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विद्वानों ने खोज निकाला 6वीं शताब्दी का रामायण

विद्वानों ने कोलकाता के एक पुस्तकालय में संयोगवश हिंदू महाकाव्य रामायण की 6वीं शताब्दी की पांडुलिपि खोजने का दावा किया है।  

विद्वानों ने खोज निकाला 6वीं शताब्दी का रामायण

कोलकाता : विद्वानों ने कोलकाता के एक पुस्तकालय में संयोगवश हिंदू महाकाव्य रामायण की 6वीं शताब्दी की पांडुलिपि खोजने का दावा किया है।  

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह पांडुलिपि कोलकाता स्थित संस्कृत साहित्य परिषद के संस्कृत पुस्तकालय के अंदर मिली है। रामायण के इस संस्करण में राम और सीता दोनों को मानव के रूप में चित्रित किया गया है। इस रामायण का ज्यादातर हिस्सा राम-सीता के अलगाव से संबंधित है।  

रामायण का यह संस्करण चौथी बीसी के वाल्मीकि रामायण के अलग है। इसमें सात कांड की जगह केवल पांच कांड हैं। हिंदू समुदाय में वाल्मीकि रामायण सर्वाधिक स्वीकृत रामायण ग्रंथ है।

विद्वान वन्हि पुराण पर काम कर रहे थे इसी बीच उन्हें 6वीं सदी का यह रामायण उनके हाथ लगा। विद्वानों को लगा था कि एशियाटिक सोसायटी लाइब्रेरी में वन्हि पुराण की पांडुलिपि अधूरी है और वे गुम पांडुलिपि की खोज कर रहे थे।