मध्यप्रदेश: BJP के नए प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के सामने ये हैं 5 बड़ी चुनौतियां

बीजेपी की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के तौर पर राकेश सिंह की ताजपोशी कांटों भरे ताज से कम नहीं है. उनके सामने सत्ता विरोधी माहौल के साथ पार्टी के भीतर की गुटबाजी जैसी बड़ी चुनौतियां हैं, जिनका उन्हें सामना करना होगा. 

मध्यप्रदेश: BJP के नए प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के सामने ये हैं 5 बड़ी चुनौतियां
मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष राकेश सिंह. (फाइल फोटो)

भोपाल: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के तौर पर जबलपुर से सांसद राकेश सिंह की ताजपोशी कांटों भरे ताज से कम नहीं है. उनके सामने सत्ता विरोधी माहौल के साथ पार्टी के भीतर की गुटबाजी जैसी बड़ी चुनौतियां हैं, जिनका उन्हें सामना करना होगा. 

राज्य में पार्टी का कमजोर संगठन 
बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व में राज्य के कमजोर संगठन को लेकर खासी चिंता रही है, यही कारण है कि उसकी ओर से लंबे अरसे से नए अध्यक्ष की तलाश जारी थी. निवर्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान का लगभग नौ माह का कार्यकाल बचा था, इसके बावजूद उन्हें पद छोड़ने को कहा गया, क्योंकि विधानसभा का चुनाव इस साल होने वाला है. पार्टी नेतृत्व को इस बात का अंदेशा था कि चौहान की कमजोर संगठन क्षमता के चलते चुनाव जीतना आसान नहीं होगा.

महाकौशल के राजनीतिक विश्लेषक मनीश गुप्ता ने कहा, "राकेश सिंह के राष्ट्रीय स्तर के बीजेपी नेताओं से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक से मधुर संबंध हैं, साथ ही उनमें संगठन क्षमता अन्य नेताओं से बेहतर है, वे निर्विवाद हैं. लिहाजा उनकी इन्हीं खूबियों को देखते हुए उन्हें पार्टी की कमान सौंपी गई है. यह सही बात है कि आगामी विधानसभा चुनाव सिंह के लिए एक बड़ी चुनौती होगा."

उपचुनाव में मिली बीजेपी को हार
राज्य में पिछले दिनों हुए चार विधानसभा क्षेत्रों के उप-चुनाव में बीजेपी को मिली हार के बाद से संगठन में बदलाव के स्वर मुखर होने लगे थे. राज्य से नाता रखने वाले बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सहित कुछ नेता संगठन को लेकर सवाल उठाते रहे, जिसके परिणामस्वरूप आखिर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अध्यक्ष के बदलाव के लिए राजी हो गए.

संघ के आंतरिक सर्वे के चौकाने वाले नतीजे
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वे और विभिन्न सर्वेक्षणों में चुनाव से पहले बीजेपी की स्थिति के पक्ष में माहौल की बात सामने न आने के बाद से पार्टी नई रणनीति पर काम कर रही थी, उसी क्रम में अध्यक्ष में बदलाव किया गया है. राकेश सिंह राज्य के उन नेताओं में हैं, जो ज्यादा चर्चाओं में नहीं रहे और न ही अब तक किसी बड़े विवाद में उलझे हैं.

संगठन में खुद को स्थापित करना 
जबलपुर से सांसद रहे राकेश सिंह के सामने एक बड़ी चुनौती पार्टी में खुद को स्थापित करने की भी है. राकेश सिंह राज्य के उन नेताओं में हैं, जो ज्यादा चर्चाओं में नहीं रहे हैं. ऐसे में उन्हें पूरे प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत बनानी होगी. कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित करना होगा. 

गुटबाजी पर काबू करना 
एमपी बीजेपी में गुटबाजी भी जगजाहिर है. नंदकुमार सिंह चौहान की विदाई और राकेश सिंह का आगमन जिन परिस्थितियों में हुआ है उनसे अलग-अलग गुटों में और टकराव बढ़ सकता है. राकेश अध्यक्ष पद के दावेदारों में नहीं गिने जा रहे थे लेकिन अब जिस तरह से उनका नाम सामने आया है उससे पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नाखुश हो सकते हैं. इन सभी चुनौतियों से राकेश सिंह को पार पाना होगा. 

बीजेपी के प्रदेश महामंत्री वी. डी. शर्मा का कहना है कि राकेश सिंह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं, उनके नेतृत्व में पार्टी में नई उर्जा का संचार होगा और आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी एक बार फिर जीत अवश्य हासिल करेगी.