मो. रफी पुण्यतिथि: जब मो. रफी और लताजी के विवाद में फंस गई थी गिनीज बुक

लता और रफी की जोड़ी ना जाने कितने सुपरहिट गीतों की आवाज बनी. लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था, जब दोनों ने एक साथ गाना बंद कर दिया.

मो. रफी पुण्यतिथि:  जब मो. रफी और लताजी के विवाद में फंस गई थी गिनीज बुक

नई दिल्ली: ऐसे कई वाकए हैं, जब लता मंगेशकर अपने साथियों से किसी ना किसी वजह से नाराज हो गईं और फिर जब वो नाराज हो जाती थीं, तो ये नाराजगी दूर करने में सालों लग जाते थे. एक बार तो उनकी मोहम्मद रफी से ऐसी बिगड़ी कि तीन साल दोनों ने साथ गाना नहीं गाया.

लता और रफी की जोड़ी ना जाने कितने सुपरहिट गीतों की आवाज बनी. लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था, जब दोनों ने एक साथ गाना बंद कर दिया, पूरे तीन साल तक दोनों एक स्टूडियो में नजर नहीं आए. लता जी महेन्द्र कपूर के साथ तो रफी सुमन कल्याणपुरी के साथ सुर मिलाते रहे.

ऐसी घटना क्या हुई?
दरअसल वह विवाद जिसके बाद दोनों ने साथ में गाना बंद कर दिया. इसमें लोगों ने लताजी को सपोर्ट किया था, क्योंकि लताजी ने जो बात कही थी वो बाकी गायकों के मन की बात भी थी. सारे गायक चाहते थे कि उन्हें गानों की फीस के अलावा, रॉयलिटी भी मिले, लता जी इस मांग की सबसे बड़ी हिमायती थीं. लेकिन रफी इस बात में उनके साथ नहीं थे, उनको लगा कि प्रोडयूसर्स पर एक्स्ट्रा लोड डालने की जरुरत नहीं है, उनका कहना था कि जब फिल्म पिटने पर गायक प्रोडयूसर का घाटा शेयर नहीं करते तो मुनाफा क्यों शेयर करें.

वैसे भी लता या रफी को तो उन दिनों सबसे ज्यादा पैसा मिलता था, मुश्किल तो बाकी गायकों की थी. लोगों ने ये भी कहा चूंकि रफी साउथ में हिंदी फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन के बिजनेस से भी जुड़ गए थे, सो उनको पैसों की परेशानी नहीं थी और वो रिश्ते प्रोडयूर्स से खराब नहीं करना चाहते. इसलिए रफी ने लता को सपोर्ट नहीं किया. हालांकि कई लोग रफी के फैसले का भी बचाव करते हैं, उनका कहना था रफी नेकदिल आदमी थे. ऐसे में एक दिन फिल्म 'दो कलियां' का गाना 'तुम्हारी नजर क्यों खफा हो गई...' गाना रिकॉर्ड करते वक्त एक स्टेज पर दोनों की कुछ ऐसी बहस हुई कि खता बख्शने के बजाय दोनों ने बात करना, साथ काम करना बंद कर दिया.  

क्या था गिनीज बुक वाला मामला
इधर दोनों के बीच फिर एक विवाद आया जब लता-रफी के विवाद में गिनीज बुक भी आ गई, गिनीज बुक का मैनेजमेंट भी बीच में फंस गया, आखिर दोनों महान गायकों में से किसका पक्ष लें. दरअसल गिनीज बुक ने लताजी के नाम सबसे ज्यादा गाना गाने का रिकॉर्ड दर्ज कर दिया, इस पर रफी साहब ने गिनीज बुक प्रबंधन को चिट्ठी लिख डाली, मामला जब गरमाने लगा तो गिनीज बुक ने बाद में ये कैटगरी ही अपने नए संस्करण में गायब कर दी. तब संगीतकार जयकिशन ने दोनों को समझाया और दोनों साथ काम करने को राजी हो गए. 
हालांकि बाद में दोनों ने ये तल्खियां खत्म कीं और आखिर तक साथ गाते रहे थे. 1980 में अपनी मौत से ठीक पांच दिन पहले मोहम्मद रफी ने लता मंगेशकर के साथ फिल्म 'आस पास' के लिए अपना जो आखिरी गाना रिकॉर्ड किया था, उसके बोल थे- 'शहर में चर्चा है, दुनिया कहती है...'

कहानी में मोड़ पचास साल बाद तब आया जब लताजी ने एक इंटरव्यू में कहा कि रफी ने लिखित में भी खेद जताया था, तब वो साथ काम करने को राजी हुई थीं. इससे रफी के बेटे शाहिद रफी भड़क गए और एक 2012 में एक फ्रेस कॉन्फ्रेंस बुला डाली और उन्होंने लता मंगेशकर को खुला चैलेंज कर दिया और कहा कि- मेरे फादर ने अगर कोई ऐसा लैटर लिखा है तो लताजी मुझे दिखाएं, उनसे मैं माफी मांग लूंगा. लेकिन लता ने विवाद भड़कता देखकर शांत रहना ही बेहतर समझा. सो ये मसला उन दिनों काफी बड़ा हो गया था, रफी के बेटे तो अभी तक लताजी से नाराज हैं.

एंटरटेनमेंट की और खबरें पढ़ें