close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

सूरत: 12 साल की उम्र में छोड़ दिया सांसारिक मोह, जैन दीक्षा लेकर बन गई संन्यासी

जैन धर्म में, दीक्षा सांसारिक सुखों के त्याग की एक रस्म है, जिसमें लोगों, स्थान या चीजों से भावनात्मक जुड़ाव शामिल है. 

सूरत: 12 साल की उम्र में छोड़ दिया सांसारिक मोह, जैन दीक्षा लेकर बन गई संन्यासी
12 वर्षीय खुशी शाह ने एक भिक्षु बनने के लिए दीक्षा ली. (फोटो-एएनआई)

नई दिल्ली: जिंदगी के सारी सुख सुविधाओं को छोड़कर गुजरात के सूरत में एक 12 साल की मासूम बच्ची ने जैन धर्म की दीक्षा ली. मासूम खुशी शाह ने सांसारिक सुखों को त्यागने और भिक्षु बनने का फैसला लिया. खुशी के इस फैसले पर परिवार ने भी हामी भरी और बेटी के फैसले का मान रखकर दीक्षा समारोह आयोजित करने का फैसला किया गया. बुधवार (29 मई) को उसे जैन दीक्षा दी गई. 

जैन धर्म में, दीक्षा सांसारिक सुखों के त्याग की एक रस्म है, जिसमें लोगों, स्थान या चीजों से भावनात्मक जुड़ाव शामिल है. जानकारी के मुताबिक, ख़ुशी ने छठी कक्षा में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और साधारण जीवन जीने के लिए पिछले साल नवंबर में स्कूल छोड़ दिया. एएनआई से बात करते हुए खुशी ने कहा कि हम यहां जो सुख भोगते हैं वह स्थायी नहीं है, क्योंकि यह संसार अस्थायी है और ये ऐसा ही रहेगा.

खुशी ने बताया कि भिक्षु बनने में उसने 4 साल की देरी कर दी है. सिमरंधर स्वामीजी (एक जीवित तीर्थंकर) के अनुसार, आठ साल की उम्र में सांसारिक सुख का त्याग कर देना चाहिए. खुशी ने कहा कि मैं अब 12 साल का हूं. इसलिए, मैं जल्द से जल्द दीक्षा लेना चाहती हूं. 

लाइव टीवी देखें

खुशी के पिता विनीत शाह एक सरकारी कर्मचारी हैं, बेटी के भिक्षु बनने पर उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए एक गर्व का विषय है. एक बार संत बन जाने के बाद वह कई लोगों के जीवन में उजाला करेगी.