CAA के समर्थन में 11 पूर्व जज, 72 पूर्व ब्यूरोक्रेट, 56 पूर्व आर्मी अधिकारी राष्‍ट्रपति से मिले

देश के अलग-अलग क्षेत्र के प्रबुद्ध जन ने राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा.

CAA के समर्थन में 11 पूर्व जज, 72 पूर्व ब्यूरोक्रेट, 56 पूर्व आर्मी अधिकारी राष्‍ट्रपति से मिले

नई दिल्‍ली: देश के अलग-अलग क्षेत्र के प्रबुद्ध जन ने राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में 154 लोगों में 11 पूर्व जज, 72 पूर्व ब्यूरोक्रेट, 56 पूर्व आर्मी अधिकारी, और 15 इंटैलैक्चुअल का नाम शामिल हैं. ये सब CAA के समर्थन में हैं. NPR और NRC के लिए भी. इन लोगों ने ज्ञापन में लिखा है कि भारत सरकार देश की पुरानी परंपरा वसुधैव कुटुंबकम् और सर्वधर्म समभाव पर बहुत अच्छा काम कर रही है. कई पुराने थमे हुए मुद्दों पर फैसला हो रहा है. चाहे धारा 370 हो या अयोध्या मामला हो.

ये भी कहा कि सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट संसद से पारित हो चुका है, उसके बाद एक्ट भी बन चुका है और जब इसे लाया गया था तो इसको लाने से पहले तैयारियां की गईं. इसको ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी के पास भी भेजा गया था. उसके बाद ये संसद के दोनों सदनों में पास हुआ. संविधान के आर्टिकल 14 CAA पर लागू नहीं होता यह कहा गया है. ये संविधान की बाकी धाराओं के भी सम्मत हैं.

राष्ट्रपति से मिलने वालों में शामिल जस्टिस पी कोहली ने कहा कि आर्टिकल 14 रीजनेबल क्लासिफिकेशन को परमिट करता है, यह पॉजिटिव डिस्क्रिमिनेशन है जिनको जरूरत है जो जरूरतमंद है, उनको दिया जाना चाहिए वरना वह समाज पिछड़ जाएंगे, इसी तरह वो लोग जो आएंगे उनको नागरिकता देना पॉसिबल है. यह संविधान का उल्लंघन नहीं है.

LIVE TV

जबकि आर्टिकल 25 कहता है कि हर धर्म को अपने हिसाब से पूजा पद्धति अपनाने और बढ़ाने का अधिकार है. इस कानून से किसी की आजादी तो छीनी नहीं जा रही है. किसी का पूजा का अधिकार छीना नहीं जा रहा है. यह सड़कों पर निर्णय नहीं हो सकता कि यह उल्‍लंघन है या नहीं है. दूसरा कानूनी पहलू है जिसमें जिसमें प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं किया गया है. इसे संसद में दोनों सदनों ने पास किया है. संविधान के हिसाब से है तो यह संविधान के सम्मत है. साथ ही उसके राजनीतिक और सामाजिक अधिकार भी CAA में छीने नहीं जा रहे हैं.

जस्टिस कोहली कहते हैं कि नागरिकता कानून से कोई विभाजन नहीं हो रहा है बल्कि इसके विरोध से समाज में विभाजन हो रहा है. हम बच्‍चों को आजादी सिखा रहे हैं. आजादी मांगी जा रही है. कश्मीर को दे दो. असम को दे दो. आप देश को तोड़ने की बात कर रहे हैं या जोड़ने की बात कर रहे हैं. कल को वह लोग ताकत में आएंगे तो उनके लिए बड़ी समस्या बन जाएगी. हम देश को ऐसे रास्ते पर ले जा रहे हैं जहां अगर हम उसको रोके नहीं तो वापस आना मुश्किल होगा. हम अपने बच्चों को गलत चीज सिखा रहे हैं. स्कूल जाने से रोका जा रहा है. मरीज अस्‍पताल नहीं जा पा रहे हैं. लोग गाड़ियों में परेशान हो रहे हैं. रास्ते बंद हो गए हैं.

वह ये भी कहते हैं कि सेकुलरिज्म शब्द शामिल करके हमने इसकी अहमियत बढ़ाई. जबकि पहले से सर्वधर्म समभाव से चलते रहे हैं.फिर इसका कुछ लोगों ने बेजा फायदा लिया. विदेशी लोगों ने विदेशी ताकतों ने आक्रमणकारियों ने भारत को बहुत नुकसान पहुंचाया है. मुसलमान हमलावरों ने भी नुकसान पहुंचाया. पॉलिटिक्स और बाहरी ताकतों से मदद मिल रही है उससे ये हो रहा है. बहुत ज्यादा पॉलिटिक्स हो रही है, उससे दिक्कत खड़ी हो रही है. नेताओं को चाहिए कि पॉलिटिक्स के लिए समाज न तोड़ें उसको जोड़ें.

वही रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कमांडेंट वी के चतुर्वेदी कहते हैं कि लोगों को गुमराह किया जा रहा है, उनको पता ही नहीं है कि क्या कानून है. बाहरी ताकत है जो ये सब करा रही है भारत में हर जाति धर्म मजहब के लोग रहते हैं. इस माहौल को बिगाड़ने का प्रयत्न किया जा रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है. हर नागरिक को इसका विरोध करना चाहिए इन लोगों को किसी भी सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है. ‌

पूर्व IFS ऑफिसर ए के मल्होत्रा कहते हैं कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ के पब्लिक के मन में शंका पैदा करेंगे. गुमराह करके सब कराया जा रहा है. सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना एक षड्यंत्र के तहत हो रहा है. इसमें विदेशी ताकतों का भी हाथ हो सकता है. जो हिंदुस्तान को हमारे प्रधानमंत्री के नेतृत्व में फलना फूलना और तरक्की देखना नहीं चाहते.

ज्ञापन में NPR के बारे में कहा गया है कि ये कानूनी बाध्यता है कि इसे 2021 के पहले कन्डक्ट कराया जाए. देश की सुरक्षा के लिए NRC जरूरी है. बांग्लादेश और पाकिस्तान के पास भी NRC है. NRC का लेना देना जाति, धर्म भाषा क्षेत्र रंग से नहीं है.