जान की बाजी लगाकर Sunil Dutt ने जीता था Nargis का दिल, जानिए पूरी लवस्टोरी

हिन्दी सिनेमा जगत में सुनील दत्त (Sunil Dutt) पहले ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने सही मायने में 'एंटी हीरो' की भूमिका निभायी और उसे स्थापित करने का काम किया.

जान की बाजी लगाकर Sunil Dutt ने जीता था Nargis का दिल, जानिए पूरी लवस्टोरी
फोटो साभार: इंस्टाग्राम

नई दिल्ली: सुनील दत्त (Sunil Dutt) को एक्टर बनने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा. उन्होंने रेडियो जॉकी के तौर पर रेडियो सिलोन पर फिल्मी सितारों के इंटरव्यू से करियर की शुरुआत की थी. हिन्दी सिनेमा जगत में सुनील दत्त (Sunil Dutt) पहले ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने सही मायने में 'एंटी हीरो' की भूमिका निभायी और उसे स्थापित करने का काम किया. झेलम जिले के खुर्द गांव में 6 जून 1929 को जन्में बलराज रघुनाथ दत्त उर्फ सुनील दत्त (Sunil Dutt) बचपन से ही अभिनेता बनने की ख्वाहिश रखते थे. अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1955 में प्रदर्शित फिल्म रेलवे प्लेटफार्म से की. 

रेलवे प्लेटफॉर्म फिल्म के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली उसे वह स्वीकार करते चले गये. उस दौरान उन्होंने कुंदन, राजधानी, किस्मत का खेल और पायल जैसी कई बी ग्रेड फिल्मों मे अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई.सुनील दत्त (Sunil Dutt) की किस्मत का सितारा 1957 में प्रदर्शित फिल्म 'मदर इंडिया' से चमका. इस फिल्म में सुनील दत्त (Sunil Dutt) का किरदार एंटी हीरो का था. जहां तक सुनील और नरगिस (Nargis) की मोहब्बत की बात है तो कहानी दिलचस्प है.

सुनील दत्त (Sunil Dutt) और नरगिस (Nargis) के बीच प्यार 'मदर इंडिया' के सेट पर हुआ था. 'मदर इंडिया' के सेट पर दरअसल एक ऐसी घटना हुई, जिससे जिसने नरगिस (Nargis) को गहरे प्रभावित किया. 'मदर इंडिया' के सेट पर आग लग गई थी और नरगिस (Nargis) दत्त को खतरे में पड़ता देख सुनील दत्त (Sunil Dutt) ने उनकी जान बचाई थी. इस दौरान सुनील दत्त (Sunil Dutt) खुद भी चोटिल हो गए थे. इस घटना ने नरगिस (Nargis) की सोच बदल दी, उन्हें लगने लगा कि सुनील दत्त (Sunil Dutt) ही उनकी जिंदगी के हमसफर बन सकते हैं.अपनी किताब 'द ट्रू लव स्टोरी ऑफ़ नरगिस (Nargis) एंड सुनील दत्त (Sunil Dutt)' में नरगिस (Nargis) दत्त ने लिखा था कि राजकपूर से अलग होने के बाद वो सुसाइड करने के बारे में सोचने लगी थीं. लेकिन सुनील दत्त (Sunil Dutt) ने उन्हें संभाल लिया था. नरगिस (Nargis) ने लिखा कि उन्होंने अपने और राज कपूर के बारे में सुनील दत्त (Sunil Dutt) को सबकुछ बता दिया था और सुनील दत्त (Sunil Dutt) को उन पर पूरा यकीन था.

शादी के बाद सुनील पहले की तरह फिल्मों में काम करते रहे, लेकिन नरगिस (Nargis) ने बच्चों को जन्म देने के लिए फिल्मों से ब्रेक लिया. 1970 के दशक के अंत में जब सुनील और नरगिस (Nargis) ने बेटे संजय दत्त को ‘रॉकी’ फिल्म से लॉन्च किया तो उसके मुहूर्त के लिए मुंबई के महबूब स्टूडियो में दोनों को बधाई देने फिल्मी दुनिया के जाने-माने नाम पहुंचे थे.1979 में दिल्ली में राज्यसभा के सत्र में शामिल होने आईं नरगिस (Nargis) अचानक बीमार पड़ गईं. पहले पीलिया का शक हुआ और उसी रात मुंबई लौटने के बाद उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. अगले दिन इलाज के लिए उन्हें न्यूयॉर्क ले जाया गया. जहां अगली सुबह वह स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में भर्ती हुईं. उस वक्त तक यही लग रहा था कि वह जल्द ही घर लौट आएंगी. हालांकि, एक साल बाद कई सर्जरी करवाकर वह भारत लौटीं. 1981 में नरगिस (Nargis) का देहांत हो गया. 

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