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मुझे नहीं पता था कि मेरा कार्यकाल PM मोदी के साथ-साथ चलेगा: अरविंद पनगढ़िया

पूर्ववर्ती योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया की तरह पनगढ़िया को भी कैबिनेट का दर्जा हासिल था. लेकिन वह आहलूवालिया की तरह कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं होते थे. पनगढ़िया 31 अगस्त को नीति आयोग से विदाई लेंगे. उनके स्थान पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री राजीव कुमार को आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

मुझे नहीं पता था कि मेरा कार्यकाल PM मोदी के साथ-साथ चलेगा: अरविंद पनगढ़िया
पनगढ़िया को 2015 में नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर अध्यापन क्षेत्र में वापस लौटने की घोषणा करने वाले अरविंद पनगढ़िया का कहना है कि इस पद पर आने के समय उन्हें यह नहीं पता था कि उपाध्यक्ष का पद सरकार के साथ-साथ चलता है. साथ ही उन्होंने इन चर्चाओं को भी खारिज किया कि सत्ता के दो केंद्र होने के चलते उन्होंने आयोग को अलविदा कहा है. 64 वर्षीय पनगढ़िया ने कई उदाहरण देकर कहा कि पश्चिमी विश्वविद्यालय अवकाश नहीं बढ़ाने को लेकर काफी सख्त हैं. इसी वजह से उन्हें कोलंबिया विश्वविद्यालय वापस लौटने का फैसला करना पड़ा. हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय चाहता था कि वह 2019 तक इस पद पर बने रहें.

पहले उपाध्यक्ष

पनगढ़िया से पूछा गया कि यदि उन्हें नियमों के बारे में पता था तो क्यों नहीं उन्होंने सरकार को स्पष्ट किया कि उन्हें अध्यापन में वापस लौटना होगा. इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं बताया गया था कि उनका कार्यकाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के साथ चलेगा. पनगढ़िया को 2015 में नीति आयोग का पहला उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था.

फोन पर बताया उपाध्यक्ष पद पर बैठूंगा

उन्होंने कहा कि , ‘‘मैं नहीं जानता था कि मेरा कार्यकाल सरकार के साथ साथ चलेगा. क्या इस बारे में कोई पत्र है?’’ पनगढ़िया ने बताया कि पीएमओ से फोन आने के बाद उन्होंने इस पद पर नियुक्ति को स्वीकार किया था. उन्होंने कहा कि फोन पर मुझे बताया गया कि मैं उपाध्यक्ष पद पर बैठूंगा. इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं जानता. मैं यह काम करना चाहता था इसलिए मैंने जिम्मेदारी को स्वीकार किया.

सत्ता के दो केंद्र

योजना आयोग को भंग करने के बाद गठित नीति आयोग में पनगढ़िया पहले उपाध्यक्ष हैं. उन्होंने इन खबरों का खंडन किया कि आयोग में सत्ता के दो केंद्र होने की वजह से वह पद छोड़ रहे हैं. यह पूछे जाने पर कि सरकार की अन्य शाखाओं के साथ कई अवसरों पर मतभेद होने की वजह से क्या वह पद छोड़ रहे हैं, पनगढ़िया ने कहा, ‘‘नहीं, नहीं, नहीं.’’ उन्होंने इस खबरों को भी खारिज किया कि आयोग में सत्ता के दो केंद्र हैं.  ‘‘आप जाकर मेरे स्टाफ से बात कर सकते हैं.’’ नीति आयोग की तरह पूर्ववर्ती योजना आयोग के मुखिया भी प्रधानमंत्री होते थे. इसमें भी एक उपाध्यक्ष होता था. लेकिन योजना आयोग में मुख्य कार्यकारी अधिकारी या सीईओ नहीं था.

कैबिनेट का दर्जा

पूर्ववर्ती योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया की तरह पनगढ़िया को भी कैबिनेट का दर्जा हासिल था. लेकिन वह आहलूवालिया की तरह कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं होते थे. पनगढ़िया 31 अगस्त को नीति आयोग से विदाई लेंगे. उनके स्थान पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री राजीव कुमार को आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है.