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भूख से बिलखती 11 साल की बच्ची पेट पर गीला कपड़ा बांधकर सो जाती है, जानिए क्या है कहानी

बताया जा रहा है कि पड़ोसी की तरफ से मिले अनाज से बच्ची खुद का गुजारा कर रही है.

भूख से बिलखती 11 साल की बच्ची पेट पर गीला कपड़ा बांधकर सो जाती है, जानिए क्या है कहानी
बच्ची के जन्म के बाद ही माँ छोड़ के चली गई. कुछ साल बाद पिता के मरने के बाद बच्ची अनाथ हो गई.

केन्दुझर: जिस उम्र में बच्चों को खेलकूद और अन्य शारीरिक गतिविधियों में आगे होना चाहिए उस उम्र में केन्दुझर जिला की 11 साल की बच्ची पेट पालने के लिए जंगल में लकड़ी काटती है. यह बच्ची राशन कार्ड और आधार कार्ड के लिंक न होने से तमाम परेशानियों का सामना कर रही है. 11 साल की बच्ची सीमा मुंडा सदर ब्लॉक महादेईपड़ा पंचायत सलरापेंठ गांव की है. जन्म के बाद ही माँ छोड़ के चली गई. कुछ साल बाद पिता के मरने के बाद बच्ची अनाथ हो गई. पहले अब बच्ची दादा के पास रहती थी. दादा को राशन मिलता था. दादा के मौत के बाद वह राशन भी मिलना बंद हो गया.

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जिसके बाद यह बच्ची घर में अकेले रह गई. आधार कार्ड और राशन कार्ड के न होने की वजह से बच्ची को जो 5 किलो राशन मिलता था वह भी बंद हो गया. पेट पालने के लिए बच्ची जंगल जाकर लकड़ी काटती और 30 से 40 रुपए प्रतिदिन कमाती है जिससे उसका घर चलता है. जिस दिन बारिश होती है या तबियत खराब होता है तो वो भूखी रहती है. कभी-कभी बच्ची को कई दिनों तक भूखों रहना पड़ता है. उस दिन बच्ची पेट पर गीला कपड़ा रखकर सो जाती है. 

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बताया जा रहा है कि पड़ोसी की तरफ से मिले अनाज से वह खुद का गुजारा कर रही है. बच्ची का राशन कार्ड और आधार न होने की वजह से उसे राशन भी नहीं मिल पा रहा है. गांव के सरपंच का कहना है कि, हम नियमों के अनुसार काम करते हैं जिनका राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं है उन्हें राशन नहीं दिया जाता है लेकिन बच्ची को हम अपनी तरफ से कुछ चावल दे दिया करेंगे. फिर भी बच्ची को कार्ड बनाना जरुरी है. 

इनपुट: SWATI ADYASHA MOHANTY