"अ डायलॉग विद जेसी शो" में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा, 'दुश्मन सरहद पार ही नहीं, सरहद के अंदर भी हैं'

"अ डायलॉग विद जेसी शो" में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा, 'दुश्मन सरहद पार ही नहीं, सरहद के अंदर भी हैं'
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और ज़ी रीजनल चैनल्स के सीईओ जगदीश चंद्र

"अ डायलॉग विद जेसी शो" में बतौर खास मेहमान आए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से ज़ी रीजनल चैनल्स के सीईओ जगदीश चंद्र ने बेहद सरल और धारदार सवाल किए, जिनका जवाब राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बेबाकी से दिया. शो में उन्होंने कहा कि दुश्मन सरहद के पार ही नहीं सरहद के अंदर भी हैं. करप्शन पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ऐसा काम किया है जिससे लगने लगा है कि करप्शन को हटाया जा सकता है. नीचे पढ़ें सवालों के जवाब...

प्रश्न:- स्कूल खत्म कर डिफेंस अकेडमी में आर्मी करियर के लिए गए तो कभी सोचा था कि इस मुकाम पर पहुंचेंगे, मंत्री बनेंगे?

उत्तर:- बिल्कुल नहीं सोचा था. मन में जज्बा हर किसी का होता है, हर युवा के मन में होता है, इस देश के लिए कुछ करना है और मैं किसी से अलग नहीं हूं. सेना जैसी अकेडमी सिर्फ सिखाती है कि एक लक्ष्य है और लक्ष्य को पूरा करना करना है. नंबर 2 कुछ नहीं है और आप जिस फिल्ड में हैं, यहां काम जिस लेवल से कर सकते हैं जहां तक कर सकते हैं. हर व्यक्ति तक आप वो लाभ पहुंचा सकते थे, जिसकी आप कभी खुद कल्पना करते थे. एक-एक लीडरशीप इंस्पिरेशनल लीडरशीप हैं.

प्रश्न:- आपको पॉलिटिक्स ज्वाइन करने के लिए किस बात ने इंस्पायर किया और कैसे?

उत्तर:- मन में भाव आया कि आज दुश्मन सिर्फ सरहद के पार नहीं हैं सरहद के अंदर भी हैं. अलग-अलग रूप के दुश्मन हैं देश में गरीबी के रूप में और जिस तरह से एक रुपया दिल्ली से चलता है तो नीचे तक 15 पैसे पहुंचता है. ये सब भ्रष्टाचार जो है अलग-अलग रूप में दुश्मन है. अब उसको हम आज की पीढ़ी किस तरह से खत्म कर सकते हैं ये है चुनौती और आज की पीढ़ी के सामने एक जबरदस्त रूप से एक इंस्पिरेशनल लीडरशीप आ जाए तो एक पूरी टीम तैयार हो जाती है इसको खत्म करने के लिए.

प्रश्न:- आज आप नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों के करीबी माने जाते हैं. तो इन लोगों से पहली बार मुलाकात कब हुई?

उत्तर:- मुझे लगता हैं इनके करीब देश हैं, हम तो सिर्फ टीम मेंबर हैं. अपना-अपना रोल है हमारा और उस रोल को पूरा करने का जज्बा हम सब में रहता हैं. अपने सामने परिस्थितियां बदलते हुए देख एक और आत्मविश्वास आ जाता हैं कि ये संभव हैं. आज पहली बार सबको लगता है कि करप्शन जड़ से हटाया जा सकता है. अब ऐसे-ऐसे जो फैसले हुए हैं वो ऐसा व्यक्ति ही कर सकता था और ऐसी सरकार ही कर सकती थी, जो खुद करप्शन में बिल्कुल लिप्त नहीं हैं. कालेधन को हटाने के लिए नोटबंदी जैसे निर्णय एक ऐसी सरकार ही ले सकती है जिसको इससे कोई लोभ नहीं है. ऐसे निर्णयों से बदलाव लाने का आत्मविश्वास और बढ़ता है.

