Zee जानकारी : दिल से जुड़ी बीमारियों और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम करता है साइक्लिंग

 साइक्लिंग से जुड़े फायदों के बारे में आपने कई बार सुना होगा। अक्सर लोग कहते हैं कि सुबह या शाम के वक्त कुछ मिनट साइकल चलाने से आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। लेकिन अब एक नए रिसर्च से पता लगा है कि रोज़ सिर्फ 20 मिनट साइकल चलाने से दिल की बीमारियों का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। कोपेनहेगन को दुनिया का सबसे ज्यादा साइकल फ्रेंडली शहर माना जाता है और वहां साइक्लिंग के फायदे जानने के लिए एक रिसर्च किया गया। इस रिसर्च के दौरान साइक्लिंग करने वाले लोगों की 14 वर्षों तक मॉनिटरिंग की गई। रिसर्च खत्म होने के बाद पता लगा कि रोज़ाना साइकल चलाने वाले लोगों में हार्ट अटैक से मौत का खतरा बहुत कम हो गया था।

Zee जानकारी : दिल से जुड़ी बीमारियों और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम करता है साइक्लिंग

नई दिल्ली : साइक्लिंग से जुड़े फायदों के बारे में आपने कई बार सुना होगा। अक्सर लोग कहते हैं कि सुबह या शाम के वक्त कुछ मिनट साइकल चलाने से आप कई बीमारियों से बच सकते हैं। लेकिन अब एक नए रिसर्च से पता लगा है कि रोज़ सिर्फ 20 मिनट साइकल चलाने से दिल की बीमारियों का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है। कोपेनहेगन को दुनिया का सबसे ज्यादा साइकल फ्रेंडली शहर माना जाता है और वहां साइक्लिंग के फायदे जानने के लिए एक रिसर्च किया गया। इस रिसर्च के दौरान साइक्लिंग करने वाले लोगों की 14 वर्षों तक मॉनिटरिंग की गई। रिसर्च खत्म होने के बाद पता लगा कि रोज़ाना साइकल चलाने वाले लोगों में हार्ट अटैक से मौत का खतरा बहुत कम हो गया था।

-आपको बता दें कि दुनिया में होने वाली 30 प्रतिशत मौतों के लिए दिल से जुड़ी बीमारियां ज़िम्मेदार हैं।
-WHO का सुझाव है कि 18 वर्ष से 64 वर्ष तक के हर व्यक्ति को दिन भर में 150 मिनट तक शारीरिक गतिविधियों में शामिल रहना चाहिए और वर्क आउट करना चाहिए।
-लेकिन साइकल का फायदा ये है कि सिर्फ 20 मिनट की साइक्लिंग से ही आपको 150 मिनट तक किए जाने वाले शारीरिक व्यायाम का फायदा मिल जाता है।
-साइक्लिंग से ने सिर्फ दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। बल्कि इससे कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है और वज़न भी नियंत्रण में रहता है।
-साइक्लिंग करने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भी बहुत हद तक कम हो जाता है।

साइक्लिंग के इतने सारे फायदे जानने के बाद आपके मन में आ रहा होगा कि आप भी कल से साइक्लिंग करें। लेकिन इसी विचार के साथ आपके मन में एक डर भी पैदा हुआ होगा और वो डर है प्रदूषण का और दुर्घटनाओं का। ये डर और परेशानी बिल्कुल वास्तविक है। क्योंकि भारत में सुबह और शाम के वक़्त साइक्लिंग का मतलब है कि भारी प्रदूषण का सामना करना और तेज़ रफ्तार ट्रैफिक से बचकर निकलना।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने सभी देशों से अपील की है कि है कि अपने ट्रांस्पोर्ट बजट का 20 प्रतिशत साइकल ट्रैक्स और पैदल चलने के रास्तों के लिए सुरक्षित रखें। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक दुनिया में जितना कॉर्बन इमीशन होता है। उसमें वाहनों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है। इसलिए यूनाइटेड नेशंस ने ज़ोर देते हुए कहा है कि सभी देश नॉन मोटराइज्ड ट्रांस्पोर्ट पर ध्यान दें। और नॉन मोटराइज्ड ट्रांस्पोर्ट का सबसे बड़ा उदाहरण साइक्लिंग है।

लेकिन अफसोस इस बात का है कि एशिया में सिर्फ 17 प्रतिशत देश ही ऐसे हैं। जो नॉन मोटराइज्ड ट्रांस्पोर्ट पर प्रभावी तौर पर काम कर रहे हैं।

भारत में तो स्थिति और भी खराब है, क्योंकि भारत में साइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए कोई मजबूत योजना नहीं है। भारत में आज भी लोग कार को को ही शान की सवारी मानते हैं। और साइकल से ऑफिस जाना या सामान लाना लोगों को अपनी शान के खिलाफ लगता है। भारत में साइक्लिंग के फायदों को लेकर कोई गंभीर रिसर्च भी नहीं किया गया है।

