दक्षिण कश्मीर में 6 महीने में 80 आतंकवादी मारे गए: सेना

सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि दक्षिण कश्मीर में पिछले छह महीने में करीब 80 आतंकवादी मारे गए हैं और क्षेत्र में करीब 115 आतंकवादी अभी भी सक्रिय हैं जिनमें से 12 से अधिक विदेशी आतंकवादी हैं. 

दक्षिण कश्मीर में 6 महीने में 80 आतंकवादी मारे गए: सेना
सेना ने कहा जैसे ही आतंकवादियों की संख्या कम होगी, स्थिति में सुधार होगा. (फाइल फोटो)

श्रीनगर: सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि दक्षिण कश्मीर में पिछले छह महीने में करीब 80 आतंकवादी मारे गए हैं और क्षेत्र में करीब 115 आतंकवादी अभी भी सक्रिय हैं जिनमें से 12 से अधिक विदेशी आतंकवादी हैं. सेना की विक्टर फोर्स के जनरल आफिसर कमांडिंग मेजर जनरल बी एस राजू ने कहा, ‘‘दक्षिण कश्मीर में करीब 115 आतंकवादी हैं और इनमें से 99 स्थानीय और 15-6 विदेशी आतंकवादी हैं. हमने पिछले छह-सात महीने में कार्रवाई की है, हमने शीर्ष नेतृत्व सहित करीब 80 आतंकवादियों को मार गिराया है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘...जैसे ही आतंकवादियों की संख्या कम होगी, स्थिति में सुधार होगा.’’ 

कल शोपियां में भाजपा युवा नेता की हत्या के बारे में पूछे जाने पर मेजर जनरल राजू ने कहा कि ये आतंकवादियों की ओर से ‘‘हताशा में उठाया गया कदम है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे सुरक्षा बलों के खिलाफ कोई संगठित कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं. इसलिए वे कमजोर लक्ष्यों को देख रहे हैं और मेरा मानना है कि पुलिस इन अपराधों को अंजाम देने वालों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई कर रही है.’’ उन्होंने कहा कि सेना एवं अन्य सुरक्षा एजेंसियां आतंकवादियों के खिलाफ सभी जरूरी कार्रवाई करना जारी रखेंगी ताकि दक्षिण कश्मीर के लोग शांति से रह सकें.

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मेजर जनरल बी एस राजू ने कहा, ‘‘दक्षिण कश्मीर में स्थिति काफी हद तक बेहतर है. पथराव और आतंकवादियों की गतिविधियां कम हो गई हैं. ठंड का मौसम शुरू होने पर हमारी कार्रवाई और अधिक प्रभावी होगी और शांति लौटेगी.’’ दक्षिण कश्मीर में जैशे मोहम्मद आतंकवादियों के बारे में मेजर जनरल राजू ने कहा कि जैशे मोहम्मद के आतंकवादियों के सफाए की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो गई है.

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा इरादा विशेष रूप से जैश के खिलाफ कार्रवाई करने का है.’’ आतंकवादियों की ताजा भर्ती पर उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से चिंता का एक कारण है. उन्होंने कहा, ‘‘काफी हितधारकों को यह सुनिश्वित करने के लिए एक ठोस तरीके से काम करने की जरूरत है कि नयी भर्ती पर रोक लगे. मैं अभिभावकों पर यह जिम्मेदारी डालूंगा कि वह अपने बच्चों की परवरिश ठीक से करें और मैं गांव एवं नगरों के बुजुर्गों, मौलवियों पर भी जिम्मेदारी डालूंगा कि वे युवाओं में सही संदेश देना सुनिश्चित करें.’’