प्रश्न:- पिछले तीन वर्षों से सारे देश में नरेंद्र मोदी की चर्चा है. तो इन सालों में आपको नरेंद्र मोदी का इस देश के प्रधानमंत्री के रूप में सबसे बड़ा योगदान क्या लगता है?

उत्तर:-  एक आत्मविश्वास लाना और देश के प्रति स्वाभिमान भी लाना कि भारत भी उस उच्च स्तर तक पहुंच सकता है जिसे हम किताबों के अंदर सिर्फ पढ़ा करते थे. एक आत्मविश्वास आया कि हम न सिर्फ देश के रूप में बल्कि व्यक्तिगत रूप में भी किसी से कम नहीं है. अब चाहे खेल हो, व्यापार हो, विज्ञान हो, आविष्कार हो हम किसी से कम नहीं है. एक ये आत्मविश्वास भी आया कि हम बदल सकते हैं. देश के अंदर जिस भी तरह की परिस्थिति हो उसको हम बदल सकते हैं. हमारी पीढ़ी बदलाव लेकर आएगी एक ऐसा आत्मविश्वास दिया. एक ऐसा आत्मविश्वास लाए कि अगर पांच देश की मीटिंग हो रही हो और उसमें भारत शामिल न हो तो भारत को बुलवाया जाता है. एक ऐसा आत्मविश्वास पैदा कर दिया है.

प्रश्न:- पूरी दुनिया माननीय नरेंद्र मोदी को जानती है. लाखों लोग जुटते हैं उनके नाम से. क्या लगता है कि वो एक ग्लोबल लीडर की तरह उभर रहे हैं?

उत्तर:- आज अगर देश को ऊर्जा की जरूरत है तो वो ऊर्जा कई अन्य देशों में से भी मिल सकती है. अलग-अलग देशों में जाकर हम अपनी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं और उन देशों को भी कई जरूरत हो सकती है तो हम उनकी जरूरत पूरा करें. ये एक तरह का व्यापार है. तो इसके लिए अलग-अलग देश जाकर मिलना पड़ता है. ग्लोबल लीडर वही होता है जिसको फोलो किया जाता है और आज विश्व में सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा किसी राष्ट्रनेता को फोलो किया जाता है तो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे ज्यादा उभरकर सामने आ रहे हैं.

प्रश्न:- अमित शाह की अगुवाई में अशोका होटल में मंत्रियों का प्रेजेंटेशन था. पूरा मीडिया भी शामिल था. क्या आपको लगता है कि amit shah is a combination of your politician strategies and your administrate also?

उत्तर:- बहुत जबरदस्त कोमबिनेशन हैं अमित शाह और नरेंद्र मोदी जी का. प्रधामनंत्री जी का विजीनरी लीडरशीप है. बिना थके भारत को आगे ले जाने का एक विजन है मोदी जी का. ऐसा करते वक्त एक टीम लीडर चाहिए जो संगठन को मजबूत कर सके. सरकार और संगठन आज पहली बार बहुत मजबूत नेतृत्व में है. अमित शाह जी कि clearity of mind अभूतपूर्व है. किसा भी सवाल का बिना संकोच के जवाब देते हैं.

प्रश्न:- SILENT HERO OF THIRD ANIVERSARY CELEBRATION. बहुत तीन महीने से काम कर रहे थे आप, तो इतने रोड मेप कैसे बनाए आपने?

उत्तर:- SILENT HERO वो है जो घर-घर जाकर योजनाओ के बारे में बताते है. यूपी में होने वाली जीत उन सभी SILENT HERO की वजह से हुई. प्रधानमंत्री मोदी तो एक चेहरा है लेकिल बहुत सारे दूसरे राजनीतिक लीडर भी जाते हैं. हम सभी SILENT HERO को सलाम करते हैं. जो घर-घर गांव-गांव जाकर काम करते हैं. मुझे एक रोल दिया हुआ है. उस रोल में आज वैंकेया जी है मुझे कुछ सिखाने के लिए और कल जेटली जी थे और दोनों अपने आप में बहुत जबरदस्त लीडर थे. तो दोनों से बहुत कुछ सिखने को मिला.

