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दवा प्रतिरोधक क्षमता रखने वाले तपेदिक को लैब में रोकने में मिली सफलता

इस बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी बाधा दवा प्रतिरोधक तपेदिक का विकसित होना है. 2017 में करीब 15 लाख लोगों की टीबी के कारण मौत हुई थी जो इसे विश्व की सबसे घातक संक्रामक बीमारी बनाता है. 

दवा प्रतिरोधक क्षमता रखने वाले तपेदिक को लैब में रोकने में मिली सफलता
फाइल फोटो

वॉशिंगटन: वैज्ञानिकों ने तपेदिक के इलाज में इस्तेमाल होने वाले एंटीबायोटिक के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने से रोकने और यहां तक कि उसे पलट देने वाले एक यौगिक पदार्थ की खोज की है. तपेदिक (टीबी) विश्व भर के सबसे घातक संक्रामक रोगों में से एक है. 

इस बीमारी के इलाज में सबसे बड़ी बाधा दवा प्रतिरोधक तपेदिक का विकसित होना है. 2017 में करीब 15 लाख लोगों की टीबी के कारण मौत हुई थी जो इसे विश्व की सबसे घातक संक्रामक बीमारी बनाता है. 

अमेरिका के वॉशिंगटन विश्वविद्यालय एवं स्वीडन के उमेआ विश्वविद्यालय ने आइसोनियाजिड के प्रति प्रतिरोध को पलट दिया. आइसोनियाजिड टीबी के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला एंटीबायोटिक है.

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यह शोध लैब में विकसित हो रहे जीवाणु पर किया गया जो भविष्य में लोगों एवं जानवरों पर अध्ययन करने की राह प्रशस्त करता है. आइसोनियाजिड के साथ इस पदार्थ का इस्तेमाल करने से ऐसे लोगों में एंटीबायोटिक का प्रभाव बरकरार रह सकता है जिन्हें दवा प्रतिरोधक तपेदिक हो. यह अध्ययन प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ सा‍इंसेज पत्रिका में प्रकाशित हुआ है.