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मुंबई के 46 % युवा पोर्न देखने के हो गए हैं एडिक्ट: सर्वे का दावा

तकरीबन 60 प्रतिशत लड़कों ने कहा कि पोर्न वीडियो देख कर वो एस्कॉर्ट सेवाओं का भी इस्तेमाल करते हैं. उसके पीछे ये कारण है. ज्यादातर पोर्न साइटों पर नंबर दिए होते है जहाँ से एस्कॉर्ट सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता

मुंबई के 46 % युवा पोर्न देखने के हो गए हैं एडिक्ट: सर्वे का दावा
.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुंबई: एक प्राइवेट संस्था के सर्वेक्षण मे ये बात सामना आई है कि मुंबई में पढाई करने वाले 16-22 साल के छात्रों के बीच पोर्नोग्राफी (Pornography)का काफी इस्तेमाल हो रहा हैं. यह सर्वेक्षण रेस्क्यू रिसर्च एंड ट्रेनिंग चैरिटेबल ट्रस्ट(प्राइवेट संस्था) की निगरानी में किया गाय है. सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य ये जनना था कि कैसे  पोर्नोग्राफी (Pornography)से कॉलेज जाने वाले बच्चे जिनकी उम्र 16 से 22 वर्ष के बच्चे प्रभावित करती हैं. ये सर्वे एक साल में किया गया जिसके दौरान मुंबई के 30 इंग्लिश स्कूल डिग्री कॉलेज में 500 छात्रों से पोर्नोग्राफी (Pornography)को लेकर सवाल पूछे गए.

इन सवालों के आधार पर कुछ बाते निकल कर सामने आई. 

1. 33% लड़के और 24% लड़कियां सेक्स्टिंग (अश्लील भाषा मे बातचीत) करते है.
2. कॉलेज के लड़के लाखों की संख्या मे रोजाना अपने फोन और कंप्यूटर पर रेप से संबंधित विडियो देखते है.
3. तकरीबन 60 प्रतिशत लड़कों ने कहा कि पोर्न वीडियो देख कर वो एस्कॉर्ट सेवाओं का भी इस्तेमाल करते हैं. उसके पीछे ये कारण है. ज्यादातर पोर्न साइटों पर नंबर दिए होते है जहाँ से एस्कॉर्ट सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता
4. 46 % युवा पुरुष चाइल्ड पोर्न एडिक्ट है. जो कि युवा लड़कियों की बढ़ती संख्या को मानव तस्करी को बढ़ावा देते है.
5 इस सर्वेक्षण से एक बात और सामने आई कि पोर्नोग्राफी (Pornography)के कारण तकरीबन 10 प्रतिशत कॉलेज जाने वाली लड़कियां अबॉर्शन करवाती है.

कैसे बचा जाए---
1. कॉलेज स्तर पर पाठ्यक्रम ने साइबर एथिक्स की आवश्यकता.
2. पोर्न ब्लॉकिंग सिस्टम को मजबूत किया जाए, क्योंकि ज्यादातर मामलों में स्टूडेंट फ़ायरवॉल को तोड़ देते हैं.
3. कड़े कानून की जरूरत

मनोवैज्ञानिको का मानना है कि पोर्नोग्राफी (Pornography)एक कैंसर है जो किसी व्यक्ति की हिंसा के उकसाता है जिससे कई बार बलात्कार या महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आती है. मनोवैज्ञानिको का कहना है कि बच्चों के इससे बचाने के लिए घर के लोगों के अपने बच्चों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. ऐसा इसलिए है कि जब बच्चा ज्यादातर समय अकेला रहेगा तो वो अपना टाइम निकालने के लिए ऐसे चीजो के प्रति आकर्षित होता है.