प्रश्न:- इस तीसरी ANIVERSARY मीडिया, अखबारों और टीवी ने नरेंद्र मोदी को जबरदस्त रिस्पोंस दिया. आपने कभी पहले मीडिया हैंडल नहीं किया था तो इतना बढ़िया मीडिया इफेक्टीव मैनेजमेंट आपने इस बार कैसे किया?

उत्तर:- मीडिया को कोई हैंडल नहीं कर सकता. मीडिया अपने आप में स्वतंत्र रूप से सोच विचार करके आगे बढ़ती है. मीडिया और राजनीति में दूरी बनी रहनी चाहिए ताकी लोकतंत्र सही चल सके. दो साल लगे ऐसा होने में लेकिन अब आपस में एक रिस्पेक्ट का रिश्ता बन गया है जहां हम सोचते हैं कि मीडिया को लिबरटी होनी चाहिए. हमारा साथ और विश्वास सिर्फ जनता के साथ नहीं मीडिया के साथ भी है.

प्रश्न:- DON'T YOU THINK THERE IS A CONSIDERABLE CHANGE IN THE MOOD AND ATTITUDE IN THE MEDIA TO ASK NARENDRA MODI FOR THE LAST THREE YEARS?

उत्तर:- YES THERE IS ABSOLUTELY THERE IS A CHANGE HOW MEDIA PERCIVES OUR PRIME MINISTER NOW AND I THINK THERE IS A LOT OF RESPECT पिछले दो ढ़ाई साल में जनता का विश्वास मोदी जी पर पूरा हो गया था. पर शुरू के एक साल में मीडिया का काम था. उसके अगले एक साल में थोड़ा-थोड़ी मीडिया का विश्वास जागने लगा. लेकिन आज मीडिया को हम पर विश्वास है कि कड़े निर्णय लेते हैं पर काम ठोस करते हैं.

प्रश्न:- कुछ लोग कहते हैं कि सरकार अभी भी कुछ मीडिया ग्रुप्स जो अनफ्रेन्डली है. उनको रिमोट कंट्रोल से कंट्रोल करने की कोशिश कर रही हैं?

उत्तर:- जो फ्रेन्डली नहीं हैं उन्हें आप रिमोट कंट्रोल से कैसे कंट्रोल कर सकते हैं. ऐसी कोशिश बिल्कुल भी नहीं हैं. न तो हम ज्यादा नजदीकी रखते और न ही ज्यादा दूरी. हमने अपने काम का रिपोर्ट कार्ड मीडिया तक रखा और हमें उम्मीद हैं कि मीडिया हमारे काम का रिपोर्ट कार्ड जनता को सच्चे तरीके से पेश करेगी.

प्रश्न:- तीन साल पूरे होने पर एक बड़े अखबार ने सर्वे किया और उसने कहा कि 56 फीसदी लोग ये कह रहे हैं कि 2019 में नरेंद्र मोदी को 2014 से ज्यादा सीटें मिलेगी और यही बात अमित शाह ने भी कही है, आपको भी लगता है?

उत्तर:- ऐसा हुआ तो जनता का बहुत बड़ा आशीर्वाद होगा इस देश पर. इस देश को बदलने के लिए 5 साल बहत कम हैं. प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी जब शपथ ली थी तो 2022 तक का समय मांग था. एक ऑनरशीप की जरूरत हैं कि ये काम हमारा है और उस ऑनरशीप से अपनत्व से काम करने की जरूरत है. हर फिल्ड में लोग अपने-अपने डिपार्टमेंट की ऑनरशीप ले लें, अपना काम किसी और का काम न समझें. तो पूरा देश बदल जाएगा, इसमें थोड़ा समय लगेगा लेकिन ये होकर रहेगा.

प्रश्न:- जितने सर्वे पिछले 5 दिनों में आए उसमें एक बात साफ है कि 2019 में फिर से नरेंद्र मोदी सरकार बनाएंगे, आपको भी लगता हैं?

