सोते रह गए चाचा, भतीजे ने बना ली सरकार, महाराष्ट्र में 41 साल बाद दोहराया इतिहास!

 महाराष्ट्र में पल-पल सियासी समीकरण बदल रहा है. महाराष्ट्र में सरकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना, कांग्रेस, NCP याचिका दायर करेगी.

सोते रह गए चाचा, भतीजे ने बना ली सरकार, महाराष्ट्र में 41 साल बाद दोहराया इतिहास!
सुप्रिया सुले ने कहा है कि जिंदगी में अब किसका भरोसा करें, इस तरह उन्हें कभी धोखा नहीं मिला था.

मुंबई: महाराष्ट्र में पल-पल सियासी समीकरण बदल रहा है. महाराष्ट्र में सरकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना, कांग्रेस, NCP याचिका दायर करेगी. उद्धव ठाकरे ने 56 शिवसेना और 4 निर्दलीय विधायकों के साथ ललित होटल में बैठक की है. शिवसेना ने 162 विधायकों के समर्थन का दावा किया है वहीं बीजेपी 173 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है. मुंबई में शरद पवार ने धनंजय मुंडे समेत 45 NCP विधायकों के साथ बैठक की है. अजित पवार ने उन्हें मनाने गए एनसीपी नेताओं से साफ कह दिया है कि वह फैसले से पीछे नहीं हटेंगे. अजित पवार के साथ अब सिर्फ 5 विधायक हैं.  

पवार का 'खेल' या पवार से 'खेल'? 
शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने विद्रोह कर दिया और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली. शरद पवार ने आज सुबह आए इस राजनीतिक भूकंप से उबरने की कोशिश करते हुए कहा कि ये अजीत पवार का निजी फैसला है. बाद में शिवसेना के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि अजित पवार पर बड़ा एक्शन ले सकते हैं. महाराष्ट्र में सरकार बनाने के सूत्रधार शरद पवार की पार्टी में ही तोड़-फोड़ कैसे हो गई. आखिर महाराष्ट्र की राजनीति में रातोरात खेल बदल गया और उसके खिलाड़ी भी. पीएम मोदी ने शरद पवार, NCP की राज्यसभा में तारीफ की और शरद पवार के साथ अकेले में मुलाकात की तो कई सारे सियासी कयासे लगाये जाने लगे. 

लेकिन महाराष्ट्र की सियासत ने आज 360 डिग्री का यू-टर्न लिया. इन सबके बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार की भूमिका को लेकर सबके मन में सवाल उठ रहे थे. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस शरद पवार की भूमिका से नाराज है. कहीं ना कहीं ये बात आज कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी सामने आई. अहमद पटेल ने कहा कि कांग्रेस ने सरकार बनाने को लेकर कोई देरी नहीं की. महाराष्ट्र के सियासी शतरंज में अजित पवार ने अपने पत्ते आखिरी समय तक नहीं खोले थे. भतीजे अजित पवार ने बीजेपी समर्थक NCP विधायकों को अपने साथ रखा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़ण्वीस के साथ लगातार संपर्क में रहे. 

मतलब साफ है कि चाचा सोते रह गए और भतीजे ने सरकार बना ली. शरद पवार का आरोप है कि अजित पवार ने एक चिट्ठी के बल पर पूरा खेल रचा. विधायक दल के नेता के रूप में अजित पवार के पास सभी पार्टी विधायकों के हस्ताक्षर थे. यह चिट्ठी लेकर अजित पवार राज्यपाल के पास गए और इसी चिट्ठी के बल पर अजित पवार ने विधायकों का समर्थन पेश किया. 

शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने कहा है कि जिंदगी में अब किसका भरोसा करें, इस तरह उन्हें कभी धोखा नहीं मिला था. शरद पवार के परिवार इतिहास पर नजर डालें तो चाचा और भतीजे के बीच यह सियासी रस्साकशी काफी पुरानी है. शरद पवार की बेटी सुप्रीया सुले और अजित पवार के बीच एनसीपी के उत्‍तराधिकारी को लेकर काफी दिनों से शह और मात का खेल चल रहा है. इस साल हुए लोकसभा चुनाव में परिवार के बीच चल रहा यह 'वॉर' खुलकर सामने आ गया था.

 

महाराष्ट्र में 41 साल बाद इतिहास दोहराया गया
महाराष्ट्र में 41 साल बाद इतिहास दोहराया गया है. शरद पवार ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत तो कांग्रेस पार्टी से की थी, लेकिन दो बार उसके ही खिलाफ गए. पहली बार 1978 में और दूसरी बार 1999 में. 1978 में सीएम पद पाने के लिए शरद पवार ने भतीजे की तरह ही पार्टी तोड़ी थी. 1977 के आम चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी कांग्रेस (यू) और कांग्रेस (आई) में बंट गई. शरद पवार कांग्रेस (यू) में शामिल हुए. 1978 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में दोनों हिस्सों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा लेकिन, राज्य में जनता पार्टी को रोकने के लिए साथ मिलकर सरकार बनाई. हालांकि, कुछ ही महीनों बाद शरद पवार ने कांग्रेस (यू) को भी तोड़ दिया और जनता पार्टी से जा मिले. जनता पार्टी के समर्थन से पवार 38 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बन गए.