आज भी बरकरार है साहिर की कलम का जादू, 58 साल बाद सोशल मीडिया छाया ये गीत

आज भी बरकरार है साहिर की कलम का जादू, 58 साल बाद सोशल मीडिया छाया ये गीत
सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है सुनील का ये गाना... (यूट्यूब)

नई दिल्लीः सोशल मीडिया कब क्या वायरल हो जाए ये किसी को नहीं पता. इन दिनों आज से 58 साल पुराना एक गाना फेसबुक पर खूब शेयर किया जा रहा है. ये गाना साल 1959 में आई सुनील दत्त की फिल्म 'दीदी' का है. गाने के बोल है 'हमने सुना था एक है भारत, सब मुल्कों से नेक है भारत'. इस गाने में क्लास के छात्र अपने शिक्षक (सुनील दत्त) से भारत को लेकर कुछ सवाल करते हैं.

इन सवालों का किस खूबसूरती से शिक्षक जवाब देते हैं ये देखने वाली बात है और यही इस वीडियो की खासियत है. गीत की पंक्ति हैं... 'वही है जब कुरआन का कहना, जो है वेद पुरान का कहना, फिर ये शोर - शराबा क्यों है, इतना खून - खराबा क्यों है ? महान शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी का लिखा यह गीत सवाल-जवाब की शक्ल में है...और आज भी सोचने के लिए मजबूर करता है.

इस वीडियो में छात्रों और शिक्षक के बीच गीत के रूप में सवांद है. ये संवाद भारत के सांस्कृतिक, धार्मिक, भौगोलिक और भाषाई भेद पर चर्चा जैसा है. सोचने वाली बात है कि साल 1959 में गीतकार साहिर लुधियानवी ने कितनी बेबाकी से अपनी कलम को देश के तात्कालिक संघर्षों की सान पर तेज करते हुए और उन्हें शब्दों के रूप उकेरा. इस गीत को मोहम्मद रफी, आशा भोसले और सुधा मल्होत्रा ने अपनी आवाज से सजाया और इसे लयबद्ध किया है संगीतकार दत्ताराम बाबुराव नाईक ने, जिन्हें लोग दत्ता नाईक कहकर बुलाते थे. गौर करने वाली बात ये है कि इस गीत के बोल हमें आज भी देश के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों पर सोचने को को मजबूर करता है.