Anupam Kher ने शेयर की कॉलेज के दिनों की यादगार तस्वीर, 'वैजयन्ती माला' से मिलाया

कॉलेज के दिनों में अनुपम खेर को उनके दोस्त और उनका शहर 'देवआनंद' और उनकी एक दोस्त को 'बैजयंती माला' कहा करते थे. 

Anupam Kher ने शेयर की कॉलेज के दिनों की यादगार तस्वीर, 'वैजयन्ती माला' से मिलाया
अनुपम खेर ने शेयर की यादगार फोटो, साभार: Instagram@AnupamKher

नई दिल्ली: अनुपम खेर (Anupam Kher) मस्त तबियत के आदमी हैं, किरण खेर जैसी चुलबुली तबियत की पत्नी मिलने के बाद दोनों की कैमिस्ट्री अक्सर परदे के आगे ही नहीं पीछे भी दिखती रही है. ऐसे में अचानक से अनुपम खेर ने सालों बंद पड़े अपने दिल के उन पन्नों को भी अपने फैंस की खातिर खोल डाला, जिनका वो जिक्र तक नहीं किया करते थे. कॉलेज के दिनों में अनुपम खेर को उनके दोस्त और उनका शहर 'देवआनंद' और उनकी एक दोस्त को 'बैजयंती माला' कहा करते थे. इंस्टाग्राम पर अनुपम ने उसी बैजयंती माला यानी शुभ्रा की कहानी उनकी तस्वीर के साथ शेयर की है.

अनुपम लिखते हैं कि, '1974 की इस तस्वीर की कहानी ये है कि, ये तस्वीर हमारे सरकारी कॉलेज की फेयरवैल पार्टी की तस्वीर है. शुभ्रा भट्टाचार्य और मैं कॉलेज के ड्रामा ग्रुप के स्टार हुआ करते थे. उन दिनों के लगभग हर प्ले में मैं और वो लीड रोल में हुआ करते थे और जैसा कि हर छोटे शहर में होता है, हम अपने शहर शिमला के लिए देवआनंद और वैजयन्ती माला थे और हम इस टैग से बड़े रोमांचित हुआ करते थे. मेरा ये भयानक सा ब्ल्यू और ग्रे सूट उस वक्त मेरे पास सबसे महंगा कपड़ा था, जो मैंने कभी पहना था. मेरे पिताजी, जो एक क्लर्क थे, इस सूट की कीमत सुनकर घबरा गए थे'.

 
 
 
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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अनुपम खेर इसके बाद सालों आगे चले जाते हैं, पूरे 44 साल आगे, यानी 2018 में, वो आगे लिखते हैं कि, '2 साल पहले शुभ्रा अपने पति के साथ मुझे मुंबई मिलने आई, उसके पति की पिछले साल मौत हो चुकी है. वो अब कोलकाता में रहती है. जिंदगी चलती रहती है, मैं इस बात को लेकर पक्का हूं कि आप सबके साथ भी इसी तरह की घटनाएं हुई होंगी'. हालांकि उन्होंने आखिर में ये लिख दिया है, ये कहानी और तस्वीरें उन्होंने शुभ्रा की अनुमति से ही लिखी है.

अनुपम ने इस पोस्ट में दो तस्वीरें शेयर की हैं, एक 1974 की और दूसरी एकदम ताजा या 2018 की, जब वो मिले थे, तबसे काफी बदल गए हैं दोनों. कुल मिलाकर अनुपम खेर ने इशारा किया है अपने फैंस के लिए कि शुभ्रा उनकी जिंदगी में कभी काफी अहम थीं, लेकिन बात आगे क्यों नहीं बढ़ी, क्या अनुपम ने इस दोस्ती को प्यार में बदलने की कोशिश की भी थी या नहीं? हालांकि अनुपम जिस अंदाज में लिख रहे हैं कि उससे साफ पता लग रहा है कि उनके दिल में शुभ्रा के लिए सॉफ्ट कॉर्नर तो था.

हो सकता है कल को अनुपम जब अपनी बायोग्राफी लिखेंगे, तो 1974 की इस तस्वीर के बाद की कहानी भी उनके फैंस को पढ़ने को, जानने को मिलेगी, लेकिन उसको लिखने के लिए उनको अपनी मित्र शुभ्रा के साथ साथ पत्नी किरण खेर की अनुमति की भी जरूरत होगी.   

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