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लोकसभा में आज मोदी सरकार पेश करेगी 'तीन तलाक' विधेयक

मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक को विपक्षी दलों के विरोध का सामना करना पड़ा था. वह विधेयक तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को दंडनीय अपराध बनाता था. 

लोकसभा में आज मोदी सरकार पेश करेगी 'तीन तलाक' विधेयक
सरकार ने सितंबर 2018 और फरवरी 2019 में दो बार तीन तलाक अध्यादेश जारी किया था. इसका कारण यह है कि लोकसभा में इस विवादास्पद विधेयक के पारित होने के बाद वह राज्यसभा में लंबित रहा था.

नई दिल्ली: 17वीं लोकसभा में मोदी सरकार की ओर से शुक्रवार (21 जून) को 'तीन तलाक' (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा पर पाबंदी लगाने के लिए नया विधेयक पेश किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की केंद्र सरकार की ओर से 17वीं लोकसभा के पहले सत्र का यह पहला बिल होगा. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद इस बिल को पेश करेंगे. वहीं, बीजेपी के सामने तीन तलाक बिल को संसद में पास कराना एक बड़ी चुनौती होगी. बता दें कि वर्तमान केंद्र सरकार के कार्यकाल का यह पहला संसद सत्र है. संसद का यह सत्र 17 जून को शुरू हुआ था और यह 26 जुलाई तक चलेगा.

26 जुलाई को समाप्त होने वाले सत्र में 30 बैठकें होनी हैं. इसके साथ ही पांच जुलाई को बजट पेश किया जाएगा. वहीं, प्रचंड बहुमत से जीतकर आई मोदी सरकार को तीन तलाक बिल लोकसभा में पास कराने में समस्या नहीं होगी. लेकिन, इस बिल को राज्यसभा में पारित कराना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.

 

 

मोदी सरकार की ओर से पेश किया जाने वाला यह बिल पूर्ववर्ती भाजपा नीत एनडीए सरकार द्वारा फरवरी में जारी एक अध्यादेश का स्थान लेगा. पिछले महीने 16वीं लोकसभा के भंग होने के बाद पिछला विधेयक निष्प्रभावी हो गया था, क्योंकि यह राज्यसभा में लंबित था. दरअसल, लोकसभा में किसी विधेयक के पारित हो जाने और राज्यसभा में उसके लंबित रहने की स्थिति में निचले सदन (लोकसभा) के भंग होने पर वह विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है. 

गौरतलब है कि मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) विधेयक को विपक्षी दलों के विरोध का सामना करना पड़ा था. वह विधेयक तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को दंडनीय अपराध बनाता था. जावड़ेकर ने इस बिल को लेकर कहा था कि प्रस्तावित विधेयक लैंगिक समानता पर आधारित है और यह सरकार के दर्शन 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' का हिस्सा है. नया विधेयक अभी लागू अध्यादेश की प्रति (कॉपी) होगा और मंत्री ने आशा जताई थी कि राज्यसभा (जहां सरकार के पास जरूरी संख्या बल नहीं है) द्वारा इसे आमराय से पारित कर दिया जाएगा. 

सरकार ने सितंबर 2018 और फरवरी 2019 में दो बार तीन तलाक अध्यादेश जारी किया था. इसका कारण यह है कि लोकसभा में इस विवादास्पद विधेयक के पारित होने के बाद वह राज्यसभा में लंबित रहा था. मुस्लिम महिला(विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) अध्यादेश, 2019 के तहत तीन तलाक के तहत तलाक अवैध, अमान्य है और पति को इसके लिए तीन साल की कैद की सजा होगी. 17वीं लोकसभा के प्रथम सत्र में नयी सरकार की योजना तीन तलाक की प्रथा पर पाबंदी लगाने सहित 10 अध्यादेशों को कानून में तब्दील करने की है. दरअसल, इन अध्यादेशों को सत्र के शुरू होने के 45 दिनों के अंदर कानून में तब्दील करना है अन्यथा वे निष्प्रभावी हो जाएंगी.