धारा 370 खत्म करने पर बड़े पैमाने पर फैलेगी अशांति: फारूक अब्दुल्ला

स्वास्थ्य कारणों से फारूक अब्दुल्ला भले ही देश से दूर हैं, लेकिन तीन बार जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ नेता राज्य का विशेष दर्जा समाप्त करने के भाजपा के खतरनाक इरादों को लेकर चिंतित हैं और उनका मानना है कि ऐसा हुआ तो बड़े पैमाने पर अशांति पैदा होगी।

 धारा 370 खत्म करने पर बड़े पैमाने पर फैलेगी अशांति: फारूक अब्दुल्ला

लंदन : स्वास्थ्य कारणों से फारूक अब्दुल्ला भले ही देश से दूर हैं, लेकिन तीन बार जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे वरिष्ठ नेता राज्य का विशेष दर्जा समाप्त करने के भाजपा के खतरनाक इरादों को लेकर चिंतित हैं और उनका मानना है कि ऐसा हुआ तो बड़े पैमाने पर अशांति पैदा होगी।

पिछले चार दशक में यह पहला मौका है, जब सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस के 77 वर्षीय अध्यक्ष राज्य विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी का नेतृत्व नहीं कर पा रहे हैं। वह पिछले तीन महीने से किडनी के इलाज के सिलसिले में लंदन आए हुए हैं।यहां उन्होंने कहा, मैं एक बल्लेबाज हूं, जिसका इलाज चल रहा है, लेकिन मैदान पर वापस जाने के लिए बेताब हूं। उन्होंने बताया कि वह अगले वर्ष फरवरी से पहले स्वदेश नहीं लौट पाएंगे और उस समय तक राज्य विधानसभा के नवंबर-दिसंबर में होने वाले चुनाव हो चुके होंगे।

उन्होंने कहा, यकीन जानिए मेरी बड़ी चिंता संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के भाजपा के जाहिरा इरादों को लेकर है, जिससे हमारे राज्य को विशेष दर्जा मिला हुआ है और जिसके लिए महात्मा गांधी और भारत सरकार द्वारा वचन दिया गया था। अब्दुल्ला ने कहा, भाजपा अपना मकसद हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वह इस संवेदनशील राज्य में ध्रुवीकरण करेंगे, जैसा कि उन्होंने देश के बाकी हिस्सों में किया है। अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के गंभीर परिणामों के प्रति आगाह करते हुए उन्होंने कहा, युवाओं के जहन में बड़ी उथल पुथल मचेगी और हम कभी शांति नहीं पा सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में वरिष्ठ नेता ने कहा, मैं नहीं जानता कि वह अनुच्छेद 370 पर आरएसएस के हुक्म के खिलाफ जा पाएंगे। पूरे देश के लिए वह बहुत बड़ा दिन होगा, जब वह जम्मू और कश्मीर की जनता की दिल की धड़कनों को समझ पाएंगे। पृथकतावादी नेता सज्जाद लोन, जो हाल ही में मोदी से मिले थे, से नजदीकियां बढ़ाने की भाजपा की कोशिशों की आलोचना करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, जो लोग स्वतंत्र कश्मीर के कट्टर पैरोकार रहे हैं, भाजपा उनसे नजदीकियां बढ़ा रही है, क्या ये वही लोग नहीं हैं, जिन्होंने राज्य को जहन्नुम बना दिया?

फारूक अब्दुल्ला ने आगामी विधानसभा चुनावों को अति महत्वपूर्ण करार देते हैं कहा कि यह जम्मू कश्मीर के भविष्य का फैसला करेगा कि क्या राज्य को भारतीय संविधान के तहत स्वायत्तता मिली रहेगी या अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, लोगों से मेरी अपील है कि अतीत के सारे मतभेदों, सभी दुखों और सभी पीड़ाओं को भुला दें और उन ताकतों के खिलाफ मिलकर खड़ें हों जो कश्मीरियत को खत्म करने पर तुली हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस से चुनाव का बहिष्कार नहीं करने की अपील करते हुए कहा, बहिष्कार करने से हालात सुधारने में मदद नहीं मिलेगी बल्कि उन लोगों को ही मदद मिलेगी जो हमारे विशेष दर्जे को खत्म करा देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख एक राज्य है और उन्हें प्रदेश की भविष्य की प्रगति के लिए एक साथ खड़ा होना पड़ेगा।

उन्होंने कहा, मेरे हिंदू भाई नेशनल कांफ्रेंस के हिंदू, मुस्लिम, सिख इत्तेहाद के नारे को नहीं भूलें। अब्दुल्ला ने कहा, राज्य का धर्मनिरपेक्ष तानाबाना प्रभावित नहीं हो, यह बहुत अहम है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से इस अहम चुनाव में अपने बेटे और जम्मू कश्मीर के मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ खड़े होने का आह्वान किया।

