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एंटीबायोटिक्स: जानें, ये कैसे काम करते हैं और शरीर पर इसके प्रभाव

आजकल एंटीबायोटिक्स के उपयोग धड़ल्ले से हो रहे हैं। लेकिन यह हर बीमारी में कारगर साबित नहीं होता और बार-बार इस्तेमाल से इसके प्रभाव कम हो जाते हैं।

एंटीबायोटिक्स: जानें, ये कैसे काम करते हैं और शरीर पर इसके प्रभाव

नई दिल्ली: आजकल एंटीबायोटिक्स के उपयोग धड़ल्ले से हो रहे हैं। लेकिन यह हर बीमारी में कारगर साबित नहीं होता और बार-बार इस्तेमाल से इसके प्रभाव कम हो जाते हैं।
एंटीबायोटिक्स क्या है?
एंटीबायोटिक्स को एंटीबैक्टिरियल भी कहा जाता है। बैक्टेरियल इंफैक्शन्स से लड़ने के लिए यह बहुत ही शक्तिशाली दवा है। यह अगर उचित तरीके लिया जाय को आपके जीवन को बचा सकता है। लेकिन दूसरी दवा की तरह एंटीबायोटिक्स का भी साइड इफैक्ट होता है।
कैसे कार्य करते हैं एंटीबायोटिक्स
बैक्टीरिया के तेजी से बढ़ने और लक्षण दिखाने से पहले शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र सामान्य तौर पर इन्हें नष्ट कर सकता है। हमारे पास विशेष श्वेत रक्त कणिकाएं होती हैं, जो हानिकारक बैक्टीरिया पर आक्रमण करती हैं। कभी-कभी जब बैक्टीरिया का संक्रमण गंभीर होता है, तब एंटीबायोटिक्स की सहायता लेनी पड़ती है, जो बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं या उनके विकास को धीमा कर देते हैं। कई बार संक्रमण को रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स को सर्जरी के पहले भी दिया जाता है।

एंटीबायोटिक्स का उपयोग
- एंटीबायोटिक्स डॉक्टर की सलाह के बगैर न लें। हर बीमारी के लिए अलग प्रकार के एंटीबायोटिक्स होते हैं, जिसे डॉक्टर की सलाह से ही समझ सकते हैं।
- जितनी मात्रा में और जिस समय डॉक्टर बताएं, उसी अनुसार एंटीबायोटिक्स लें, क्योंकि बताई गई मात्रा और समय का ध्यान न रखना नुकसान पहुंचा सकता है।
- डॉक्टर जितने समय के लिए एंटीबायोटिक्स कोर्स करने की सलाह दें, उसे अवश्य पूरा करें, तबीयत ठीक लगने पर बीच में ही इनका सेवन बंद न कर दें।
- अगर आप उपचार तुरंत बंद कर देंगे तो कुछ बैक्टीरिया जीवित बच जाएंगे और आपको पुन: संक्रमित कर देंगे।
- हर इंसान के शरीर के मुताबिक अलग एंटीबायोटिक्स लाभ देते हैं, इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के लिए दिए गए एंटीबायोटिक्स का सेवन कतई न करें।
- इन्हें खाना खाने से एक घंटा पहले या दो घंटे बाद लेना चाहिए।

एंटीबायोटिक्स का न करें उपयोग
- गर्भवती महिलाएं।
- स्तनपान कराने वाली महिलाएं।
- जिनकी किडनी या लिवर ठीक प्रकार से काम न कर रहे हों।
- एंटीबायोटिक्स दूसरी दवाओं से भी रिएक्शन कर लेते हैं, इसलिए अगर आप एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं तो दूसरी दवाओं का इस्तेमाल न करें।

एंटीबायोटिक्स के दुष्प्रभाव
सर्वाधिक गंभीर संक्रमण के लिए जो क्लिंडामाइसिन एंटीबायोटिक दवा ली जाती है, आमतौर पर उसके दुष्प्रभाव अधिक दिखाई देते हैं। हालांकि पेनिसिलीन, सेफैलोस्पोरिन और इरिथ्रोमाइसिन के इस्तेमाल से भी ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- मुंह, पाचन मार्ग और योनि का फंगल इन्फेक्शन।
- किडनी स्टोन का निर्माण।
- असामान्य ब्लड क्लॉटिंग।
- सूरज की किरणों के प्रति संवेदनशील होना।
- कुछ की बड़ी आंत में सूजन आ जाती है, जिससे डायरिया हो सकता है।
- एंटीबायोटिक्स लेने के तुरंत बाद एलर्जिक रिएक्शन दिखाई देना।
- अधिक सेवन से मोटापा बढ़ना।
-एंटीबायोटिक दवाएं आंतों के लाभदायक बैक्टीरिया को मार देती हैं, जिससे रोग प्रतिरोधक तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- छोटी उम्र में ही एंटीबायोटिक्स का अधिक सेवन इम्यून सिस्टम को अग्नाशय पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे शरीर में इंसुलिन के निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे डायबिटीज की आशंका बढ़ जाती है।

 

 

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