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जम्मू कश्मीर के अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित, लोगों से आतंकियों का डर भगाने की अपील

कश्मीर के लगभग सभी अख़बारों में प्रकाशित फुल पेज विज्ञापन में सरकार ने बंद के लिए आतंकवादियों और उनकी धमिकयों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

जम्मू कश्मीर के अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित, लोगों से आतंकियों का डर भगाने की अपील

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) प्रशासन ने शुक्रवार को स्थानीय अखबारों में एक फुल पेज का विज्ञापन जारी किया, जिसमें लोगों से आग्रह किया गया है कि वे अपना सामान्य कामकाज फिर से शुरू करें, आतंकियों की धमकियों से बिल्कुल भी नहीं डरें. सरकार मानती है कि आतंकवादियों के खतरों को देखते हुए स्थानीय लोगों ने अनुच्छेद 370 को रद्द करने के केंद्र के फैसले के बाद कश्मीर में बंद है. यह स्पष्ट नहीं है कि यह डर है या गुस्सा है, या दोनों ने कश्मीर को बंद कर रखा है.  

कश्मीर के लगभग सभी अख़बारों में प्रकाशित फुल पेज विज्ञापन में सरकार ने बंद के लिए आतंकवादियों और उनकी धमिकयों को ज़िम्मेदार ठहराया है. विज्ञापन में लिखा है, '70 वर्षों से जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के लोगों को गुमराह किया गया है. वे एक प्रोपेगैंडा के शिकार हुए हैं, जिसने उन्हें आतंकवाद, हिंसा, विनाश और गरीबी में फंसा दिया है. हालांकि सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों को फिर से खोल दिया है, लेकिन छात्र दूर रह रहे हैं जबकि दुकानदारों ने अपनी दुकानों को सुबह और शाम खोला और दिन में बंद रखा.

यह विज्ञापन कहता है, 'अलगावादी नेताओं ने अपने बच्चों को हिंसा, पथराव और उत्पीड़न से दूर रखा और उन्हें इस जगह से बाहर भेजकर मुस्तकबिल बना रहे हैं. आम लोगों के बच्चों को हिंसा, पथरबाज़ी और आतंकवाद में धकेलने के लिए उनको उकसाया है. आज भी आतंकी ऐसा ही कर रहे हैं.' 

विज्ञापन कहता है, 'हम आज चौराहे पर हैं, क्या हम आज भी धमकियों और जबरदस्ती की आतंकियों की दशकों पुराणी रणनीति को चलने देंगे. या फिर यह फैसला लेंगे जो हमारे लिए अच्छा होगा. यह निर्णय हमें लेना होगा.' 'क्या हम कुछ पोस्टरों और धमकियों से हमारे व्यवसायों को फिर से शुरू नहीं करेंगे, क्या हम अपने लिए रोज़गार नहीं कमाएंगे, क्या हम अपने बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य नहीं चुनेंगे, हम हमारे कश्मीर के विकास को खिलने नहीं देने देंगे.'

सरकार ने कहा कि कश्मीर के लोगों को घाटी की भलाई के बारे में सोचना होगा. यह हमारा घर है. हम इसकी भलाई और समृद्धि के बारे में सोचें. भय क्यों? विज्ञापन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व मुख्य्मंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी ने उनके ट्विटर हैंडल के माध्यम से सरकार पर निशाना साधा है. ट्वीट में लिखा है, 'ग्रेटर कश्मीर के लिए एक फ्रंट पेज के विज्ञापन में राज्य व्यवस्थापक की दलील पर गौर करें. 5 अगस्त से बंद के बावजूद कश्मीरियों ने विरोध प्रदर्शनों के तोर पर सिविल कर्फ्यू का दृढ़ संकल्प लिए हैं. यदि सरकार वास्तव में लोगों की परवाह करती है, तो वह पहले टेलिकॉम प्रतिबंध हटाए.'