जब फारूक अब्दुल्ला से पूछा गया कि वह उमर के कामकाज को कैसे आंकते हैं तो उन्होंने कहा, उन्होंने (उमर ने) गठबंधन सरकार में आने वाली सभी मुश्किलात के बीच अच्छा काम किया है। उन्होंने गंभीरता तथा समर्पण के साथ जनता की सेवा करने की कोशिश की है। वह ईमानदार और सच्चे हैं। उन्होंने पिछले दिनों राज्य में आई बाढ़ को अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा बताते हुए कहा, मेरा दिल इस आपदा के प्रभावित लोगों के साथ है। राज्य सरकार उनके पुनर्वास के लिए जो कर सकती है, कर रही है। मुझे पता है कि राज्य सरकार की कुछ आलोचना हुई है लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि उमर पूरी तरह राहत और पुनर्वास कार्यों में लगे हैं।

अब्दुल्ला ने कहा कि गठबंधन में सहयोगी दल कांग्रेस के साथ नेशनल कांफ्रेंस का अनुभव अच्छा और बुरा दोनों तरह का रहा है। उन्होंने कहा, सबसे बड़े अवरोध प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज रहे हैं, जिन्होंने हमेशा अड़चनें पैदा की हैं। चुनाव के बाद नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के फिर से एक साथ आने की किसी संभावना के सवाल पर उन्होंने कहा, वक्त ही बताएगा। अब्दुल्ला ने मुफ्ती मोहम्मद सईद की पीडीपी पार्टी की कटु आलोचना करते हुए उसे भाजपा का ‘ट्रोजन हॉर्स’ करार दिया। ‘ट्रोजन हॉर्स’ शब्द का उल्लेख प्राचीन शहर ट्रॉय में यूनानी सैनिकों के प्रवेश की एक पुरातन कथा में मिलता है जिसमें काठ के एक विशालकाय घोड़े में छिपकर यूनानी सैनिक ट्रॉय के बाहर पहुंचे थे और उस पर हमला किया था।

अब्दुल्ला ने दावा किया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा ने नेशनल कांफ्रेंस से मुकाबले के लिए पीडीपी को बनाया है। दरवाजे के पीछे वह भाजपा का ही हिस्सा है। यह भाजपा की बी टीम है। भाजपा के साथ अपनी पार्टी के किसी तरह के गठजोड़ की संभावना को खारिज करते हुए नेशनल कांफ्रेंस नेता ने कहा, हम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में राजग का हिस्सा थे। वह एक अलग तरह के व्यक्ति थे और वो वक्त अलग था। कश्मीर के व्यापक विषय पर बातचीत करते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि केन्द्र सरकार को पाकिस्तान के साथ वार्ता के माध्यम से समाधान निकालना होगा।

उन्होंने कहा, जम्मू कश्मीर, भारत और पाकिस्तान की जनता के सर्वश्रेष्ठ हितों की खातिर लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को सुलझाने के प्रयास होने चाहिए। दोनों पक्षों को लचीला होना होगा। कोई एक विजेता नहीं हो सकता।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सीमाएं नहीं बदल सकतीं और वाजपेयी तथा उनके बाद प्रधानमंत्री बने मनमोहन सिंह दोनों ने ही पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ सरहद में बदलाव नहीं होने के आधार पर समाधान निकालने की प्रक्रिया शुरू की थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मोदी सरकार से राज्य की स्वायत्तता को बहाल करने के विकल्प पर विचार करने का अनुरोध किया जिसके संबंध में उनके मुख्यमंत्री रहते राज्य विधानसभा ने प्रस्ताव पारित किये थे।

उन्होंने कहा, इस पर संसद में चर्चा हो। अगर कोई अनुबंध केंद्र-राज्य के संबंधों को कमजोर करता है तो उसे चर्चा के बाद हटाया जा सकता है। साथ ही अब्दुल्ला ने कश्मीर के दोनों हिस्सों के बीच सीमा को सभी के लिए खोलने की वकालत करते हुए कहा, वे (पीओके के लोग) देखें कि हमने कितनी प्रगति की है। अपने लंबे राजनीतिक कॅरियर में किसी बात का अफसोस होने के सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा, कई सारे अफसोस हैं। उन्होंने इस संबंध में उग्रवाद के दौरान विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों की घर वापसी नहीं करा पाने पर अफसोस जताया। अब्दुल्ला ने कहा, जब तक यह नहीं होता कश्मीर कभी पहले जैसा नहीं हो पाएगा। उन्होंने इंटरव्यू के आखिर में कहा कि वह स्वस्थ नहीं हैं लेकिन बेहतर भविष्य की लड़ाई के लिए जनता के साथ आने की उम्मीद करते हैं।