World Hepatits Day Special: भारत में वैक्सीन मौजूद होने के बाद भी क्यों ज्यादा होती हैं हेपेटाइटिस से मौतें? जानें ऐसी ही कई जरूरी बातें
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World Hepatits Day Special: भारत में वैक्सीन मौजूद होने के बाद भी क्यों ज्यादा होती हैं हेपेटाइटिस से मौतें? जानें ऐसी ही कई जरूरी बातें

भारत में हेपेटाइटिस बी से करीब 2 प्रतिशत और हेपेटाइटिस सी से करीब 1 प्रतिशत जनता संक्रमित है. जानें हेपेटाइटिस इंफेक्शन से जुड़ी कई अहम बातें...

World Hepatits Day Special: भारत में वैक्सीन मौजूद होने के बाद भी क्यों ज्यादा होती हैं हेपेटाइटिस से मौतें? जानें ऐसी ही कई जरूरी बातें

History and Significance of World Hepatitis Day 2021: डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनियाभर में हेपेटाइटिस से जुड़ी समस्याओं के कारण हर 1 मिनट में दो लोगों की मौत हो रही है. हेपेटाइटिस बीमारी के गंभीर खतरे को खत्म करने के लिए जागरुकता फैलाना बहुत जरूरी है. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में हेपेटाइटिस बी से करीब 2 प्रतिशत और हेपेटाइटिस सी से करीब 1 प्रतिशत जनता संक्रमित है. इसी संक्रमण को रोकने के मकसद से दुनियाभर में हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatits Day 2021 Importance) मनाया जाता है. वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे की इस साल की थीम (World Hepatitis Day 2021 Theme) 'हेपेटाइटिस कांट वेट (Hepatitis Can't Wait)' रखी गई है.

वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे को 28 जुलाई के दिन मनाने के पीछे भी दो दिलचस्प कारण (Why World Hepatits Day is celebrated on 28 July?) हैं. इन कारणों और हेपेटाइटिस से जुड़े पहलुओं के बारे में जानने के लिए हमने शारदा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक दीपक से बात की. आइए जानते हैं कि हेपेटाइटिस के इलाज, बचाव और उससे जुड़ी अहम बातें क्या हैं?

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सवाल- WHO ने इस बार की थीम 'हेपेटाइटिस कांट वेट' रखी है. आप इस थीम को कैसे देखते हैं?
जवाब-
जब लिवर में सूजन (Inflammation in Liver) आ जाती है, तो उसे हेपेटाइटिस कहा जाता है. यह दो तरह की होती है, पहली एक्यूट हेपेटाइटिस (Acute Hepatitis) और दूसरी क्रॉनिक हेपेटाइटिस (Chronic Hepatits). एक्यूट हेपेटाइटिस आमतौर पर जल्द ही ठीक हो जाती है और बहुत कम मामले में लिवर डैमेज होने का खतरा (Risk of Liver Damage) होता है. लेकिन क्रॉनिक हेपेटाइटिस लंबे समय तक चलती हैं और धीरे-धीरे लिवर फेलियर का कारण (Causes of Liver Failure) और मौत की वजह बन जाती है. तो इन बातों को ध्यान में रखकर देखा जाए, तो एक्यूट और क्रॉनिक दोनों तरह की हेपेटाइटिस जानलेवा हो सकती हैं. जिस कारण हेपेटाइटिस से बचाव, हेपेटाइटिस की जांच, हेपेटाइटिस टेस्ट आदि चीजें इंतजार नहीं कर सकती हैं. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे 2021 की थीम (World Hepatitis Day 2021 Theme) का चुनाव किया गया है.

सवाल- भारत में किस तरह की हेपेटाइटिस का खतरा ज्यादा है और 28 जुलाई को वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे मनाने का क्या कारण है?
जवाब-
भारत में एक्यूट हेपेटाइटिस के सबसे ज्यादा मामले हेपेटाइटिस ए (HAV) और ई (HEV) वायरस के कारण देखने को मिलते हैं. वहीं, क्रॉनिक हेपेटाइटिस के मामलों में हेपेटाइटिस बी वायरस (HBV) ज्यादा देखने को मिलता है.

वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे को इस समय मनाने के कारण की बात करें, तो जुलाई-अगस्त का समय बारिश का मौसम होता है और बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया की तरह एक्यूट हेपेटाइटिस इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है. जिसके कारण बारिश के मौसम में एक्यूट हेपेटाइटिस के सबसे ज्यादा मामले (Risk of Acute Hepatitis in Rainy Season) देखने को मिलते हैं. इसलिए इसी समय हेपेटाइटिस के बारे में जागरुकता फैलाने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. वहीं, 28 जुलाई के दिन का चुनाव करने के पीछे की वजह यह है कि इस दिन हेपेटाइटिस बी वायरस के अस्तित्व, जांच के तरीके और वैक्सीन का आविष्कार करने वाले नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक Dr. Baruch Blumberg का जन्मदिन (Dr. Baruch Blumberg Birthday) होता है.

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सवाल- कोरोना के कारण हेपेटाइटिस इंफेक्शन के खतरे पर क्या असर पड़ा है? (Covid-19 and Hepatitis Infection)
जवाब-
कोविड-19 का वायरस खुद हेपेटाइटिस इंफेक्शन का कारण बन सकता है. हेपेटाइटिस के कारण ही कई कोरोना संक्रमितों के इलाज में बाधा रुकावटें आई और रेमडेसिवीर जैसी दवाइयों का इस्तेमाल नहीं किया जा सका. कई भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय शोध में इस बात की पुष्टि की गई है. हेपेटाइटिस के सबसे बड़े कारण हेपेटाइटिस ए, बी, सी, ई वायरस हैं, लेकिन इनके अलावा कोरोना व डेंगू जैसे वायरस भी हेपेटाइटिस का कारण बन सकते हैं. इसलिए कोरोना पेशेंट्स को अपने लिवर की जांच जरूर करवानी चाहिए.

सवाल- क्या गर्भवती महिला से शिशु को जन्मजात हेपेटाइटिस इंफेक्शन हो सकता है? इसके बचाव के लिए क्या किया जा सकता है?
जवाब-
गर्भवती महिलाओं से शिशु को एक्यूट हेपेटाइटिस होने का खतरा काफी कम होता है. क्योंकि, इन वायरस को शरीर अपने आप बाहर निकाल देता है. लेकिन हेपेटाइटिस बी, सी वायरस के कारण होने वाले क्रॉनिक हेपेटाइटिस इंफेक्शन (Chronic Hepatitis Infection) में मेटरनल टू फीटल ट्रांसमिशन (Maternal to Fetal Transmission) यानी गर्भवती महिला से शिशु को इंफेक्शन हो सकता है. इसमें भी हेपेटाइटिस बी वायरस का ट्रांसमिशन रेट काफी ज्यादा है और हेपेटाइटिस सी वायरस का ट्रांसमिशन रेट 5 प्रतिशत से भी कम है. इसलिए आज के समय में अधिकतर गर्भवती महिलाओं को शुरुआती दौर में ही हेपेटाइटिस की जांच करवाने की सलाह दी जाती है.

जिन गर्भवती महिलाओं में हेपेटाइटिस बी वायरस का लोड ज्यादा होता है, उन्हें एंटीवायरल दवाएं देकर वायरस का लोड कम किया जाता है. वहीं, शिशु को जन्म के 24 से 48 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी का एक्टिव व पैसिव इम्युनाइजेशन (Active and Passive Immunization of Hepatitis) दिया जाता है. जिसमें वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिनन (IG) यानी एंटीबॉडीज चढ़ाई जाती है. जिससे हेपेटाइटिस बी का वायरस लोड खत्म हो जाता है और इसका खतरा 99.9 प्रतिशत तक कम हो जाता है. वहीं, अगर किसी शिशु को हेपेटाइटिस बी इंफेक्शन हो जाता है, तो इससे उनकी अधिकतम आयु पर बुरा असर पड़ सकता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को हेपेटाइटिस की जांच (Hepatitis test) करवाना बहुत जरूरी है.