उत्तर:- एक विश्वास हमें भी है और उसी विश्वास के साथ हम काम कर रहे हैं. जिस पारदर्शिता से सरकार का हर मंत्री काम कर रहा है. सरकार में होने वाले सभी काम अभूतपूर्व है और जनता भी मानेगी कि अभूतपूर्व है सभी काम.

प्रश्न:- अगले 2 साल का क्या विजन है सरकार का?

उत्तर:- जो लक्ष्य अभी रखा हुआ है उसी लक्ष्य पर काम करना. अभी बहुत से टारगेट्स अचीव करने बाकी है. गांव, गरीब, किसान, युवा, महिला को समर्पित सरकार है और समर्पण के लिए हमें बहुत से लक्ष्य पूरे करने है. चाहे वो भ्रष्टाचार खत्म करना हो, शिक्षा हो. देश को और सुरक्षित करना. अंदर से भी और बाहर से भी. भ्रष्टाचार से खोखली जड़ों को खत्म करना हमारा लक्ष्य है.

प्रश्न:- दूरदर्शन की छवि एक सरकारी माध्यम की है तो इसे मार्केट फ्रेंडली और कॉम्पिटिटर कैसे बनाएंगे?

उत्तर:- कोई भी और चैनल 23 भाषाओं में कार्यक्रम नहीं दिखाते. हां अब ज़ी है, ज़ी के कई सारे रिज़नल चैनल हैं. आप वो रोल अदा कर रहे हैं. ऐसे ही एक आध और चैनल है जो ये रोल अदा कर रही है लेकिन बहुत बड़े रूप में ये दूरदर्शन है जो 23 बड़ी भाषाओं में मनोरंजन. खबरें सबकुछ दे रहा हैं लेकिन फिर भी दूरदर्शन को और भी बेहतर बनाना है.

प्रश्न:- नॉर्थ ईस्ट के लिए आप एक चैनल लॉन्च करने जा रहे हैं 'अरूण प्रभा' पहला एक्सपीरियंस अच्छा नहीं रहा. तो क्या सेफ-गार्ड लेंगे कि ये चैनल फेल न हो?

उत्तर:- मीडिया में जो अप एंड डाउन आता है उसी से पता चलता है कि लोगों की पसंद क्या है. डीडी किसान का हमारा वो ही फेज चल रहा है जिसे और बेहतर बनाना पड़ेगा. नॉर्थ ईस्ट में इतने सारे राज्य हैं और उन्हें सिर्फ दूरदर्शन प्रोग्राम दिखा रहा था. इस कारण से अरुण प्रभा चैनल लॉन्च किया है. 900 करीब सीरियल आएं हैं जिनमें से सेलेक्शन चल रहा है. तो हमारी पूरी कोशिश रहेगी कि उस क्षेत्र में बेहतर से बेहतर कार्यक्रम दिखाया जा सके. इसमें 50 प्रतिशत लोकल लोग वहां के कार्यक्रम बनाएंगे.

प्रश्न:- ऑल इंडिया रेडियो में कोई इम्प्रूवमेंट?

उत्तर:- ऑल इंडिया रेडियो के लिए हमारा जोर FM की तरफ है. देश में हमें 40 प्रतिशत से 65 प्रतिशत FM स्टेशन को बढ़ाना है एक से डेढ़ साल में.

प्रश्न:- FM का सेकेंड फेज था कहते हैं फेल हो गया?

उत्तर:- प्राइवेट कंपनी तुरंत निर्णय ले सकती है मार्केट के हिसाब से. लेकिन सरकार की कंपनी का निर्णय ऐसा होना चाहिए जिस पर कोई उंगली न उठा सके. ये एक बहुत जरूरी चीज हो जाती है सरकार के कार्यक्रम में. ऑक्शन के जो फेज़ेज चल रहे हैं उसके रेट 2011 में डीसाइड हुई थी उसको अभी बदल नहीं सकते इसलिए हम उसी ऑक्शन पर चल रहे हैं. इससे पहले जो ऑक्शन हुआ बहुत सफल हुआ. इस बार हम छोटे शहरों में गए और वहीं बेस प्राइस थी तो शायद इस वजह से वो सफल नहीं हो पाया.

