जानिए किस शख्स के लिए समर्पित है ये खास दिन, जिसने समाजसेवी से डॉक्टर और मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया, भारत रत्न भी मिला

National Doctor's Day 2021: यह दिन डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय को समर्पित है. वह ऐसे शख्स थे, कि जो भी आय अर्जित करते थे, सब कुछ दान कर देते थे.

जानिए किस शख्स के लिए समर्पित है ये खास दिन, जिसने समाजसेवी से डॉक्टर और मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया, भारत रत्न भी मिला
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नई दिल्ली: हर साल 1 जुलाई को देशभर में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है. इस दिन देश के महान चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय (Dr. Bidhan Chandra Roy) का जन्मदिन और पुण्यतिथि होती है. इस दिन डॉक्टरों के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है. इस खबर में हम जानेंगे कि भारत में डॉक्टर्स डे की शुरुआत कब हुई और डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय कौन थे?

कब हुई नेशनल डॉक्टर डे की शुरुआत
भारत में नेशनल डॉक्टर डे की शुरुआत 1991 में तत्कालिक सरकार द्वारा की गई थी. तब से हर साल 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है. यह दिन भारत के महान चिकित्सक बिधान चंद्र रॉय को सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मनाया जाता है. 

कौन थे डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय 

  1. डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना जिले में हुआ था. 
  2. उन्होंने कोलकाता में अपनी मेडिकल की शिक्षा पूरी की. 
  3. फिर उन्होंने एमआरसीपी और एफआरसीएस की उपाधि लंदन से प्राप्त की. 
  4. इसके बाद साल 1911 में भारत में उन्होंने अपने चिकित्सकीय जीवन की शुरुआत की. 
  5. इसके बाद वो कोलकाता मेडिकल कॉलेज में व्याख्याता भी बने
  6. डॉ. बिधान चंद्र रॉय को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था
  7. 80 वर्ष की आयु में 1962 में अपने जन्मदिन के दिन यानी 1 जुलाई को ही उनकी मृत्यु हो गई थी.

समाजसेवी से लेकर सियासी सफर

  • बिधान चंद्र रॉय डॉक्टर के साथ-साथ समाजसेवी, आंदोलनकारी और राजनेता भी थे. 
  • असहयोग आंदोलन में भी बिधान चंद्र रॉय ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. 
  • शुरुआत में उन्हें लोग महात्मा गांधी और ज्वाहर लाल नेहरू के डॉक्टर के रूप में जानते थे. 
  • महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा था.
  • राजनीति में कदम रखते हुए उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य का पद चुना
  • बाद में उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला
  • उनके दूरदर्शी नेतृत्व के लिए उन्हें पं. बंगाल राज्य का आर्किटेक्ट भी कहा जाता था

कोरोना काल में दिए योगदान को दुनिया कर रही सलाम
डॉक्टर्स को हमेशा से भगवान का दर्जा दिया जाता रहा है. ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि वो हमेशा अपने वक्त और जान की परवाह किए बगैर अपने मरीजों की जान बचाने की जी-तोड़ कोशिश करते हैं. कोरोना काल में डॉक्टर्स ने जिस मुस्तैदी के साथ कोरोना वारियर्स की भूमिका निभायी है वो वास्तविकता में याद रखने योग्य है. कोरोना काल में डॉक्टरों द्वारा दिए गए योगदान को दुनिया सलाम कर रही है. 

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