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नवरात्र 2019: व्रत में क्यों खाया जाता है फलाहारी, जानें क्या है इसका महत्व

 नवरात्र के नियमों से ही जुड़े कुछ नियम अन्न से संबंधित भी होते हैं. इन महत्वपूर्ण नियमों में से एक है नौ दिनों तक अन्न के साथ ही प्याज-लहसुन, शराब और नॉन वेज से परहेज.

नवरात्र 2019: व्रत में क्यों खाया जाता है फलाहारी, जानें क्या है इसका महत्व

नई दिल्ली: पूरे देश में मां दुर्गा की आराधना का त्योहार नवरात्र शुरू होने वाले हैं. नौ दिन तक चलने वाले इस त्योहार के दौरान व्रत करने वाला सिर्फ फलाहार पर ही पूरे 9 दिन गुजार देता है, क्योंकि इस दौरान अन्न की मनाही होती है. दरअसल, देवी मां के व्रत करने वालों के लिए कई नियम होते हैं, जिनका उन्हें पालन करना होता है और ऐसा नहीं करने पर यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता. नवरात्र के नियमों से ही जुड़े कुछ नियम अन्न से संबंधित भी होते हैं. इन महत्वपूर्ण नियमों में से एक है नौ दिनों तक अन्न के साथ ही प्याज-लहसुन, शराब और नॉन वेज से परहेज. तो चलिए आज आपको बताते हैं, कि आखिर क्यों नवरात्रि में व्रती के अन्न खाने पर पाबंदी होती है और फलाहारी ही इनके लिए उपयुक्त माना जाता है.

नवरात्रि से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं 
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक व्रत करने से व्यक्ति के शरीर और मन शुद्ध हो जाते हैं. इसी वजह से इंसान भगवान की साधना शांति से कर पाता है. ऐसे करने से उसकी इच्छाशक्ति भी प्रबल होती है. वहीं मेडिकली व्रत रखने के पीछे का कारण है कि व्रत करने से बॉडी डिटॉक्स हो जाती है जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और बीमारियां दूर रहती हैं. इसलिए व्रत के दौरान अन्न खाने की मनाही होती है.

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नवरात्रि में सिर्फ फलाहारी क्यों? 
नवरात्रि के नौ दिन व्रत करने वाले लोग हों या फिर पहला और आखिरी व्रत करने वाले, सभी फलाहारी का सेवन ही करते हैं. व्रत रखने वाले लोग फल, जूस, दूध और मावा की बनी मिठाई खाते हैं. इस दौरान सेंधा नमक का सेवन भी किया जा सकता है. कुट्टू का आटा और साबूदाने की बनी चीजों को भी खाना लोग पसंद करते हैं. दरअसल, नवरात्रि के दौरान शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है. इसलिए हल्का भोजन सेहत के लिए अच्छा होता है. मान्यता है कि सात्विक भोजन से मन भी शांत रहता है. इसलिए व्रत के दौरान अन्न और तामसिक भोजन की जगह फलाहार को प्राथमिकता दी जाती है.