प्रश्न:- DAVP में आपने काफी रेड टेप कम किया है लेकिन  (रेड्स विजन) का मामला दो साल से पेंडिंग है क्या लगता है जल्द सरकार कोई फैसला लेने वाली है?

उत्तर:- मुझे लगता है 1 से 2 महीने के अंदर फैसला हो जाएगा. मैंने फाइल को साइन कर दिया है वो वेंकैया जी के पास है वो तुरंत हो जाएगा. ये निर्णय 2011 में होना चाहिए था जो नहीं हुआ. उस समय के निर्णय को हम नहीं इम्पोज करना चाहते थे. मार्केट को ध्यान में रखते हुए हमने फिर से एक कमेटी बनाई और आज के रेट्स को ध्यान में रख कर निर्णय लिया गया है और जैसे ही ये पब्लिक डोमेन में आएगा तो रिजलन चैनल जिनकी TRP अच्छी है उनको बहुत लाभ मिलेगा.

प्रश्न:- सेंसर बोर्ड में कोई इम्प्रूवमेंट ला रहे हैं?

उत्तर:- सेंसर बोर्ड को हम ऑनलाइन लेकर आ गए हैं और सरकार का मत है कि वो डायरेक्ट इसमें इंवॉलमेंट नहीं रखती. हमने दो बॉडी बनाई है एक सेटिफिकेशन बोर्ड जो हर फिल्म को देखता है और उसको एक सेर्टिफिकेट देता है और एक है एप्लेट ट्राईब्यूनल यानी जिसको ये सेर्टिफिकेट पसंद न आए तो वो अपील कर सकता है एप्लेट ट्राईब्यूनल में, ये दोनों सरकार के बनाए हुए हैं. तो कुछ लोग जो आरोप लगाते हैं कि सरकार ये फिल्म नहीं दिखाना चाहती तो वो ऐसे ही गलत साबित हो जाते हैं. क्योंकि जिसको पीड़ा होती है वो एप्लेट ट्राईब्यून में अप्लाई करता है और सरकार उसे पास कर देती. ये ही एक सही सिस्टम है.

प्रश्न:- 2019 के चुनाव के लिए अमित शाह ने कहा कि ये चुनाव अखबार वो टीवी से नहीं लड़ा जाएगा. डिजिटल और मोबाइल पर लड़ा जाएगा?

उत्तर:- 1 लाख 70 हजार किलोमीटर अंडरग्राउंड फाइबर ऑप्लीकेबल बिछ चुका है पूरे देश के अंदर. कुछ एक प्राइवेट कंपनी भी हैं जो इस पर काम कर रही हैं. प्रधानमंत्री का विजन है डिजिटल इंडिया का जिससे हर चीज ट्रांसपेरिसी हो जाए.

प्रश्न:- सोशल मीडिया, ऑनलाइन मीडिया के मिस-यूज की बात चल रही है. खास कर कश्मीर में तो क्या इसको रेगुलेट करने के लिए कोई कानून बनाने का कोई इरादा रखते हैं?

उत्तर:- इंटरनेट जब बना था तो इसी कारण से बना था कि कोई सीमाएं न हो और आप इंफोर्मेंशन को नहीं रोक सकते इसलिए हमारी सरकार जल्दी से जल्दी  इंफॉर्मेशन को इंटरनेट पर ला देती है. यह मंत्रालय अपना काम तुरंत सोशल मीडिया पर डाल देता है ताकि सत्य जल्दी से जल्दी लोगों तक पहुंच जाए. रेगुलेशन सरकार नहीं करना चाहती और जब कश्मीर में होता तो वो बहुत लिमिटेड समय के लिए किया जाता है. वो सिर्फ गलत अफवाह को रोकने के लिए किया जाता है ताकि लोगों को हानी न पहुंचे.