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सवाल- हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए टीका कई सालों से लगाया जा रहा है. उसके बाद भी भारत में इसके कारण होने वाली मौतें ज्यादा क्यों देखने को मिलती हैं? 
जवाब-
यहां सबसे जरूरी जानकारी यह है कि हेपेटाइटिस के सभी वायरस के लिए वैक्सीन (Hepatitis Vaccine) उपलब्ध नहीं है. सिर्फ हेपेटाइटिस बी और ए से बचाव प्रदान करने वाली वैक्सीन ही भारत में उपलब्ध है, वहीं हेपेटाइटिस ई की वैक्सीन अभी ट्रायल में है और भारत में उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा, हेपेटाइटिस सी वायरस (HCV) की हमारे पास अभी तक कोई वैक्सीन नहीं है, हालांकि HBV के मुकाबले HCV का बेहतर इलाज हमारे पास मौजूद है.

इसके बाद हम देखें तो हेपेटाइटिस बी वायरस की वैक्सीन कुछ सालों पहले ही भारत के नेशनल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम (National Immunization Program) में शामिल हुई है. वैक्सीन के प्रोग्राम में शामिल होने के बाद जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के समय हेपेटाइटिस वैक्सीन लगाई जा रही है. लेकिन उससे पहले जन्मे लोगों को यह वैक्सीन फिलहाल नहीं दी जा रही है. जिसका मतलब है कि उन्हें एक्यूट व क्रॉनिक हेपेटाइटिस का खतरा जस का तस है. वहीं, हेपेटाइटिस बी और ए वायरस की वैक्सीन थेराप्यूटिक नहीं है, बल्कि प्रिवेंटिव है. यानी यह इलाज में इस्तेमाल नहीं की जाती, बल्कि सिर्फ सुरक्षा प्रदान करती है. इसलिए भारत में वैक्सीन आने से पहले के हेपेटाइटिस इंफेक्शन लोड के कारण मौतें देखने को मिल रही हैं.

इसके अलावा हेपेटाइटिस के कारण हो रही मौतों के पीछे भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में असुरक्षित इंजेक्शन का इस्तेमाल है. जो कि हेपेटाइटिस बी और सी के फैलने का सबसे बड़ा कारण दिखता है. मेरे पास आने वाले हेपेटाइटिस बी और सी के अधिकतर मामलों में  संक्रमित सुई (Unsterile Injection) के इस्तेमाल की हिस्ट्री मिलती है. इसलिए आप कहीं भी इंजेक्शन लगाने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि सुई नयी है और ग्रामीण क्षेत्रों में इस बारे में जागरुकता फैलानी जरूरी है. ध्यान रखें कि क्रॉनिक हेपेटाइटिस इंफेक्शन एक साइलेंट किलर है. जिसके कारण शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता. लक्षण दिखने बिल्कुल अंतिम चरण में शुरू होते हैं, जब लिवर बिल्कुल डैमेज हो जाता है. इसलिए हेपेटाइटिस से जुड़ी समस्याओं के कारण हो रही मौतों को कम करने के लिए लोगों को रुटीन स्क्रीनिंग (टेस्ट) पर बहुत ध्यान देना चाहिए.

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सवाल- ऐसा कुछ जो आप हेपेटाइटिस के बचाव, इलाज या इसके किसी भी पहलू के बारे में जोड़ना चाहते हों?
जवाब-
हेपेटाइटिस इंफेक्शन होने का सबसे बड़ा कारण हेपेटाइटिस ए, बी, सी, ई वायरस होते हैं. इसके अलावा शराब का सेवन हेपेटाइटिस की बीमारी विकसित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. वहीं, कुछ दवाइयों और ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण भी हेपेटाइटिस हो सकता है. इसलिए इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए आप बारिश के मौसम में साफ-सफाई का ध्यान रखें और बाहर का खाना खासतौर से खुला हुआ या कटा हुआ नहीं खाएं. अगर हो सके तो हेपेटाइटिस स्क्रीनिंग करवाएं. वहीं, हेपेटाइटिस समेत किसी भी संक्रमण से दूर रहने के लिए जीवनशैली स्वस्थ रखें. शराब का सेवन ना करें और हेल्दी वजन मेंटेन करें.

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी गई है.

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