जम्मू-कश्मीर में इस साल अब तक 108 आतंकी मारे गए, हिज्बुल की कमर टूटी

जम्मू और कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बुधवार को एक समारोह में कहा कि सुरक्षाबलों द्वारा हर दिन कम से कम एक दर्जन आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए जाते हैं. 

जम्मू-कश्मीर में इस साल अब तक 108 आतंकी मारे गए, हिज्बुल की कमर टूटी

श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बुधवार को एक समारोह में कहा कि सुरक्षाबलों द्वारा हर दिन कम से कम एक दर्जन आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए जाते हैं और जहां कहीं भी सही सूचना होती हैं, वहां जमीनी स्तर पर संयुक्त अभियान शुरू होता है मगर यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि आम लोगों को कोई क्षति ना हो. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे इनपुट हैं कि आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादी सुरक्षाबलों पर 'बड़े हमले' की योजना बना रहे हैं और ऐसे हमलों को विफल करने के लिए, पूरे राज्य में सतर्कता का उच्चतम स्तर पर प्रबंध किया गया है. 

मुख्य रूप से, इस साल अब तक पूरे कश्मीर में विभिन्न आतंकवाद विरोधी अभियानों में 108 आतंकवादी मारे गए हैं. मारे गए आतंकवादियों में से अधिकांश हिज्बुल मुजाहिदीन के हैं. 

डीजीपी ने कहा, "28 मई को पुलवामा में एक वाहन में IED का पता चला था, जिसे सुरक्षाबलों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाना था. सुरक्षाबलों द्वारा समय पर कार्रवाई से योजना को विफल करने में मदद मिली. हम जैश योजनाओंको विफल करने के लिए सतर्क हैं. जमीन पर सुरक्षाबलों द्वारा सतर्कता का उच्चतम स्तर बनाए रखा गया है." उन्होंने कहा कि लगातार अभियानों का मकसद क्षेत्र में शांति को स्थिर करना है. 

यह पूछे जाने पर कि क्या जैश के आतंकी यूएस निर्मित एम 4 कार्बाइन को इस्तेमाल करने के लिए माहिर हैं, डीजीपी ने कहा, "अमेरिका द्वारा निर्मित एम-4 बंदूकों को मारे गए जैश आतंकवादियों से बरामद किया गया था. जिसका अर्थ है कि वे इसको चलने में माहिर हैं. यह एक सोफिस्टिकेटेड हथियार है. जो लक्ष्य पर दूर से हमला करने में इस्तेमाल किया जाता है. पिछले दिनों लश्कर के आतंकवादियों के पास से भी कुछ ऐसे हथियार बरामद किए गए थे, लेकिन जैश के आतंकवादियों के पास बड़ी संख्या में ये बंदूक हैं." 

हाल ही में कठुआ में एक एम 4-बंदूक मिली थी जो जैश आतंकी अली भाई के नाम पर थी और कुलगाम से भी एक ऐसी बंदूक बरामद की गई थी. सिंह ने कहा "हम चाहते थे कि स्थानीय आतंकवादी आत्मसमर्पण करें और इसके लिए हम स्थानीय बुजुर्गों और फंसे हुए आतंकवादियों के परिवार के सदस्यों को मुठभेड़ से पहले वहां लाते है ताकि उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मनाया जाए. हमारी कोशिश है कि युवा इस रास्ते को ना चुनें और आत्मसमर्पण करें और अगर एसा करते हैं तो उनकी पूरी मदद की जाएगी." 

नियंत्रण रेखा पर लगातार युद्ध विराम उल्लंघन के बारे में, डीजीपी ने कहा कि इसके के पीछे मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक आतंकवादियों को जम्मू कश्मीर में धकेलना है. पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के नौशेरा, उरी, कुवपारा और केरन सेक्टरों से जैश और लश्कर कैडर को इस तरफ धकेलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन हमारी सेना एलओसी और इनरलैंड दोनों पर ऐसी सभी कोशिशों को विफल करने के लिए सतर्क है.