वैजयन्ती माला से इस वजह से अलग हुए थे दिलीप कुमार, टूट गया एक खूबसूरत रिश्ता

आज एक्ट्रैस वैजयन्ती माला का जन्मदिन है. वे साउथ से हिंदी फिल्मों में आई पहली सुपर स्टार थीं. वैजयंती माला की जोड़ी दिलीप कुमार के साथ ऑन स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन खूब सराही गई.

वैजयन्ती माला से इस वजह से अलग हुए थे दिलीप कुमार, टूट गया एक खूबसूरत रिश्ता
वैजयंती माला और दिलीप कुमार की जोड़ी असल जिंदगी में बनते-बनते रह गई

नई दिल्ली: आज एक्ट्रैस वैजयन्ती माला का जन्मदिन है. वे साउथ से हिंदी फिल्मों में आई पहली सुपर स्टार थीं. डांस में पारंगत वैजयन्ती माला को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम जमाने में ज्यादा स्ट्रगल नहीं करना पड़ा.

वैजयन्ती माला की जोड़ी दिलीप कुमार के साथ ऑन स्क्रीन और ऑफ स्क्रीन खूब सराही गई. कहते हैं, एक वक्त था जब दिलीप कुमार वैजयन्ती माला के इश्क में दीवाने थे. उनकी जोड़ी पहली बार परदे पर 1955 की फिल्म 'देवदास' में दिखाई पड़ी. इस फिल्म में दिलीप कुमार ने देवदास और वैजयन्ती मालाने चंद्रमुखी की भूमिका निभाई थी. देवदास ने वैजयन्ती के काम की इतनी तारीफ कर दी कि फिल्म की हीरोइन सुचित्रा सेन जो पारो बनी थीं, उनसे नाराज हो गई थीं. इस फिल्म के लिए जब वैजयन्ती माला को सर्वश्रेष्ठ सह कलाकार का अवार्ड मिला तो उन्होंने अवार्ड लेने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि फिल्म में वो साइड हीरोइन नहीं, बल्कि सुचित्रा सेन की तरह हीरोइन थीं.

दिलीप कुमार की बन गईं फेवरेट
इसके बाद दिलीप कुमार ने बीआर चोपड़ा के बैनर में बनने वाली अगली फिल्म 'नया दौर' के लिए वैजयन्ती माला के नाम की शिफारिश की. दिलीप कुमार और वैजयन्ती माला को जानने वाले बताते थे कि दोनों की बात शादी तक पहुंच गई थी. एक के बाद एक उनकी कई हिट फिल्में आईं, जैसे- 'मधुमति', 'पैगाम', 'गंगा जमुना'. 

1964 में आई सुपर हिट फिल्म 'लीडर' में एक बार फिर दोनों साथ में नजर आए. उस फिल्म में दोनों के बीच की केमिस्ट्री साफ महसूस की जा सकती है. वैजयन्ती माला सुपर हिट थीं. उन्हेें उस दौर की नंबर वन हीरोइन कहा जाने लगा. उनके पास एक से बढ़ कर एक फिल्मों के ऑफर आने लगे. उन्हीं फिल्मों में एक थी 1966 में आई लेख टंडन की फिल्म 'आम्रपाली'. इस फिल्म में वैजयन्ती माला ने टाइटिल रोल निभाया था और उनके नायक थे सुनील दत्त.

वो आखिरी मुलाकात
'आम्रपाली' वैजयन्ती माला के लिए एक चैलेंजिंग रोल था. वे एक नगरवधु का कैरेक्टर निभा रही थीं. उसके हिसाब से उन्हें फिल्म में कंचुकी और धोती पहननी थी. वैजयन्ती माला इन कपड़ों में सहज नहीं थीं. उस दिन वहां उनसे बिना बोले दिलीप कुमार अपने कुछ दोस्तों के साथ आ गए. वे अपने दोस्तों से वैजयन्ती माला को मिलवाने लाए थे.

वैजयन्ती माला उन कपड़ों में दिलीप कुमार और उनके दोस्तों से मिलने को बिलकुल तैयार नहीं थी. उन्होंने निर्देशक लेख टंडन से कह दिया कि वो इन कपड़ों में सबके सामने शॉट नहीं देंगी. सेट पर सिर्फ निर्देशक और कैमरामैन के अलावा और कोई नहीं होना चाहिए.

लेख टंडन ने यह बात दिलीप कुमार को बता दी. दिलीप साहब उस वक्त तो वहां से निकल गए, पर मन में गांठ बांध ली. तय कर लिया कि वे वैजयन्ती माला से कोई रिश्ता नहीं रखेंगे. उन दोनों की पहले से साइन की फिल्म 'संघर्ष' किसी तरह रो-रो कर पूरी हुई और दो साल बाद रिलीज हुई. इसके बाद दोनों कभी एक साथ नजर नहीं आए. एक रिश्ता बनने से पहले टूट गया.

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