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नौकरानी के पति को मारा लकवा, इलाज के लिए नहीं हैं पैसे; नाश्ता बेचकर दंपति जुटा रहा मदद

पति-पत्नी नाश्ते का स्टॉल लगाने का काम अपने घर में काम करने वाली नौकरानी के लिए कर रहे हैं.

नौकरानी के पति को मारा लकवा, इलाज के लिए नहीं हैं पैसे; नाश्ता बेचकर दंपति जुटा रहा मदद
कुक के पति के इलाज के लिए सुबह का नाश्ता बेचते हैं अंकुश और अश्विनी शाह.

मुंबई: कांदिवली स्टेशन के बाहर पोहे और इडली बेचकर एक दंपति मानवीयता और स्नेह की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है. अच्छी कंपनी में काम करने वाले पति-पत्नी अपने घर में खाना बनाने वाली महिला की मदद के लिए सुबह का नाश्ता बेचते हैं.

दरअसल, शहर में रहने वाले अंकुश शाह के घर काम करने वाली बुज़ुर्ग महिला नौकरानी के पति को लकवा मार गया है. जिसके बाद उसके घर में पैसों के कारण मुसीबत आने लगी. इस विपरीत घड़ी में मदद का हाथ बढ़ाने के लिए अंकुश और उनकी पत्नी अश्विनी आगे आए और दोनों रोज सुबह 3 बजे उठकर अपनी कुक के साथ पोहे, उपमा, पराठे बना कर कांदिवली स्टेशन आते और स्टाल लगाकर बेचते हैं. पिछले कई महीने से यह सिलसिला चलता आ रहा है. इन दोनों के काम के बारे में लोगों को तब ज्यादा मालूम हुआ जब अश्विनी ने सारी बात सोशल मीडिया पर शेयर की. देखें- LIVE TV

दंपति ने बताया कि रोज सुबह 4 बजे उठकर नाश्ते की सामग्री तैयार करते हैं और 5 से 9 बजे तक स्टॉल लगाते हैं. पति-पत्नी स्टॉल लगाने के बाद सुबह 10 बजे अपने ऑफिस के लिए निकलते हैं. हर रोज तकरीबन हजार रुपए की कमाई करते हैं और पूरे पैसे बुज़ुर्ग नौकरानी के हाथों में दे देते हैं.
 
मैं कैसे इनका शुक्रियादा करूं
खाना बनाने वाली महिला भावना पटेल ने अनुसार,  ''हमने नाश्ते का स्टॉल लगाना कुछ दिनों पहले ही शुरू किया है. मेरी पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं थी जिसे देखते अंकुश ने हमें यह आइडिया दिया. मेरे पास शब्द नहीं हैं कि कैसे मैं इनका शुक्रियादा करूं.

अच्छा  सपोर्ट मिल रहा है
जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री रखने वाले अंकुश शाह ने बताया, ''हमने ये काम सिर्फ और सिर्फ मदद के लिए शुरू किया है. दरअसल हमारे घर कई सालों से एक कुक(खाना बनाने वाली) आती है. हमने हमेशा उनके चेहरे पर मुस्कान देखी है, लेकिन जब हमें पता चला कि उनके पति को लकवा मार गया है और पैसों की परेशानी है तब हम उनकी हेल्प के लिए पैसे देने पहुंचे तो उन्होंने कहा कि वह पैसे नहीं ले सकती हैं. वह मेहनत के पैसे से इलाज करवाना चाहती हैं. शुरुआत में तकलीफ जरूर हुई, लेकिन अब सब कुछ ठीक है. परिवार का सपोर्ट मिल रहा है. कई सारे ग्राहक शहर के अलग-अलग हिस्सों से खाने के लिए आते हैं. हमें हमारे ऑफिस के बॉस की तरफ से भी काफी अच्छा  सपोर्ट मिल रहा है. शुरू-शुरू में हमें झिझक होती थी कि लोग क्या कहेंगे? लेकिन फिर समझ में आया कि काम नहीं उसके पीछे की सोच ज्यादा जरूरी है.

मुझे बहुत खुशी है
बीएमएस की पढ़ाई करने वाली अश्विनी शाह ने कहा,  ''आमतौर पर लोग अपने कामों में बिजी रहते हैं. काफी बार आम कपल एक दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पाते, लेकिन मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि हम एक ऐसा काम कर रहे हैं जिससे ना सिर्फ किसी कि मदद हो रही है बल्कि हमें एक दूसरे के साथ वक़्त बिताने को भी मिल रहा है.

काम काबिले तारीफ है
एक ग्राहक ने बताया कि इस स्टॉल के बारे में पता चला जिसके बाद हम यहां पहुंचे. न सिर्फ इनका नश्ता अच्छा है बल्कि जिसके लिए ये काम कर रहे हैं वो और भी अच्छा है. इनका काम काबिले तारीफ है इसलिए दिल से बधाई देता हूं.

सोशल मीडिया से मदद मिली
अंकुश और अश्विनी का कहना है कि इस काम को सोशल मीडिया से काफी मदद मिली है. पहले के कुछ दिनो में 3-4 लोग ही आते थे, लेकिन जब लोगों को मालूम हुआ तो रोजोना 40-50 कस्टमर आने लगे हैं और कमाई भी अच्छी होने लगी है. दंपति का कहना है कि अब वे अपनी कुक के पति का अच्छे से अच्छा इलाज करा सकते हैं.

नीलेश शुक्ला के साथ अमित त्रिपाठी, ज़ी मीडिया, मुंबई

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