तलाक से है जल्दी मौत का खतरा! ऐसे पता चली ये राज की बात

वैज्ञानिकों का कहना है कि तलाक के बाद लोगों के धूम्रपान करने या शारीरिक गतिविधियों में पर्याप्त हिस्सा नहीं लेने की आशंका बढ़ जाती है और ये दोनों ही गतिविधियां समय पूर्व मौत की कारक होती हैं.

तलाक से है जल्दी मौत का खतरा! ऐसे पता चली ये राज की बात

वॉशिंगटन: वैज्ञानिकों का कहना है कि तलाक के बाद लोगों के धूम्रपान करने या शारीरिक गतिविधियों में पर्याप्त हिस्सा नहीं लेने की आशंका बढ़ जाती है और ये दोनों ही गतिविधियां समय पूर्व मौत की कारक होती हैं. शोधार्थियों ने तलाक को खराब स्वास्थ्य की कई वजहों से जोड़ा है जिसमें समय से पहले मौत का ज्यादा जोखिम भी शामिल है. हालांकि इनमें संबंध का कारण अभी बहुत अच्छी तरह समझ में नहीं आया है.  अमेरिका के एरीजोना विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में दो संभावित दोषियों को रेखांकित किया गया. तलाक के बाद धूम्रपान की ज्यादा आशंका और शारीरिक गतिविधियों का घटता स्तर.

विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के शोधार्थी और जर्नल एनल्स ऑफ बिहेवियोरल मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख लेखक कैली बौरासा ने कहा, ‘‘हम वैवाहिक स्थिति और असमय मृत्यदर के आपस में जुड़े होने के साक्ष्यों के अंतर को पाटना चाहते हैं. हम जानते हैं कि वैवाहिक स्थिति मनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों से जुड़ी है, और तलाक से स्वास्थ्य के जोखिमों का एक रास्ता धूम्रपान और व्यायाम जैसे स्वास्थ्य व्यवहारों से भी जुड़ा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम यह भी जानते हैं कि स्वास्थ्य व्यवहार अक्सर मनोवैज्ञानिक कारकों, जैसे जीवन संतुष्टि से जुड़े हैं.’’ 

महिलाएं तलाक के बाद भी पूर्व पति की ज्यादती के खिलाफ दर्ज करा सकती हैं शिकायत : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक संबंध टूटने के बाद भी कोई महिला अपने पूर्व पति की ज्यादती के खिलाफ घरेलू हिंसा कानून के तहत शिकायत दर्ज करा सकती है. गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने एक वैवाहिक संबंध विवाद में फैसला सुनाते हुए आदेश जारी किया था कि घरेलू संबंध का अभाव किसी भी तरह से एक अदालत को पीड़िता को राहत देने से नहीं रोकता है.

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई , न्यायामूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की सदस्यता वाली एक पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील खारिज करते हुए कहा कि यह आदेश में हस्तक्षेप करने को इच्छुक नहीं है. सुनवाई के दौरान महिला के पति ( जो अलग हो चुका है ) की ओर से पेश हुए वकील दुष्यंत पाराशर ने कहा कि घरेलू हिंसा कानून को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता. हालांकि , पीठ पाराशर की दलील से सहमत नहीं हुई और उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. 

(इनपुट - भाषा)