लता मंगेशकर के जन्मदिन पर सुनिए उनके जीवन की अनसुनी दिलचस्प कहानियां

 जन्मदिन के मौके पर पेश हैं कुछ ऐसी दिलचस्प अनसुनी कहानियां, जो लताजी की निजी जिंदगी से जुड़ी हैं... 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Sep 28, 2020, 12:49 PM IST

नई दिल्ली: लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) का नाम जब भी चर्चा में आता है, लोगों के मन में बस श्रद्धा ही उमड़ती है, उनकी आवाज की चाशनी याद आ जाती है और लोगों को हैरान होती है कि रोमांस से सदा दूर रहने वालीं लता मंगेशकर इतना रोमांटिक होकर कैसे गा लेती थीं. ज्यादातर को लगता है कि उनका जीवन तो बेहद सात्विक किस्म का है, उनका तो किसी से कभी कोई विवाद भी नहीं रहा होगा और ना ही वो गानों के अलावा कभी चर्चा में रही होंगी, लेकिन ये सच नहीं है. उनके जन्मदिन के मौके पर पेश हैं कुछ ऐसी दिलचस्प अनसुनी कहानियां, जो लताजी की निजी जिंदगी से जुड़ी हैं... 

 

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जब हॉस्पिटल में पड़ा डायरेक्टर लता मंगेशकर से रोज वही गाना सुनता था

Lata Mangeshkar

नरगिस-राजकपूर की फिल्म 'चोरी चोरी' फिल्म का एक गाना नरगिस पर फिल्माया गया था. गाने के बोल थे 'रसिक बलमा...' गाना लता मंगेशकर ने गाया था और म्यूजिक शंकर जयकिशन ने दिया था. दर्द से भरा ये गीत एक मशहूर फिल्म डायरेक्टर के लिए कैसे दवा बन गया, इसकी कहानी काफी दिलचस्प है. मशहूर फिल्म डायरेक्टर थे महबूब खान, उनकी सुपरहिट मूवी 'मदर इंडिया' को आज की पीढ़ी भी जानती है. उनकी तबियत काफी खराब थी और उनका इलाज अमेरिका में चल रहा था, उनको रातों को नींद नहीं आती थी. तब वो अमेरिका से लताजी को फोन करते थे कि मुझे 'चोरी चोरी' का गाना 'रसिक बलमा...' सुना दो, तब लताजी उनको वो गाना सुनातीं थीं, ऐसा कई बार हुआ. धीरे-धीरे महबूब खान की तबियत सुधरने लगी और फिर वो एकदम सही हो गए. बॉलीवुड की गलियों में ये कहानी काफी चर्चित है.

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जब बिगड़ गई मोहम्मद रफी से

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मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर ने कई सालों तक साथ नहीं गाया था. लता रफी की आवाज को भगवान की आवाज बताया करती थीं, लेकिन रफी की एक बात से वो बेहत नाराज हो गईं. दरअसल अरसे से गायक ये मांग कर रहे थे कि गाने की फीस के अलावा हिट हुए गानों से जब प्रोडयूसर या संगीतकार रॉयल्टी आदि का पैसा कमा रहे हैं, तो उनका भी हिस्सा होना चाहिए. उनको भी रॉयल्टी जैसा कुछ मिलना चाहिए. इधर मोहम्मद रफी को पैसे की इतनी समस्या नहीं थी क्योंकि वो हिंदी फिल्मों के साउथ के राइट्स खरीद लेते थे और उससे उनकी कमाई अच्छी हो जाती थी. ऐसे में रफी ने ये कहकर टाल दिया कि जब फिल्में पिटती हैं, गाने भी नहीं चलते तो क्या प्रोडयूसर को हुए नुकसान में हम कोई सहयोग करते हैं? लताजी का पूरा आंदोलन ही फेल हो गया था, मो. रफी की वजह से. एक दिन दोनों के बीच रिकॉर्डिंग को लेकर कुछ अनबन हुई तो फिर सालों बात ही होना बंद हो गई. बाद में लताजी ने दावा किया था कि मो. रफी ने उनसे पत्र लिखकर माफी मांगी थी.

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ऐसे गाया लता मंगेशकर ने पहली बार कैबरे सॉन्ग

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आपने हैलन पर फिल्माया गया 'आ जाने जां...' गाना जरूर देखा सुना होगा, फिल्म 'इंतकाम' के इस गाने के साथ वो हुआ जो उससे पहले बॉलीवुड में कभी नहीं हुआ. लता मंगेशकर इससे पहले कभी कैबरे सॉन्ग नहीं गाती थीं. वो हमेशा मादक अंदाज में गाने और आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल से बचती थीं. इसलिए इस तरह के सारे गाने आशा भोंसले के हिस्से में चले जाते थे और धीरे-धीरे आशा भोंसले कैबरे क्वीन के तौर पर उभर रही थीं, मादक अंदाज में गाए उनके कई गाने बेहद मशहूर हैं. लेकिन लक्ष्मीकांत प्यारेलाल इस गाने को लता जी से ही गवाना चाहते थे. जब लताजी के समझाने पर भी वो दोनों नहीं माने तो इस कैबरे सॉन्ग को गाने से पहले हिचक रहीं लताजी ने दो शर्तें रख दीं, एक तो ये कि इस गाने में कोई भी आपत्तिजनक शब्द नहीं होगा, दूसरी ये कि ये गाना किसी अच्छे किरदार पर फिल्माया जाएगा. उनकी दोनों शर्तें मान लीं गईं. एक दो शब्द थे भी तो वो इस गाने से निकाल दिए गए और लताजी की मर्जी से ये गाना हैलन पर फिल्माया गया और आज की तारीख में बहुत सारे लोग इस गाने को आशा भोंसले का ही समझते हैं.

