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स्टडी का दावा, इस वजह से 2015 में भारत में 5 साल तक के बच्चों की हुई मौत

अमेरिका के ‘जॉन्स होपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ के अनुसंधानकर्ताओं ने पांच साल तक के बच्चों में मौत की वजह पर भारत के राज्यवार आंकड़ों का विश्लेषण किया है. 

स्टडी का दावा, इस वजह से 2015 में भारत में 5 साल तक के बच्चों की हुई मौत
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: भारत में 2015 में पांच साल तक के बच्चों की मौत की सबसे बड़ी वजह समय से पहले उनके जन्म से उत्पन्न विसंगतियां थीं. उसके बाद निमोनिया, प्रसव प्रक्रिया से जुड़ी चीजें एवं अतिसार अन्य कारण थे. लांसेट में प्रकाशित दो अध्ययनों में यह बात कही गयी है. उस साल पांच वर्ष की आयु तक के जितने बच्चों की मौत हुई, उनमें से 25.5 फीसद बच्चों की मौत समय से पूर्व जन्म होने से उत्पन्न जटिलताओं के चलते हुई जबकि 15.9 फीसद बच्चे निमोनिया की वजह से अपनी जान गंवा बैठे. निमोनिया वैसे तो काफी हद तक साध्य (उपचार से जान बचाये जाने लायक) रोग है लेकिन यह जानलेवा भी साबित होती है.

वर्ष 2015 में जान गंवाने वाले पांच साल तक की आयु के बच्चों में 11.1 फीसद प्रसव पीड़ा और उसके उपरांत की जटिलताओं एवं 8.9 फीसद अतिसार की भेंट चढ़ गये. इन अध्ययनों के अनुसार 2015 में किसी भी अन्य देश की तुलना में भारत में पांच साल तक की आयु के अधिक बच्चों की मौत हुई.

बाल मृत्युदर के संदर्भ में ज्यादा धनी और ज्यादा गरीब राज्यों के बीच विशाल विषमता नजर आई. एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2015 में पांच साल तक उम्र के जितने बच्चों की मौत हुई, उनमें से 57.9 फीसद मौतें जन्म के चार हफ्ते के अंदर हुईं. निर्धनतम और उच्च मृत्युदर वाले राज्यों में संक्रामक रोग बच्चों की बड़ी वजहों में शामिल थे.

‘लांसेट ग्लोबल हेल्थ’ में प्रकाशित इन अध्ययनों में 2000-2015 के दौरान पांच साल तक के बच्चों की मौत के कारणों का अनुमान लगाने के लिए भारत और अन्यत्र के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है. अमेरिका के ‘जॉन्स होपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ के अनुसंधानकर्ताओं ने पांच साल तक के बच्चों में मौत की वजह पर भारत के राज्यवार आंकड़ों का विश्लेषण किया है. समय पूर्व जन्म होने से उत्पन्न जटिलताओं के चलते उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 84,362 बच्चों, बिहार में 36,289 बच्चों, मध्यप्रदेश में 35,503 बच्चों और राजस्थान में 30,402 बच्चों की मौत हुई.