बॉलीवुड को कई मशहूर गीत दे चुके किशोर कुमार को कभी थी अपनी आवाज से नफरत

 बर्थडे बॉय किशोर कुमार बचपन में ज्यादा किसी से नहीं बोलते थे. किशोर कुमार जब छोटे थे तो उन्हें अपनी आवाज से नफरत थी. 

बॉलीवुड को कई मशहूर गीत दे चुके किशोर कुमार को कभी थी अपनी आवाज से नफरत
किशोर कुमार (File Photo)

नई दिल्ली: बर्थडे बॉय किशोर कुमार (Kishore Kumar) बचपन में ज्यादा किसी से नहीं बोलते थे. हाथ में लकड़ी ले कर और पजामें के साथ लबादा सा कोट पहन कर खंडवा की गलियों में घूमा करते थे. दरअसल किशोर उर्फ आभास कुमार गांगुली घर में सबसे छोटे बेटे थे. बड़े भाई अशोक नामी हीरो थे. किशोर दा को हर बात से डर लगता. गाने से, एक्टिंग से, स्टेज पर जा कर बोलने से. बचपन की फटी हुई आवाज किशोर अवस्था में ठीक हो गई. कॉलेज में वो गाना तो गाते पर पर्दे के पीछे छिप कर.

केएल सहगल के भक्त
किशोर कुमार की बस एक ही तमन्ना थी कि मुंबई जा कर अपने सबसे प्रिय गायक सहगल से एक बार मिल लें. वे अपने भाई अशोक कुमार के पास मुंबई चले गए. किशोर कुमार इतने ज्यादा दुबले थे कि अगर भारी-भरकम कपड़े ना पहनें तो लगता था जैसे सींक चला आ रहा हो.

अशोक कुमार ने जब उन्हें सहगल साहब से मिलवाया तो किशोर कुमार रोने लगे. सहगल ने कहा, दो लाइन सुनाओ. किशोर कुछ नहीं बोल पाए, बस इतना कहा कि मेरी आवाज बहुत खराब है.

पंचम ने पहचाना किशोर को
किशोर कुमार जब भी राहुल देव बर्मन के पिता सचिन देव बर्मन के पास काम मांगने जाते, वो यही कहते, ‘तुम सहगल का कॉपी क्यों करता है? और ये जो डूडलिंग करता है वो कौन सुनेगा? अपना आवाज को ठीक करो.’

लेकिन सचिन देव बर्मन के बेटे राहुल देव बर्मन उर्फ पंचम ने किशोर कुमार की आवाज का जादू पहचान लिया. वे उनसे कहते ही नहीं कि वे रिकॉर्डिंग कर रहे हैं. क्योंकि जैसे ही माइक के सामने किशोर पहुंचते अपनी आवाज सहगल की तरह बदल कर गाने लगते. राहुल देव बर्मन उनको बिना बताए गाने रिकॉर्ड करने लगे. तब किशोर को समझ में आया कि उनकी आवाज बुरी नहीं, अच्छी है.

स्टेज पर गाने से बचते थे
किशोर कुमार शुरू में स्टेज शो करने से घबराते थे. स्टेज पर जाते ही उनका गला बैठ जाता, वे डर जाते. सत्तर के दशक की शुरुआत में राजेश खन्ना ने उनका ये डर दूर किया. उनके साथ स्टेज पर वे खुद जाते. जब किशोर महफिल जमा लेते तब जा कर राजेश खन्ना नीचे उतरते.

किशोर कुमार दो बातों को ले कर बहुत कट्टर थे. एक, वो किसी को अपना एक पैसा मारने नहीं देते थे, दूसरे वो किसी को अपने आराम में खलल डालने नहीं देते थे. उनका मानना था कि गाना उनकी रोजी-रोटी है जिंदगी नहीं.

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