2006 Noida serial murders Case: नोएडा के भयानक निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरिंदर कोली को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आखिरी बाकी मुकदमे में बरी कर दिया है. चीफ जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने 2011 के फैसले को पलटते हुए तुरंत रिहाई का हुक्म दिया है. पहले ही 12 केसों में बरी हो चुके कोली अब पूरी तरह आजाद है. जानें पूरा मामला.
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याद है वो 2006 का वो काला दौर? नोएडा के निठारी गांव में बच्चों और लड़कियों के कंकाल मिलने से पूरा देश सिहर गया था. बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पास नाले से 16 से ज्यादा हड्डियां निकलीं थी. पंढेर के नौकर सुरिंदर कोली पर रेप, मर्डर और सबूत मिटाने के इल्जाम लगे थे. सीबीआई ने 16 केस दर्ज किए, लेकिन जांच में कई खामियां के चलते लगातार यह केस कमजोर होता गया. और आखिरकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 2006 के निठारी सीरियल हत्याकांड मामले में दोषी ठहराए गए सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया और उनकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया. मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने आदेश दिया कि अगर कोली किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए.
पहले ही 12 मामलों में कर दिया गया था बरी
न्यायमूर्ति नाथ ने आदेश सुनाते हुए कहा कि कोली को आरोपों से बरी किया जाता है. शीर्ष अदालत ने कहा, "सुधारात्मक याचिका स्वीकार की जाती है. याचिकाकर्ता को आरोपों से बरी किया जाता है. याचिकाकर्ता को तत्काल रिहा किया जाए."
पीठ ने निठारी हत्याकांड से जुड़े आखिरी बचे मामले में भी कोली की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया. उन्हें पहले ही 12 मामलों में बरी किया जा चुका है. सर्वोच्च न्यायालय ने 2011 के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ कोली द्वारा दायर की गई सुधारात्मक याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें एक मामले में उसकी दोषसिद्धि की पुष्टि की गई थी. इसके बाद कोली ने 12 अन्य मामलों में बरी होने के आधार पर एक सुधारात्मक याचिका दायर की.
जानें पूरा मामला
कोली ने शीर्ष न्यायालय में निठारी हत्याकांड के एक मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए एक सुधारात्मक याचिका दायर की थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि उसे दोषी ठहराने के लिए इस्तेमाल किए गए वही सबूत बाद में उन अन्य मामलों में भी अविश्वसनीय पाए गए, जिनमें उसे बरी कर दिया गया है. इस साल जुलाई में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निठारी हत्याकांड के अन्य मामलों में उसे और सह-अभियुक्त मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील खारिज करने के बाद, यह उसके खिलाफ आखिरी दोषसिद्धि थी.
जुलाई में, सर्वोच्च न्यायालय ने 2006 के निठारी सिलसिलेवार हत्याकांड मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक कोली को बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआई, उत्तर प्रदेश सरकार और पीड़ित परिवारों की अपीलों को खारिज कर दिया था. इसने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 16 अक्टूबर, 2023 के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें पंढेर और कोली को बरी कर दिया गया था.
कोली और पंढेर दोनों पर 2005-06 में नोएडा के आसपास के इलाकों में बच्चों के साथ बलात्कार और हत्या का आरोप था.
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर, 2023 को निठारी हत्याकांड से जुड़े कुछ मामलों में पंढेर और कोली को बरी कर दिया था और सितंबर 2010 में निचली अदालत द्वारा उन्हें सुनाई गई मौत की सजा को पलट दिया था. इसने कोली को 12 मामलों में और पंढेर को 2 मामलों में बरी कर दिया था, जहाँ उन्हें पहले हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था और इन मामलों में निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी. सीबीआई ने लड़कियों के बलात्कार और हत्या के मामले में कोली और पंढेर के खिलाफ 16 मामले दर्ज किए थे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.
2006 का है मामला
यह मामला दिसंबर 2006 में तब लोगों के ध्यान में आया जब नोएडा के निठारी गांव में एक घर के पास नाले में कंकाल मिले. पंढेर उस घर का मालिक था और कोली उसका घरेलू नौकर था. कोली को हत्या, अपहरण, बलात्कार और सबूत मिटाने सहित विभिन्न आरोपों में सभी मामलों में आरोपी बनाया गया था. हालाँकि, पंढेर का नाम छह मामलों में दर्ज था. कोली को कई लड़कियों के साथ बलात्कार और हत्या के मामलों में दोषी ठहराया गया था और 10 से ज़्यादा मामलों में उसे मौत की सज़ा सुनाई गई थी.