October Movie Review: अलहदा इश्‍क की 'खूबसूरत सी' कहानी है वरुण धवन की 'अक्‍टूबर'

मैं वरुण धवन की कभी भी बड़ी फैन नहीं रही, लेकिन इस‍ फिल्‍म के डेन से मुझे भी प्‍यार हो गया. अक्‍सर 'थोड़े में ज्‍यादा' का मजा देने की कोशिश में लगे रहने वाले वरुण धवन ने इस फिल्‍म में अपनी आंखों से कमाल किया है.

October Movie Review: अलहदा इश्‍क की 'खूबसूरत सी' कहानी है वरुण धवन की 'अक्‍टूबर'
'अक्‍टूबर' लेखिका जूही चतुर्वेदी की कहानी है. (फोटो साभार @Risingsunrsf/Youtube)

नई दिल्‍ली: वरुण धवन बॉलीवुड के सबसे सफल न्‍यूकमर के तौर पर देखे जाते रहे हैं. अभी तक मसाला फिल्‍मों में नाचने-गाने और काफी लाउड किरदार करने वाले वरुण, निर्देशक शूजित सरकार की फिल्‍म 'अक्‍टूबर' में डेन बने नजर आए हैं. इस फिल्‍म की सबसे बड़ी सफलता यही है कि 'अक्‍टूबर' देखते हुए जब आप डेन से मिलेंगे तो आपको वरुण धवन कहीं याद नहीं आएंगे. 'अक्‍टूबर' ने बनिता संधू के तौर पर बॉलीवुड को एक मेच्‍योर एक्‍ट्रेस दी है. लेकिन फिल्‍म की असली हीरो उसकी कहानी है जिसका सारा क्रेडिट लेखिका जूही चतुर्वेदी को मिलना चाहिए.

कास्‍ट: वरुण धवन, बनिता संधु, गीतांजलि रॉय, साहिल वेदोलिया
डायरेक्‍टर: शूजित सरकार
स्‍टार: 4 स्‍टार

यह है कहानी
डेन (वरुण धवन) होटल मैनेजमेंट का स्‍टूडेंट है और दिल्‍ली के एक 5 सितारा होटल में अपना कोर्स कर रहा है. डेन को होटल स्‍टाफ मैनेजर अक्‍सर सफाई के काम में ही लगाए रखता है. जबकि वह बार या होटल के रेस्‍तारां में काम करने के लिए मिन्नतें करता रहता है. डेन, अपनी इस चिड़चिड़ाहट को अपने काम में निकालता रहता है और उसे इसके चक्‍कर में मैनेजर से सजा भी मिलती है. इसी बैच में एक साउथ इंडियन लड़की भी स्‍टूडेंट है शिवली अय्यर (बनिता संधु), जो काफी होशियार है. होटल में चल रही 31 दिसंबर की पार्टी में वरुण नहीं पहुंचता है और इसी पार्टी में एक हादसा होता है और शिवली घायल हो जाती है. यूं तो डेन और शिवली की इस बीच कोई बातचीत या दोस्‍ती नहीं दिखाई गई है, लेकिन अस्‍पताल के बिस्‍तर पर पड़ी शिवली को देख डेन को एक अनोखा बंधन महसूस होता है.

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कहानी है असली हीरो
निर्देशक शूजित सरकार अपनी पिछली फिल्‍म 'पीकू' में कब्‍ज जैसे विषय पर मीठी सी कहानी कह गए, वैसी ही एक मिठास और खूबसूरती 'अक्‍टूबर' भी परोसती है. हालांकि दोनों फिल्‍मों की तुलना किसी भी स्‍तर पर एक-दूसरे से नहीं की जा सकती है. फिल्‍म की कहानी जूही चतुर्वेदी ने लिखी है, जो इससे पहले भी 'विक्‍की डोनर' और 'पीकू' जैसी बेहद अलग विषय की कहानियां लिखकर दर्शकों और आलोचकों से पहले ही तारीफें बटोर चुकी हैं. 'अक्‍टूबर' जैसी कहानी लिखने के लिए भी जूही को कुछ वैसी ही तारीफें मिलनी चाहिए. अस्‍पताल के आईसीयू में कोमा में पड़ी शिवली को देखने पहुंचते डेन, शिवली की मां के दर्द को आप सिनेमाघर में बैठकर महसूस कर सकते हैं. प्‍यार की एक बेहद खूबसूरत तस्‍वीर 'अक्‍टूबर उकेरती नजर आती है. हालांकि इंटरवेल के बाद की फिल्‍म के कुछ हिस्‍सों को थोड़ा तेज किया जा सकता था.

आखों से एक्टिंग करते दिखे वरुण
एक्टिंग की बात करें तो अपनी कमर्शियल फिल्‍मों के बंडल में वरुण इससे पहले फिल्‍म 'बदलापुर' में भी अपनी एक्टिंग का नमूना दिखा चुके हैं. मैं वरुण धवन की कभी भी बड़ी फैन नहीं रही, लेकिन इस‍ फिल्‍म के डेन से मुझे भी प्‍यार हो गया. अक्‍सर 'थोड़े में ज्‍यादा' का मजा देने की कोशिश में लगे रहने वाले वरुण धवन ने इस फिल्‍म में अपनी आंखों से कमाल किया है. डेन की चिड़ से लेकर उसके सवालों तक, आपको सब पसंद आएगा. 'अक्‍टूबर' में वरुण धवन की परर्फोमेंस ऐसी है कि सालों बाद भी जब वरुण धवन के करियर पर बात की जाएगी तो उनकी इस फिल्‍म का जिक्र तारीफों के साथ जरूर होगा.

varun dhawan

इस फिल्‍म से पहली बार बॉलीवुड में एंट्री कर रहीं बनिता संधु आपको इस फिल्‍म में कुछ ही शब्‍द बोलती नजर आएंगीं. लेकिन बिस्‍तर पर कोमा मरीज बनने से लेकर व्‍हील चेयर पर आने तक, उन्‍होंने हर फीलिंग को दर्शकों तक पहुंचाया है. बनिता के तौर पर बॉलीवुड को एक मेच्‍योर एक्‍ट्रेस मिली है. फिल्‍म में बनीता संधु की मां का किरदार करने वाली एक्‍ट्रेस गीतांजति रॉय ने भी तारीफ के काबिल काम किया है. अगर आप वरुण धवन की बाकी फिल्‍मों की तरह की किसी मसाला फिल्‍म की उम्‍मीद से 'अक्‍टूबर' देखने जाएंगे तो आप जरूर निराश होंगे. लेकिन अगर आप फिल्‍मों के शौकीन है और एक खूबसूरत कहानी देखना चाहते हैं तो 'अक्‍टूबर' आपके लिए ही बनी है.

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