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कुल 6 लाख... 100 घंटे तक धधकती रही आग और भारत के बच्चों का 'खजाना' खाक हो गया

आज बच्चों को मां-बाप झट से 'दो मोटे हाथी झूम के चले' लगाकर मोबाइल पकड़ा देते हैं लेकिन आज से 40-50 साल पहले ऐसा नहीं था. मनोरंजन के संसाधन और तकनीक भी इतनी आधुनिक नहीं थी. ऐसे समय में बच्चों में पढ़ने की रुचि पैदा करना मुश्किल काम था लेकिन धार्मिक कथा की तस्वीरों को एक किताब की शक्ल में लाकर जो प्रयोग किया गया उसने क्रांति ला दी. बच्चे न सिर्फ पढ़ने लगे बल्कि धार्मिक जानकारी भी बढ़ गई. अब एक दुखद खबर आई है. 

कुल 6 लाख... 100 घंटे तक धधकती रही आग और भारत के बच्चों का 'खजाना' खाक हो गया

बच्चों को क्लास की टेक्स्ट बुक पढ़ना भले ही पसंद न हो लेकिन वे रोचक तस्वीरों वाली कॉमिक्स बड़े चाव से पढ़ते हैं. आज मोबाइल और 'कालू मदारी आया' के युग से पहले तो ऐसा ही था. पिछले 50-60 साल में बड़ी हुई पीढ़ी ने ऐसे ही पढ़ने में रुचि पैदा की. कुछ लोगों को शायद ताज्जुब हो लेकिन भारत की कई पीढ़ियों के लिए धार्मिक और पौराणिक कथाओं की शुरुआती समझ ऐसी ही चित्रकारी वाली पुस्तकों ने बढ़ाई है. शायद आपको भी बचपन का कुछ याद आ रहा होगा. एक ऐसा ही नाम है- अमर चित्र कथा का. 1967 में सचित्र कहानियों का प्रकाशन शुरू हुआ था. इसमें आकर्षक दृश्यों के साथ सरल भाषा में धर्मग्रंथों को कॉमिक रूप में पेश किया जाता था जिससे बच्चे पढ़ भी लें और समझ भी लें. हालांकि अफसोस उस अनमोल विरासत का एक बड़ा हिस्सा खाक हो चुका है. 

आपने शायद कहीं खबर पढ़ी या देखी होगी कि कुछ दिन पहले मुंबई के भिवंडी में एक बड़े गोदाम में आग लगी थी. शायद शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी. वो गोदाम अमर चित्र कथा के खजाने की थी. चार दिन तक आग बुझाई नहीं जा सकी. करीब 100 घंटे में दमकलकर्मी आग पर काबू पा सके. तब तक बच्चों का यह अनमोल खजाना खाक हो चुका था. 

वहां 6 लाख पुस्तकें थी और ओरिजिनल...

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अमर चित्र कथा और उसकी सहयोगी प्रकाशन टिंकल की उस गोदाम में करीब 6 लाख पुस्तकें थीं. पब्लिशर की ओर से बताया गया है कि सब नष्ट हो गया. 60, 70 के दशक में जिनका बचपन बीता होगा, उन्हें यह जानकर और भी अफसोस होगा कि उस दौर के 200 से ज्यादा मूल हस्त-चित्र भी वहां रखे गए थे. वो सब जल गए. 

बीबीसी मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक अमर चित्र कथा की मार्केटिंग प्रमुख दामिनी बाथम ने बताया है कि ज्यादातर पॉजिटिव्स डिजिटल रूप से संरक्षित कर लिए गए हैं, लेकिन ऑरिजिनल हाथ से चित्रित की गई कलाकृतियां गोदाम में ही रखी थीं. वे अमूल्य थीं. हमने उन्हें कभी नहीं बेचा इसलिए हमें उनकी वास्तविक कीमत नहीं पता. उन्हें बहुत सतर्कता के साथ संरक्षित किया गया था.

बच्चों में चस्का पैदा किया

लेखक और कॉमिक बुक प्रेमी गणेश मटकरी ने कहा कि आज भी लोग अमर चित्र कथा की तस्वीर झट से पहचान लेते हैं. इन किताबों ने बच्चों में पढ़ने का चस्का पैदा किया. उसकी सरल भाषा और आकर्षक तस्वीरों ने जटिल कहानियों को भी सुलभ बना दिया.

अमर चित्र कथा की शुरुआत एक अंग्रेजी अखबार के जूनियर इंजीनियर अनंत पई ने की थी. अमर चित्र कथा का विचार पई को तब आया जब वह दिल्ली में एक टेलीविजन सेट बेचने वाली दुकान पर क्विज शो देख रहे थे. उन्होंने देखा कि प्रतिभागी ग्रीक पौराणिक कथाओं के प्रश्नों के उत्तर तो दे पा रहे थे, लेकिन भारतीय महाकाव्यों और पौराणिक कथाओं के प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पा रहे थे. 

कृष्ण, राम और...

राम वाइरकर ने कृष्ण अंक के लिए जो चित्र बनाए उसने नई लहर पैदा कर दी. अपने भावपूर्ण चेहरों और नाटकीय रचनाओं के लिए प्रसिद्ध वाइरकर ने 90 से ज्यादा कॉमिक पुस्तकों में तस्वीरें खीचीं. 

कृष्ण अंक की सफलता के बाद, अमर चित्र कथा का विस्तार हुआ और राम, शकुंतला, सावित्री, भीष्म, हनुमान, चाणक्य, बुद्ध, शिवाजी और अशोक जैसे भारतीय पौराणिक और ऐतिहासिक पात्रों पर आधारित कई और कहानियां शामिल की गईं. हालांकि दुखद इनमें से कई मूल चित्र और कॉमिक्स जलकर नष्ट हो गए. 

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Anurag Mishra

अनुराग मिश्र ज़ी न्यूज डिजिटल में एसोसिएट न्यूज एडिटर हैं. वह दिसंबर 2023 में ज़ी न्यूज से जुड़े. देश और दुनिया की राजनीतिक खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं. इससे पहले नवभारत टाइम्स डिजिटल में शाम की श...और पढ़ें

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