close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

यह है 'टॉयलेट एक नफरत कथा': दिव्या भारती को रोज मिलती हैं धमकियां

भारती बताती हैं जब उन्हें यह पता चला तो उन्होंने इन कर्मचारियों से बात की और उसका वीडियो यूट्यूब पर अपलोड कर दिया. कुछ ही दिनों में इसे 8 हजार व्यू मिले. 

यह है 'टॉयलेट एक नफरत कथा': दिव्या भारती को रोज मिलती हैं धमकियां
दिव्या को राज्य छोड़ने तक पर मजबूर किया गया (फोटो साभार- फेसबुक)

नई दिल्ली: बड़े पर्दे पर अक्षय कुमार की फिल्म 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' तो लगातार वाहवाही लूट ही रही है और बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छी कमाई कर रही है. अब अगर हम बड़े पर्दे से निकलकर बाहर की ओर देखें, तो हमें नजर आती है तमिलनाडु की एक लड़की दिव्या भारती की कहानी. फिल्म 'टॉयलेट- एक प्रेम कथा' में अक्षय तो सबसे लड़कर पूरे गांववालों की शौच के प्रति सोच को बदल देते हैं, लेकिन दिव्या भारती की 'टॉयलेट एक नफरत कथा' रियल लाइफ से जुड़ी है, जिन्हें हर रोज धमकी भरे फोन आ रहे हैं. रेप से लेकर एसिड अटैक और हत्या तक की धमकियां दी जा रही हैं. यही नहीं, उनके खिलाफ 12 केस दर्ज किए गए हैं. आखिर दिव्या के साथ ऐसा क्यों हो रहा है, आइए जानते हैं इस मामले को विस्तार से.

हिंदी अखबार दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक खबर के अनुसार दिव्या पर आरोप यह है कि उन्होंने जातीय और सामुदायिक नफरत भड़काने की कोशिश की है और इसके लिए उन्हें राज्य छोड़ने तक पर मजबूर किया गया. इन आरोपों के पीछे है, उनकी बनाई एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म और एक यूट्यूब वीडियो. दरअसल, दिव्या ने तमिल भाषा में एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई है, 'काक्कूस'- इसका मतलब है, टॉयलेट.

Kakkoos
(फोटो साभार- यूट्यूब)

भारती के अनुसार जिस गंदगी को हम देखना तक नहीं चाहते देश के करीब आठ लाख लोग रोज उसे हमारे लिए अपने हाथों से साफ कर रहे हैं, मेनहोल में उतर रहे हैं. इस गंदगी के बीच ही उनका पूरा जीवन निकल जाता है और इसी में उनकी मौत हो जाती है. यही फिल्म का विषय है. गौरतलब है कि 2013 में सुप्रीम के कोर्ट के आदेश के बाद देश में हाथ से मैला सफाई पर प्रतिबंध है. अगर कोई ऐसा करवाता है तो 5 साल की जेल का प्रावधान है. इसके बावजूद हाथ से मैला साफ करना जारी है.

बता दें, 14 जनवरी 2017 को यूट्यूब पर अपलोड की गई इस शॉर्ट फिल्म को अब तक 3,93,465 बार देखा जा चुका है. इस वीडियो को 12,558 लोगों द्वारा लाइक किया है और 1,394 कमेंट्स भी आए हैं. रिपोर्ट्स के अऩुसार फिल्म इस साल 26 फरवरी को पहली बार चेन्नई में प्रदर्शित हुई. एक कल्चरल ग्रुप ने इसकी अगली स्क्रीनिंग चार मार्च को नागरकोइल में रखी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका, क्योंकि विरोध के कारण तिरुनेलवल्ली में पुलिस को लगा कि इससे कानून और व्यवस्था का संकट पैदा हो सकता है.

इसके बाद कोयम्बटूर में फिल्म का प्रदर्शन होना था, लेकिन इस पर भी रोक लग गई. कई तरह की आपत्तियां इस पर लगाई जाती रहीं. कभी कहा गया कि फिल्म का सर्टिफिकेट नहीं लिया गया है, तो कभी कहा गया कि भारती नक्सली बैकग्राउंड से हैं, लेकिन बड़ा बदलाव आया 13 जुलाई के बाद. अन्ना यूनिवर्सिटी के 15 सेनेटरी कर्मचारियों ने डीन के खिलाफ पुलिस में अमानवीय व्यवहार की शिकायत की. अगले दिन इन सभी को नौकरी से हटा दिया गया. इन लोगों ने यूनिवर्सिटी के गेट पर प्रदर्शन शुरू किया तो पुलिस ने इन्हें खदेड़ दिया. 

भारती बताती हैं जब उन्हें यह पता चला तो उन्होंने इन कर्मचारियों से बात की और उसका वीडियो यूट्यूब पर अपलोड कर दिया. कुछ ही दिनों में इसे 8 हजार व्यूज़ मिले. इसके बाद उन्हें लोगों के धमकी भरे फोन आने लगे और वीडियो हटाने की चेतावनियां दी जाने लगी. फिर 26 जुलाई को उन्हें मदुरै के पुलिस कमिश्नर के ऑफिस से फोन आया और उन्हें ऑफिस आने के लिए कहा गया. वह इसके लिए राजी भी हो गईं, लेकिन इसके पहले कि वह पहुंचती पुलिस उनके घर पहुंची और गिरफ्तार कर लिया. यह गिरफ्तारी 2009 के एक केस में बताई गई. तब भारती मदुरै के लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्र थीं. होस्टल के एक छात्र की सांप के काटने से मौत हो गई थी और छात्रों ने उसके परिवार को मुआवजा देने के लिए आंदोलन किया था.

आठ साल बाद इस केस को रहस्यमयी तरीके से भारती के लिए निकाल लिया गया, हालांकि उसी दिन उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया. अगले दिन दलित पल्लर कम्यूनिटी की प्रतिनिधि पुथिया तमिलागम राजनीतिक पार्टी के नेता के कृष्णास्वामी ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया और कहा कि 'काक्कूस' से उनकी कम्यूनिटी की भावनाएं आहत हुई हैं. भारती ने 29 जुलाई को पुलिस में शिकायत की. भारती बताती हैं कि इसके बाद से लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं.