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B'Day: सिंगर जिसने किया था शादी के लिए माधुरी दीक्षित को रिजेक्ट

सुरेश वाडेकर (Suresh Wadkar) का आज जन्मदिन है.

B'Day: सिंगर जिसने किया था शादी के लिए माधुरी दीक्षित को रिजेक्ट
फाइल फोटो

नई दिल्ली: अपनी मधुर आवाज से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले सुरेश वाडेकर (Suresh Wadkar) का आज जन्मदिन है. सुरेश वाडेकर का जन्म 7 अगस्त, 1955 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था. उन्हें बचपन से ही गायकी का शौक था. उनके पिता ने उनका नाम सुरेश इसलिए रखा, ताकि वह अपने बेटे को बड़ा गायक बनता देख सकें. सुरेश ने कोशिश जारी रखी और आखिरकार उन्होंने अपने पिता का सपना पूरा किया.

माधुरी दीक्षित सेे होने वाली थी शादी 
उन दिनों सिंगर सुरेश वाडेकर (Suresh Wadkar) का बोलबाला था. मराठी परिवारों में उनकी अच्छी धाक थी. माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) को भी वो बहुत पसंद थे. उन दिनों माधुरी का संगीत और नृत्य में इंटरेस्ट देख उनके एक पारिवारिक मित्र ने सजेस्ट किया कि सुरेश वाडकर के लिए लड़की देखी जा रही है और माधुरी उनके लिए परफेक्ट रहेगी. माधुरी के परिवार वालों को भी यह रिश्ता जच गया. जब रिश्ते की बात करने परिवार के सदस्य सुरेश वाडकर के घर गए तो सुरेश ने एक बार माधुरी से मिलने की इच्छा जताई. माधुरी को देखने के बाद वाडेकर परिवार ने यह कह रिजेक्ट कर दिया कि लड़की बहुत दुबली है.

महज 10 साल की आयु से ही उन्होंने संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दिया. उन्होंने ना सिर्फ हिंदी, बल्कि मराठी के साथ कई भाषाओं की फिल्मों में गया है. इसके साथ उन्होंने कई भजनों के लिए भी अपनी आवाज दी है. रवींद्र जैन ने 'राजश्री प्रोडक्शन' की फिल्म 'पहेली' में पहला फिल्मी गीत 'वृष्टि पड़े टाकुर टुकुर' गवाया था और जयदेव ने उनसे फिल्म 'गमन' का 'सीने में जलन' गाने का मौका दिया, जिसके बाद सभी उन्हें एक प्रतिभाशाली गायक की दृष्टि से देखने लगे.

लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने सुरेश को 1981 की फिल्म 'क्रोधी' में 'चल चमेली बाग में' वाले गाने को लता जी के साथ गाने का मौका दिया था. उन्होंने फिल्म 'प्यासा सावन' का मशहूर गीत 'मेघा रे मेघा रे जैसे खूबसूरत सुपरहिट गाने लता जी के साथ गाये. इसमें उन्होंने 'मेरी किस्मत में तू नहीं शायद', 'मैं हूं प्रेम रोगी' जैसे मधुर गीत गाए. इसके बाद वह इतने प्रसिद्ध हुए कि अब वह घर-घर पहचाने जाने लगे.

गुलजार और लता सुरेश से बहुत अधिक प्रभावित थे. उन्होंने लंबे समय के बाद अपनी फिल्म 'माचिस' में उनसे 'छोड़ आए हम' और 'चप्पा चप्पा चरखा चले' जैसे गीत गवाए. विशाल भारद्वाज के साथ सुरेश ने फिल्म 'सत्या' और 'ओमकारा' में कुछ बेहद अनोखे गाने गाए. सुरेश ने हिंदी और मराठी गानों के अलावा कुछ गाने भोजपुरी और कोंकणी भाषा में भी गाए हैं. उन्होंने अलग-अलग भाषाओं में कई भक्ति गीत गाए.

मुंबई और न्यूयॉर्क में सुरेश का अपना संगीत स्कूल है, जहां वह संगीत के विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा देते हैं. उन्होंने संगीत की दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. उन्होंने 'Suresh Wadkar Ajivasan Music Academy' नामक पहला ऑनलाइन संगीत स्कूल खोला है, जिसके माध्यम से वह नए संगीत महत्वाकांक्षी छात्रों को अपना संगीत ज्ञान और अनुभव देते हैं. 2007 में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें 'महाराष्ट्र प्राइड अवार्ड' से सम्मानित किया था और साल 2011 में उन्हें मराठी फिल्म 'ई एम सिंधुताई सपकल' के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' मिला. मध्य प्रदेश में उन्हें प्रतिष्ठित 'लता मंगेशकर अवार्ड' से भी सम्मानित किया गया था. सुरेश वाडेकर को इसी साल ‘पद्मश्री' से भी नवाजा गया.

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