स्मार्टफोन यूजर वक्त रहते संभल जाइए! दांव पर लगी है आपकी लाइफ

रिसर्च में सामने आया है कि पांच में से चार लोगों का कहना है कि फोन ही आखरी चीज है जब वह बिस्तर पर जाने से पहले देखते हैं. साथ ही उठने के बाद सबसे पहले फोन को ही देखते हैं. साथ ही 74 फीसदी लोगों का कहना है कि उठने के 30 मिनट के अंदर में सबसे पहले फोन को ही देखते हैं.

स्मार्टफोन यूजर वक्त रहते संभल जाइए! दांव पर लगी है आपकी लाइफ
स्मार्टफोन हमारी सेहत के लिए घातक होता जा रहा है. तस्वीर साभार- BGR

नोएडा: मोबाइल (Mobile) की लत की वजह से आम जनजीवन सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है. यदि हम इसी तरह स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते रहे तो कई मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य और अन्य बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। हर भारतीय साल के 1800 घंटे मोबाइल (Mobile) को दे रहा है, ये खुलासा साइबर मीडिया रिसर्च के सर्वे से हुआ है. साइबर मीडिया रिसर्च (सीएमआर) के रिसर्च में तकरीबन आधे से ज्यादा लोगों ने स्वीकार किया है कि मोबाइल (Mobile) फ़ोन की लत इतना बुरा पड़ गया है वह इसके बिना रह नहीं सकते हैं.

रिसर्च में सामने आया है कि पांच में से चार लोगों का कहना है कि फोन ही आखरी चीज है जब वह बिस्तर पर जाने से पहले देखते हैं. साथ ही उठने के बाद सबसे पहले फोन को ही देखते हैं. साथ ही 74 फीसदी लोगों का कहना है कि उठने के 30 मिनट के अंदर में सबसे पहले फोन को ही देखते हैं.

73 फीसदी लोगों का मानना है कि स्मार्टफोन जिस तरीके से बढ़ा है उससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है. चार में से एक आदमी ने स्मार्ट फोन के इस्तेमाल से शारीरिक परेशानियों का बात की है. सबसे ज्यादा लोगों को कमजोर आइसाइट, आंखों में पानी आना, सर दर्द और अनिद्रा जैसी बीमारियों की परेशानी होती है.

हालांकि लोगों ने इस बात को माना है कि कुछ समय फोन स्विच ऑफ रखने से उनकी हेल्थ को फायदा होगा. सर्वे में 3 में से एक व्यक्ति ने माना है कि वह बिना फोन चेक किए अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों से लगातार 5 मिनट भी बातचीत नहीं कर पाते हैं. पांच में से तीन लोगों ने यह भी स्वीकार किया है कि मोबाइल (Mobile) फोन से अलग लाइव का होना बेहद जरूरी है. खुशहाल जिंदगी जीने के लिए मोबाइल (Mobile) का कम इस्तेमाल जरूरी है.

यह सर्वे देश के 8 प्रमुख शहरों में लोगों के साथ बातचीत करके ली गई है. साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी प्रतिक्रिया ली गई है. इस सर्वे में 64 फीसदी पुरुष और 36 फीसदी महिलाओं से बातचीत की गई है.

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