कार्तिक आर्यन ने बयां किया दर्द, तीसरी फिल्म तक 12 लोगों के साथ एक फ्लैट में गुजारे दिन

कार्तिक आर्यन ने 9वीं क्लास में शाहरुख खान की 'बाजीगर' फिल्म देखी तो उन्हें अहसास हुआ कि वह स्क्रीन के उस तरह रहना चाहते हैं.

कार्तिक आर्यन ने बयां किया दर्द, तीसरी फिल्म तक 12 लोगों के साथ एक फ्लैट में गुजारे दिन
फोटो साभार : कार्तिक आर्यन के इंस्टाग्राम से

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन (Kartik Aaryan) इन दिनों अपनी फिल्म 'पति पत्नी और वो' के प्रचार में लगे हैं. 'प्यार का पंचनामा', 'सोनू के टीटू की स्वीटी' और 'लुकाछिपी' जैसी फिल्में करके वे दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं. कार्तिक के पास आज कई बड़े बैनरों की फिल्में हैं, लेकिन उन्हें ये सफलता इतनी आसानी से नहीं मिली. इसका खुलासा कार्तिक ने सोशल मीडिया ब्लॉग 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' में किया है, जिसे उन्होंने अपने इंस्टाग्राम से भी शेयर किया है. 

कार्तिक ने इस ब्लॉग में जिक्र किया है कि उन्हें बिना ऑडिशन दिए बाहर से ही भगा दिया जाता था. कार्तिक ने लिखा है कि मेरा जन्म ग्वालियर में हुआ. मेरे माता-पिता मेडिकल फील्ड में थे और मैं इंजीनियरिंग करने की सोच रहा था, लेकिन मैंने 9वीं में 'बाजीगर' फिल्म देखी और मुझे अहसास हुआ कि मैं स्क्रीन के दूसरी तरफ रहना चाहता हूं. मुझे मेरे माता-पिता के रिएक्शन के बारे में मालूम नहीं था तो मैंने तय किया कि मैं 12वीं तक ग्वालियर में पढ़ूंगा और कॉलेज की पढ़ाई करने मुंबई जाऊंगा. किस्मत से मुझे नवी मुंबई के कॉलेज में दाखिला मिल गया और मैंने होस्टल में रहना शुरू कर दिया. साथ ही ऑडिशंस के लिए तलाश शुरू कर दी. मेरे पास अभिनय से जुड़े लोगों के कोई कॉन्टेक्ट नंबर्स नहीं थे तो मैं फेसबुक पर 'एक्टर नीडेड' जैसे कीवर्ड टाइप करता था.

 
 
 
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 

 #Repost @officialhumansofbombay “I was born in the small town of Gwalior. My parents were in d medical field & I was going to do engineering. But in 9th grade, I saw Baazigar & I knew I wanted to be on the other side of the screen. I was unsure of my parents’ reaction—so I decided to study till 12th in Gwalior & den go to college in Mumbai. Luckily I got into a college in Navi Mumbai. I stayed in a hostel & searched for auditions. I had no contacts,so I’d type keywords like, ‘Actor Needed’ on Facebook. I’d travel for 6 hours 3-4 times a week for auditions. At times, I’d be rejected from outside the studio because I didn’t ‘look the part’. But I still had hope. Soon I got projects like a few seconds in an ad & they kept me going. Eventually I rented a flat in Andheri with 12 boys. I had limited finances. I couldn’t even afford a portfolio—I’d crop my face out of group photos to send to agents! All the while I’d skip college to give auditions & my parents didn’t know about any of this. Once I saw an ad for a film audition & decided to go for it. They liked me & auditioned me many times. My final audition script was the monologue that then became my identity! Finally, when I got the role, I was at Andheri station & immediately called my mom! She couldn’t believe it! After 2 & a half years of struggle, what I had imagined as a possibility, was now a reality. After Pyaar Ka Punchama, there still weren’t many opportunities. I stayed in the same flat with 12 boys till my third film! At the time, my mom was adamant I finish my degree, so while shooting, I gave my exams—& people in the exam hall were clicking photos with me! But I understood that she wanted my future to be secure. After Sonu Ke Titu Ki Sweety, it all changed! Life has come full circle now—recently when I was in Gwalior, I was invited to my school as chief guest & kids were chanting my name! It was surreal! But what I have today, would’ve never come my way, if I hadn’t believed that I’d make it. I’m grateful for where I am & I know I have a long way to go. Sometimes all of it still feels unbelievable from this point on,the possibilities just seem endless & my dreams, r just waiting to come true.

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कार्तिक ने आगे बताया कि मैं ऑडिशंस के लिए तीन-चार दिन करीब 6 घंटे सफर करते था. लेकिन स्टूडियो के बाहर से ही रिजेक्ट कर दिया जाता था.  मैंने उम्मीद नहीं खोई. जल्द ही मुझे कुछ सेकेंड्स के विज्ञापन मिलने लगे. मैंने अंधेरी में 12 लोगों के साथ एक फ्लैट लिया, क्योंकि मेरे इतना ही बजट था. मेरे पास पोर्टफोलियो शूट के लिए भी रुपये नहीं थे, इसलिए मैं एजेंट्स को ग्रुप फोटो में से अपनी तस्वीर क्रॉप करके भेजता था. मैंने कई बार ऑडिशंस के लिए अपना कॉलेज भी बंक किया और मेरे माता-पिता को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. फिर एक बार मैंने एक फिल्म ऑडिशन का एड देखा और वहां जाने की सोचा.

कार्तिक ने आगे बताया कि उन्हें मेरा ऑडिशन पसंद आया और उन्होंने कई बार मेरा ऑडिशन लिया. जब मुझे रोल मिला और सब चीजें तय हो गईं तो मैं अंधेरी स्टेशन पर था. मैंने अपनी मां को फोन किया. उन्हें तो विश्वास ही नहीं हुआ. ढाई साल के स्ट्रगल के बाद मुझे मेरा सपना सच होता दिखा. 'प्यार का पंचनामा' के बाद भी मेरे पास उतना काम नहीं था. मैं अपनी तीसरी फिल्म तक उसी फ्लैट में 12 लोगों के साथ रह रहा था. खैर, मेरी मां अड़ी थीं कि मैं अपनी डिग्री पूरी कर लूं. जब मैं परीक्षा देने गया तो वहां लोग मेरी फोटो खींचने लगे. 'सोनू के टीटू की स्वीटी' के बाद तो जैसे मेरे लिए सब कुछ बदल गया. जब मैं ग्वालियर गया तो बच्चे मुझे पहचान रहे थे, मेरा नाम ले रहे थे, लेकिन आज जो मेरे पास है, वह कभी नहीं होता, अगर मैंने विश्वास न किया होता. इस समय मैं जो हूं, मुझे गर्व है. 

कार्तिक के करियर की बात करें तो 'पति पत्नी और वो' के बाद वह 'लव आजकल-2' में सारा अली खान के साथ और 'दोस्ताना 2' में जाह्नवी कपूर के साथ दिखाई देंगे.

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