प्रश्न:- केबल ऑपरेटर्स की मोनोपोली को आपने बहुत हद तक खत्म कर दिया है लेकिन कुछ राज्यों में अभी भी केबल पर कंट्रोल किए हुए हैं तो ये केबल माफिया को रोकने के लिए आप लोग कुछ कर रहे हैं?

उत्तर:- हमने सबसे बड़ा कदम उठाया डिजिटाईजेशन का पहले एनॉलॉग सिगनल आता था जिसका बिलिंग का कोई हिसाब नहीं होता था. आप पैसे के लिए केबल ऑपरेटर के ऊपर डिपेंड होते थे जितना वो बोलेंग उतना आपको पे करना पड़ता था अब डिजिटाईजेशन हो रहा है जिससे न केवल आपको लाभ होगा बल्कि ग्राहक को भी लाभ होगा. डिजिटल के अंदर क्वालिटी बेहतर हो जाएगी, (एसपेक्ट्रम) डिजीटल में कम्प्रेस हो जाता है जिससे हाईडेफिनेशन आप ब्रॉडकास्ट कर सकते हैं तो हर तरफ से लाभ है और केबल ऑपरेटर्स जो दुसरों को आने नहीं दे रहे उनका समाधान राज्य के सरकार को ही करना पड़ेगा.

प्रश्न:- आप अपने निर्वाचन क्षेत्र में क्या कर पाएं हैं?

उत्तर:- मैं हमेशा इसी अवसर में रहता हूं कि अपने क्षेत्र वालों के लिए अधिक से अधिक अवसर ले कर आऊं. मेरे क्षेत्र से कुछ राज्य मार्ग निकलते हैं जिसमें काफी सुधार आ गया, 17 फ्लाईओवर बने हैं, 22 फुट का ब्रिज बनवा रहे हैं ताकि दुर्घटना ना हो. गांव वाले एक जगह से दुसरी जगह जा सकें, युवाओं के लिए एक अलग से प्लेफॉर्म बनाया जा रहा है ताकि युवाओं की शाक्ति को जान सकें. खेलों और सेना में भर्ती के माध्यम से शारीरिक परीक्षण चल रहा है. अलग-अलग सोपोर्ट के ग्राउंड बन रहे हैं, 95 ग्राउंड में बना चुका हूं अपनी कॉन्सिटेंसी के अंदर, खेल मंत्रालय के मदद से करीब 10 करोड़ रुपए लेकर आया हूं ताकि बड़े स्टेडियम बन सके. गांव-गांव में टीमें बनी. मैं चाहता हूं हर गांव अपनी ताकत को पहचाने और एक दूसरे कि मदद करे.

प्रश्न:- अपके इलाके में डेवल्पमेंट एजेंडा को सहयोग करने में CM कितना सहयोग है?

उत्तर:- उनका विजन पूरे क्षेत्र के लिए अदभूत है. बेटी बचाओ कार्यक्रम जो केन्द्र सरकार है उसे तो सीएम साहिबा अपने पिछले कार्यकाल में भी उठा चुकी थी, उन्होंने भामाशाह कार्ड बनाया और अब उस कार्ड को उन्होंने इंशोरेंस से जोड़ दिया, मेडिकल फेसिलिटी से जोड दिया. पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन से जोड़ दिया. इस टेक्नोलॉजी के माध्यम से उन्होंने राज्य में करप्शन को कंट्रोल किया. पहले अलग-अलग विभाग सब पैसा खर्च करते थे पर काम कुछ नहीं होता था लेकिन उन्होंने सभी विभागों को जोड़ कर जो पैसा जमा हुआ है उस पैसे से काम हो रहे हैं जो अब दिख रहा है. वो चंबल का पानी राजस्थान के बाकी क्षेत्रों में लाने के बारे में सोच रही हैं.

प्रश्न:- क्या लगता है 2019 में जनता आपको दुबारा जीता के भेजेगी पार्लियामेंट में?

उत्तर:- अपनी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ना ये मेरा लक्ष्य रहता है. जितने मेरे विधायक हैं, कार्यकर्ता हैं वो इतनी बढ़िया टीम है जितनी मैं खुद भी नहीं बना सकता था.