हमारी टीम ने भारत में साइकल चलाने की आदत और साइक्लिंग के लिए ज़रूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर गहन रिसर्च किया। इस दौरान हमारे हाथ निराशा ही लगी, क्योंकि भारत में साइक्लिंग को एक अच्छी आदत नहीं बल्कि मजबूरी के तौर पर ही देखा जाता है। WHO की 2010 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल 6 हज़ार 600 साइक्लिंग सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं।

ये रिपोर्ट पुरानी है और हमें लगता है कि पिछले 5 वर्षों में जिस रफ्तार से वाहनों की संख्या बढ़ी है। ये आंकड़ा भी बढ़ गया होगा।

भारत में अगर वाहनों की भी कोई जाति और वर्ण व्यवस्था होती, तो साइकल को बहुत निचला स्थान मिलता। भारत में पैदल चलना और साइकल चलाना दोनों निम्न दर्जे की बात माना जाता है। आप कह सकते हैं कि वाहनों की वर्ण व्यवस्था में साइकल चलाना। पैदल चलने से बस थोड़ा सा ही बेहतर है। 

लेकिन हमें लगता है कि रोज़ाना 20 मिनट साइकल चलाकर, आप अपनी सेहत को नयी रफ्तार दे सकते हैं। और ज्यादा सेहतमंद जीवन जी सकते हैं।

साइक्लिंग के हैं अन्य फायदे 

साइकल के फायदे सिर्फ आपके दिल की सेहत तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि साइकल पर्यावरण की सेहत सुधारने में भी मदद करती है। भारत में साइक्लिंग के फायदों को लेकर कोई गंभीर रिसर्च या अध्ययन नहीं की गई है, इसलिए हम ब्रिटेन में की गई एक स्टडी के द्वारा आपको बताएंगे कि साइकल कैसे देशहित और आपके हितों का ख्याल रखती है।

ब्रिटेन में की गई इस स्टडी के मुताबिक अगर ब्रिटेन में डेनमार्क की तर्ज पर साइक्लिंग को बढ़ावा दिया जाए तो ब्रिटेन अगले 20 वर्षों में 17 बिलियिन पाउंड यानी करीब 1 लाख 41 हज़ार करोड़ रुपये बचा सकता है।

इसी तरह साइकल वाहनों के मुकाबले सिर्फ एक तिहाई जगह घेरती है और साइक्लिंग को बढ़ावा देकर ट्रैफिक जाम की समस्या भी सुलझाई जा सकती है।

साइक्लिंग को बढ़ावा देकर सड़क दुर्घटनाओं में 30 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है।

साइकल की पार्किंग कार की पार्किंग के मुकाबले 8 गिना कम जगह घेरती है। इससे ज़मीन का एक बहुत बड़ा हिस्सा पार्किंग के बजाए दूसरे कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्रिटेन में हुई स्टडी में दावा किया गया है कि अगर सिर्फ 10 प्रतिशत लोग भी कार छोड़कर साइकल चलाने लगें तो वायु प्रदूषण में भारी कमी आ जाएगी।

इसके अलावा साइक्लिंग से रिटेल व्यापारियों को भी काफी फायदा होगा, क्योंकि साइकल चलाने वाले लोग रास्ते की दुकानों पर आसानी से रुककर खरीददारी कर सकते हैं। जबकि कार चालक को ऐसा करने के लिए पार्किंग ढूंढनी पड़ती है और कई बार पार्किंग नहीं मिलने से कार चालक आगे बढ़ जाते हैं।

आपको ये जानकर अफसोस होगा कि साइकल फ्रेंडली माने जाने वाले दुनिया के टॉप 20 शहरों में भारत तो क्या एशिया का एक भी शहर नहीं है।

साइकल फ्रेंडली शहरों की लिस्ट तैयार करने वाले कोपेनहेगेन इंडेक्स के मुताबिक पहले नंबर पर कोपेनहेगन है। जबकि दूसरे नंबर पर नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटर्डम है।

1954 में भारत के 57 प्रतिशत लोग यातायात के लिए साइकल का इस्तेमाल करते थे। जबकि 2014 तक ये संख्या घटकर सिर्फ 6 से 8 प्रतिशत के बीच रह गई।

आप कह सकते हैं कि भारत को अगर एक सेहतमंद देश बनना है तो भारत के लोगों को कार से उतरकर साइकल चलानी होगी। क्योंकि वर्ल्ड हेल्थ इंडेक्स में भी भारत की हालत बहुत खराब है। इस इंडेक्स में शामिल 188 देशों में भारत 143 नंबर पर है। आपको जानकर अफसोस होगा कि इस मामले में भारत की रैंकिग युद्ध से परेशान इराक और सीरिया से भी खराब है।

ऐसे में साइक्लिंग, व्यायाम, सुबह की सैर और अच्छे खानपान की आदत ही भारत का भविष्य बचा सकती है। क्योंकि एक बीमार देश कभी भी दुनिया की सुपर पावर नहीं बन सकता।