इस बात से बेहद नफरत करते थे मोहम्मद रफी, निधन से पहले रिकॉर्ड कर रहे थे ये गाना

फिल्म 'क्रोध' में अमिताभ बच्चन पर फिल्माए गए और अजीज साहब द्वारा गाया सुरों के सरताज मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) की काबिलियत और दीवानगी  को बयां करने के लिए काफी है, 'न फंकार तुझसा तेरे बाद आया, मोहम्मद रफी तू बहुत याद आया'.

इस बात से बेहद नफरत करते थे मोहम्मद रफी, निधन से पहले रिकॉर्ड कर रहे थे ये गाना

नई दिल्ली: 'बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है, मेरा महबूब आया है....' सुरों के सरताज मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन आज भी वे अपने सदाबहार गानों के जरिए आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं.  31 जुलाई को महानतम गायक मोहम्‍मद रफी की 40वीं पुण्‍यतिथि है. 31 जुलाई 1980 के दिन तीन हार्ट अटैक आए थे. इलाज के दौरान रफी का निधन हो गया था. उनकी पुण्यतिथि पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प बातें.

निधन से पहले इस गाने को कर रहे थे रिकॉर्ड
वैसे तो मोहम्मद रफी का हर गाया हुआ गाना उनके फैंस के लिए खास है, लेकिन एक गाना ऐसा है जोकि उनके फैंस चाह कर भी नहीं भूल सकते हैं. जैसा कि हम जानते हैं उनका निधन 31 जुलाई साल 1980 को अचानक हार्ट अटैक आने से हुआ था. वहीं निधन के कुछ देर पहले उन्होंने एक गाना गाया था जिसका नाम है 'शाम फिर क्यों उदास है दोस्त, तू कहीं आसपास है दोस्त'. लेकिन ये कोई नहीं जानता था कि ये गाना उनकी जिंदगी का आखिरी गाना होगा.

इस चीज से करते थे नफरत
आपको ये जानकर थोड़ी हैरानी होगी कि रफी साहब को गाने की पहली प्रेरणा एक फकीर से मिली थी. दरअसल, रफी के घर के करीब से एक फकीर गुजरा करता था जिसे देखकर वह उसकी तरह गाने की कोशिश किया करते थे. फिर धीरे-धीरे उन्हें इसका शौक लग गया. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मोहम्मद रफी को पब्लिसिटी बिल्कुल पसंद नहीं थी. उन्हें इससे नफरत थी. वो जब भी किसी शादी में जाते थे तो ड्राइवर से कहते थे कि यहीं खड़े रहो. रफी सीधे शादी करने वाले जोड़े के पास जाकर बधाई देते थे और फिर अपनी कार में आ जाते थे. वो जरा देर भी शादी में नहीं रुकते थे. गाने के अलावा मोहम्मद रफी को बैडमिंटन और पतंग उड़ाने का बहुत शौक था.  

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