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जब आशा भोंसले के ससुर से हो गया लता जी का पंगा

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सचिन देव वर्मन उर्फ एसडी वर्मन आरडी वर्मन के पिता थे, जिन्होंने बाद में आशा भोंसले से शादी की थी. सचिन दा का एक गाना था, 'पग ठुमक चलत बलखाए, हाए सैंया कैसे धरूं धीर', फिल्म 'सितारों से आगे' के लिए ये गाना लता मंगेशकर ने गाया था. लेकिन सचिन दा आसानी से किसी गाने को ओके नहीं करते थे और अक्सर गायक उनकी इस आदत से परेशान थे, कि वो दो-दो तीन-तीन बार गाना रिकॉर्ड करवाते थे. इस गाने की रिकॉर्डिंग के बाद सचिन दा ने फिर लताजी को संदेश पहुंचवाया कि एक और बार रिकॉर्ड करने की जरुरत है. लेकिन लताजी को उनकी आदत का पता था, सो कई बार उन्होंने भी किसी और प्रोजेक्ट्स में व्यस्त होने की बात कहके टाला. सचिन दा भी लताजी के बहाने को समझ चुके थे, सो उन्होंने वो गाना आशा भोंसले पर भी रिकॉर्ड करवा दिया.

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लताजी वर्मन परिवार का हमेशा के लिए हिस्सा बन गईं

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लेकिन इस गाने में उतना मजा भी नहीं आया, जितना कि लता जी की आवाज में आ रहा था. सो फिल्म में उन्होंने लताजी की आवाज में ही गाना इस्तेमाल किया. लेकिन लता जी बुरा मान गईं औऱ दोनों के बीच तल्खियां बढ़ गईं. हालांकि नुकसान सचिन दा का भी हुआ, लता की भरपाई गीता दत्त या आशा भोंसले से नहीं हो  सकती थी. इसी नाराजगी में पांच साल गुजर गए. पांच साल बाद महमूद की फिल्म 'छोटे नवाब' में लता ने पंचम दा की धुन पर तैयार गाना 'घर आजा...' रिकॉर्ड किया. इस तरह लता की बैकगेट से एंट्री हुई और अगले साल वो सचिन दा की 'बंदिनी' के जरिए फिर से उनकी फिल्मों में वापस आ गईं. हालांकि आशा भोंसले से पंचम दा की शादी के बाद लताजी वर्मन परिवार का हमेशा के लिए हिस्सा बन गईं.

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जब किशोर कुमार ने गाया लता मंगेशकर का गाना

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1962 में किशोर कुमार एक ऐसी फिल्म में काम कर रहे थे, जिसमें वो एक्टिंग भी कर रहे थे, और गाने भी उन्हें गाने थे. इस फिल्म का नाम था 'हाफ टिकट'. इस फिल्म में उनके साथ प्राण भी थे. तो गाने के बोल थे आंख सीधी लगी.... इस गाने के हीरो थे प्राण, जिनकी आवाज रिकॉर्ड करनी थी किशोर कुमार को और इस गाने में हीरोइन के तौर पर थे किशोर कुमार, जो एक कॉमिक सीक्वेंस में एक लड़की के वेश में थे, उनकी आवाज को गाने में रिकॉर्ड करना था लता मंगेशकर को. किशोर कुमार सलिल चौधरी से जिद पकड़ गए कि उनके लड़की वाले रोल के लिए भी आवाज वही रिकॉर्ड करेंगे, मतलब उस गाने में चाहे लड़के की आवाज हो या लड़की की, वो दोनों ही रिकॉर्ड करना चाहते थे. सलिल चौधरी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि लता मंगेशकर को मना कर सकें, इधर वो इस बात से सहमत हो चुके थे कि किशोर ही आवाज निकालेंगे तो ज्यादा नेचुरल लगेगी. किस्मत की बात कि उस दिन लता मंगेशकर कहीं फंस गईं, और उन्हें देर हो गई. ऐसे में किशोर कुमार ने जिद पकड़ ली कि गाना तो अभी रिकॉर्ड होगा, मजबूरन सलिल चौधरी भी उनके आगे झुक गए.

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फिर जो गाना तैयार हुआ, उसमें लता मंगेशकर की जगह भी किशोर कुमार की ही आवाज है, आप इस गाने को यहां देख सकते हैं और देखकर पाएंगे कि लता इस अंदाज में शायद ही गा पातीं.