेवजह लंबी खिंची हुई लगती है, क्योंकि इसमें एक साथ कई मुद्दों को उठाने की कोशिश की गई. इरफान खान और दीपिक को साथ देखने के लिए फिल्म देखी जा सकती है. 

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