काम की खबरः कोरोना इंफेक्शन होने के कितने दिन बाद लेनी चाहिए वैक्सीन? जानिए

जब बड़ी संख्या में लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं और दूसरी तरफ टीकाकरण अभियान भी चल रहा है. ऐसे में इस सवाल का जवाब जानना बेहद जरूरी हो जाता है. 

काम की खबरः कोरोना इंफेक्शन होने के कितने दिन बाद लेनी चाहिए वैक्सीन? जानिए

नई दिल्लीः देश में कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान चल रहा है. लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने देश में बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमण हुआ है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी व्यक्ति को कोरोना का संक्रमण होकर ठीक हो चुका है तो उसे कितने दिन बाद कोरोना वैक्सीन लेनी चाहिए? जब बड़ी संख्या में लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं और दूसरी तरफ टीकाकरण अभियान भी चल रहा है. ऐसे में इस सवाल का जवाब जानना बेहद जरूरी हो जाता है. 

एक माह का रहे अंतर
डॉ. परमजीत सिंह का कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के ठीक होने और कोरोना वैक्सीन लेने में करीब एक माह का अंतर होना चाहिए. इसकी वजह बताते हुए वह कहते हैं कि कोरोना वायरस के खिलाफ हमारी बॉडी प्राकृतिक रूप से एंटीबॉडी बनाती है, जो वायरस के खिलाफ लड़ती हैं. लेकिन अगर संक्रमण है या हाल ही में ठीक हुआ है. ऐसे में हमारी बॉडी की इम्यूनिटी हाइपर एक्टिव हो सकती है, जिससे हमें ही नुकसान हो सकता है. यही वजह है कि डॉ. परमजीत कहते हैं कि संक्रमण ठीक होने के एक माह बाद वैक्सीन लेना सही है.

प्लाज्मा कैसे करता है कोरोना संक्रमण से बचाव
आजकल आपने सुना होगा कि कई मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी जा रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये प्लाज्मा थेरेपी क्या है और यह कैसे कोरोना संक्रमण से बचाती है? दरअसल जब किसी व्यक्ति में कोरोना का संक्रमण होता है तो उसकी बॉडी इस इंफेक्शन के खिलाफ एंटीबॉडी बनाती हैं, जो एक खास तरह की प्रोटीन होती है. ये एंटीबॉडी कोरोना इंफेक्शन से लड़ती है और कुछ समय बात वायरस को हरा देती है. 

इससे हमारे शरीर में ये एंटीबॉडी बन जाती है और आगे भी अगर हमें कोरोना का इंफेक्शन होगा तो ये एंटीबॉडी उससे हमारी रक्षा करती हैं. ये एंटीबॉडी हमारे ब्लड में मौजूद रहती हैं. यही वजह है कि जब कोई व्यक्ति कोरोना को हरा देता है तो इसका मतलब ये  है कि उसके ब्लड में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी मौजूद है. प्लाज्मा थेरेपी में ऐसे ही लोगों का ब्लड लेकर उससे प्लाज्मा निकाला जाता है, जिसमें एंटीबॉडी होती हैं. फिर इस प्लाज्मा को कोरोना संक्रमित मरीज को चढ़ाया जाता है. इससे कोरोना के खिलाफ बनी एंटीबॉडी मरीज के शरीर में पहुंच जाती हैं और शरीर को कोरोना के संक्रमण से बचाना शुरू कर देती हैं.  

(डिस्कलेमर- यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है. ऐसे में कोई भी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह पर ही कोई काम करें.) 

  

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