कोरोना के इलाज के लिए सरकार ने आयुर्वेद मेडिसिन को दी मंजूरी

स्वास्थ्य मंत्रालय में तमाम तरह के प्रयोग और एक्सपर्ट की राय के बाद आयुर्वेद पद्धति से कोरोना के इलाज को मंजूरी दे दी है. 

कोरोना के इलाज के लिए सरकार ने आयुर्वेद मेडिसिन को दी मंजूरी
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्लीः भारत में आयुर्वेदिक परंपरा से बीमारियों को सदियों से दूर किया जाता रहा है अब कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए भी आयुर्वेदिक पद्धति कारगर साबित हो रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय में तमाम तरह के प्रयोग और एक्सपर्ट की राय के बाद आयुर्वेद पद्धति से कोरोना के इलाज को मंजूरी दे दी है.  आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा के मुताबिक मंत्रालय ने इसको लेकर एक टास्क फोर्स बनाई थी. जबसे कोरोना महामारी आई तभी से आयुष मंत्रालय ने इसको लेकर कुछ गाइडलाइन जारी की थी. 

4 ड्रग पर काम शुरू
इसके साथ ही 7 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष सेक्टर के लोगों के साथ एक बैठक की थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा कि आप लोग ऐसा कुछ करिए जिसमें हम कोविड मैनेजमेंट को लेकर काम कर सकें. उसके बाद बहुत सारी रिसर्च स्टडीज की गई एक टास्क फोर्स बनाई गई जिसने इस पर काम किया. टास्क फोर्स ने हमें रिसर्च के प्रोटोकॉल बना कर दिए.  स्वास्थ्य मंत्रालय आयुष मंत्रालय और विज्ञान मंत्रालय ने मिलकर सीएसआईआर के साथ मिलकर 4 ड्रग  पर काम शुरू किया.

110 लोकेशन पर स्टडीज
राजेश कोटेचा ने कहा, हमने देशभर में 110 लोकेशन पर 66 स्टडीज किए, उसके साथ साथ हमने आयुष संजीवनी एक एप्लीकेशन लॉन्च किए. इसके जरिए  एक करोड़ 47 लाख लोगों ने रिस्पॉन्ड किया. आयुष का जो प्रोटोकॉल जारी किया गया है. यह वैज्ञानिक आधार पर एविडेंस के साथ और सारी स्टडीज के बाद जारी किया गया है. इसमें ना सिर्फ औषधियां बताई गई हैं बल्कि सिंपल सी चीजें बताई गई हैं कि कोरोना से बचाव के लिए आप क्या क्या करें और किस स्थिति में कौन सी आयुर्वेदिक दवा लें. हमने यह देखा है, हम यह दावा नहीं कर रहे हैं कि कोरोना के मरीज को यह सीधे तौर पर वह ठीक कर देगा लेकिन हमने प्रयोग में यह देखा है. लोग यह दवा ले रहे हैं तो उनको इंफेक्शन नहीं होगा यदि किसी को एसिंप्टोमेटिक है तो सिंप्टोमेटिक में नहीं जाएगा और सिंप्टोमेटिक है तो और आगे की स्टेज में नहीं जाएगा. यही इस दवा का फायदा है और इस मेडिसन के प्रयोग से आप गंभीर स्थिति में नहीं जाएंगे. आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा ने ज़ी न्यूज़ को बताया  कि कोरोना के मरीजों का ट्रीटमेंट देशभर में अलग अलग राज्य सरकारों के साथ मिलकर किया है.

5 लाख लोगों को दी गई मेडिसिन
राजेश कोटेचा ने कहा कि लगभग 5 लाख कोरोना के मरीजों को यह आयुर्वेदिक मेडिसिन दी गई. उदाहरण के तौर पर मैं दिल्ली के सरिता विहार के आयुर्वेदिक केंद्र जोकि कोविड केयर सेंटर है उसकी जानकारी दे रहा हूं कि आपको ताज्जुब होगा कि वहां एक भी मरीज रैफर नहीं करना पड़ा, जो ढाई सौ मरीज वहां पर आए थे. वह सभी के सभी पूरी तरह से ठीक हो कर गए और जो  हेल्थ वर्कर थे उनमें से भी किसी को कोई इंफेक्शन नहीं हुआ. इसमें हमने इंटीग्रेटेड मॉडल अपनाया उसमें अधिकतर को आयुर्वेदिक दवा ही दी गई. हम उसमें योग भी कराते हैं और आयुर्वेदिक मेडिसिन भी देते हैं.

अश्वगंधा, गिलोय और चवनप्राश का करें सेवन
अश्वगंधा, गिलोय और चवनप्राश यह तीन चीज है जो आवश्यकता अनुसार आप ले सकते हैं. सारी जानकारी आयुष मंत्रालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है. इसके साथ ही देश भर में सात लाख पंजीकृत प्रैक्टिशनर हैं जिनमें से दो लाख को कोविड केयर में लगाया हुआ है जिनको ट्रेंड किया हुआ है. इनमें से 50,000 तो ऐसे आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं जिनको राज्य सरकारों ने कोविड केयर ट्रीटमेंट में इंवॉल्व किया है. यानी आयुर्वेद चिकित्सा देश में आसानी से हर जगह उपलब्ध है इनकी सलाह से आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट ले सकते हैं.

बहुत ज्यादा बिगड़ने पर लें एलोपैथिक ट्रीटमेंट 
कोरोना जैसी महामारी से बचाव के लिए आयुर्वेदिक दवाइयां किसी रामबाण से कम नहीं हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से और आयुष मंत्रालय की तरफ से यह भी कहा गया है. यदि किसी की हालत बहुत ज्यादा बिगड़ी है उसे एलोपैथिक ट्रीटमेंट भी लेना चाहिए. लेकिन बड़ी बात ये है कि तमाम सारी प्रयोगों से पहली बार है कि आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से यह कहा गया है कोरोना जैसी महामारी में आयुर्वेदिक दवा भी बेहद कारगर है

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