'ठग्‍स ऑफ हिंदोस्‍तान' के ये 5 डायलॉग ही आपके अंदर फिल्म देखने की बेचैनी बढ़ा देंगे

ट्रेलर में जबरदस्त डायलॉग के साथ वीएफएक्‍स का कमाल काफी मेजदार दिख रहा है.

'ठग्‍स ऑफ हिंदोस्‍तान' के ये 5 डायलॉग ही आपके अंदर फिल्म देखने की बेचैनी बढ़ा देंगे
यह फिल्म इसी साल दिवाली के मौके पर 8 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है (फोटो साभारः वीडियो ग्रैब, यूट्यूब)

नई दिल्ली: अमिताभ बच्चन और आमिर खान की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज किया गया. इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया. रिलीज के चंद घंटों बाद ही इसे 5 लाख से ज्यादा बार देखा गया. यश राज बैनर्स के तले बनी मल्‍टी स्‍टारर फिल्‍म 'ठग्‍स ऑफ हिंदोस्‍तान' के ट्रेलर की शुरुआत में बताया गया है कि यह कहानी 1795 के उस दौर की है जब ब्रिटिश लोगों ने ईस्‍ट इंडिया कंपनी के नाम से हमारे देश पर हुकूमत करना शुरू कर दिया था. उस समय आजाद नाम के एक ठग ब्रिटिश हुकूमत के लिए मुसीबत बन गया था. हालत यह हुई कि ब्रिटिश हुकूमत ने इस ठग से निपटने के लिए एक और ठग यानी फिरंगी मल्‍लाह की मदद ली. आमिर खान का किरदार इस फिल्‍म में ऐसा है कि वह किसकी तरफ है यह समझना मुश्किल है. 

Thugs of Hindostan
(फोटो साभारः वीडियो ग्रैब, यूट्यूब)

ट्रेलर में जबरदस्त डायलॉग के साथ वीएफएक्‍स का कमाल काफी मेजदार दिख रहा है और कई जगह आपको बड़े-बड़े जहाज और सितारों के लुक का अंदाज आपको 'बाहुबली' की ग्रैंड स्‍टाइल की याद दिला सकते हैं. यह फिल्म इसी साल दिवाली के मौके पर 8 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. तो आइए, आपके ट्रेलर के वो पांच डायलॉग पढ़ाते हैं, जिसे पढ़कर आपके अंदर फिल्म देखने की बेचैनी पहले से ज्यादा बढ़ जाएगी.

  1. ढाई दिन की दोपहरी... शाम रात अमावश की, शीशम के घोड़े पर होकर सवार... आएगी सामत गुनहगारों की.
  2. हू इज दिस मैन? हिंदुस्तानी है.. हमारा दुश्मन है, नाम है आजाद.
  3. आजाद को पकड़ने के लिए कोई आजाद जैसा ठग चाहिए.
  4. आजादी है गुनाह... तो कबूल है सजा, अब तो होगा वही... जो है मंजूरे खुदा.
  5. धोखा स्वभाव है मेरा... और भरोसा मेरा.

बता दें कि दरअसल यह एपिक एक्‍शन-एडवेंचर फिल्‍म ब्रिटिश लेखक और प्रशासक फिलिप मीडोज टेलर के 1839 के उपन्‍यास कंफेशंस ऑफ ए ठग (Confessions of a Thug) पर आधारित है. इसमें एक ऐसे ठग की कथा है जिसका गैंग 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश भारत में अंग्रेजों के लिए खासा सिरदर्द बन गया था. यह उपन्‍यास जब प्रकाशित हुआ तो 19वीं सदी के पूर्वार्द्ध में अपनी रोचक कथावस्‍तु के कारण यह ब्रिटेन का बेस्‍ट-सेलर क्राइम उपन्‍यास बन गया.

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