अजित पवार ने पुणे की जमीन के सौदा को लेकर अपनी सफाई दे दी है, जिसमें उनके बेटे पार्थ पवार का नाम आया है, लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पर निशाना साधा है.
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Pune Land Row: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार (Ajit Pawar) ने अनियमितताओं के आरोपों के बाद अपने बेटे पार्थ पवार (Parth Pawar) से जुड़े पुणे के एक विवादास्पद जमीन सौदे को रद्द करने की पुष्टि की है. ये सौदा पुणे के मुंधवा इलाके में 40 एकड़ सरकारी जमीन से जुड़ा था, जिसकी कीमत तकरीबन 1800 करोड़ रुपये थी और जिसे कथित तौर पर 300 करोड़ रुपये में बेचा जा रहा था. ये जमीन कथित तौर पर सरकारी संपत्ति थी, जिससे इसकी बिक्री अवैध हो गई.
अजित पवार ने की सफाई
अजित पवार ने साफ किया कि उनके बेटे और उनके बिजनेस पार्टनर दिग्विजय पाटिल (Digvijay Patil) को इस बात की जानकारी नहीं थी कि ये जमीन सरकारी है. उन्होंने कहा कि जमीन की बिक्री के रजिस्ट्रेशन और जिम्मेदार लोगों की जांच एडिशनल चीफ सेक्रेटरी विकास खड़गे (Vikas Kharge) करेंगे, जिनके एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने की उम्मीद है. पवार ने कहा कि समझौता रद्द कर दिया गया है, कोई धन का लेन-देन नहीं हुआ है और इसकी पुष्टि करने वाले हलफनामे अधिकारियों को सौंप दिए गए हैं.
"मेरे दफ्तर का कोई रोल नहीं"
ट्रांस्पेरेंसी पर जोर देते हुए, पवार ने कहा कि न तो उनकी और न ही उनके दफ्तर की इस सौदे में कोई भूमिका थी और न ही इसकी कोई जानकारी थी. उन्होंने कहा, "मैंने अपने 35 साल के राजनीतिक जीवन में कभी किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है." उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वो दबाव में न आएं, भले ही कोई उनके नाम का दुरुपयोग करे, और मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का समर्थन किया.
सीएम फडणवीस का बयान
विवाद के बाद, राज्य सरकार ने एक सब-रजिस्ट्रार को सस्पेंड कर दिया और एक कंपनी साझेदार और एक सरकारी अधिकारी सहित 3 लोगों के खिलाफ एफआईर दर्ज की. सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने पुष्टि की कि जांच चल रही है और अनियमितताएं साबित होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
राहुल गांधी ने साधा निशाना
राजनीतिक प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सरकार पर दलितों के लिए आरक्षित जमीन को एक मंत्री के परिवार को "औने-पौने दामों" पर बेचने का आरोप लगाया और इसे "जमीन की चोरी" करार दिया. पवार ने लीगैलिटी और जवाबदेही को लेकर अपना कमिटमेंट दोहराते हुए कहा कि जिनके पास सबूत हैं, उन्हें जांच समिति को सौंपना चाहिए ताकि सही प्रक्रिया के जरिए सच्चाई सामने आ सके.
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ZEE मीडिया ने उठाया था मुद्दा
अब हम ZEE मीडिया की इस बड़ी खबर के असर का विश्लेषण करेंगे. जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया. ये बड़ी खबर एक जमीन घोटाले से जुड़ी है, जिसमें राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम जोड़ा जा रहा है . सबसे पहले हम आपको इस घोटाले से जुड़ी डीटेल्स बताते हैं ताकि आप लैंड डील में हुए इस कथित फर्जीवाड़े को समझ सकें .
जमीन की डील से जुड़े राजनीतिक तार
आरोपों के मुताबिक अमीडिया नाम की कंपनी ने पुणे में एक जमीन खरीदी थी . इस कंपनी से अजित पवार के बेटे पार्थ पवार भी जुड़े हैं . कंपनी ने एक डिजिटल पार्क बनाने के लिए 40 एकड़ जमीन खरीदी थी . पहला आरोप ये है कि जो जमीन खरीदी गई वो सरकार की थी यानी वो कंपनी को बेची नहीं जा सकती थी . दूसरा आरोप है कि जमीन की मार्केट वैल्यू तकरीबन 1800 करोड़ रुपए थी जबकि जमीन की डील सिर्फ 300 करोड़ रुपए में हुई . तीसरा और सबसे बड़ा आरोप राजस्व की चोरी का है . इल्जाम है कि 300 करोड़ की डील की रजिस्ट्री सिर्फ 500 रुपए में की गई . इस रजिस्ट्री के लिए औद्योगिक नीति के प्रावधान का गलत इस्तेमाल किया गया.
#DNAWithRahulSinha | 300 करोड़ की जमीन.. स्टांप ड्यूटी सिर्फ 500, पुणे में जमीन घोटाले का मामला सामने आया..#DNA #Pune #LandScam | @RahulSinhaTV pic.twitter.com/0ClCESJ2LR
— Zee News (@ZeeNews) November 7, 2025
डील करनी पड़ी रद्द
ज़ी मीडिया ने सबसे पहले इस घोटाले का पर्दाफाश किया. ज़ी मीडिया की इस ख़बर का असर ये हुआ कि सरकार को पूरी डील ही रद्द करनी पड़ी. जमीन खरीद में फर्जीवाड़े के ज़ी मीडिया के ख़ुलासे के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस ने जांच के आदेश दिए . इस कथित घोटाले की इंवेस्टिगेशन के लिए स्पेशल टीम बनाई गई है जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी . डील में शामिल एक सरकारी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया और जैसा कि हमने आपको बताया, डील को भी कैंसिल कर दिया गया है . चूंकि घोटाले से अजित पवार के बेटे का नाम भी जोड़ा गया है तो ये मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में गूंजने लगा है . पवार फैमिली से ताल्लुक रखने वाली सुप्रिया सुले ने मामले की जांच की मांग की है तो अजित पवार कह रहे हैं कि डील से उनका कोई लेना देना नहीं .
खूब हुई अनियमितताएं
इस कथित घोटाले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य रजिस्ट्री से ही जुड़ा है . ये समझ से परे हैं कि आखिर किस आधार पर 300 करोड़ रुपए की जमीन की रजिस्ट्री 500 रुपए में की गई . अगर आप महाराष्ट्र में रजिस्ट्री का गुणा-गणित देखेंगे तो आपको इस मामले में की गईं अनियमितताएं अपने आप समझ में आ जाएंगी .
500 रुपए में रजिस्ट्री कैसे हुई?
पुणे के रजिस्ट्री नियमों के हिसाब से देखें तो 300 करोड़ की जमीन पर तकरीबन 21 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी भरनी होती है . अगर प्रोजेक्ट को सरकारी नीतियों के तहत छूट मिलती है. तब भी स्थानीय टैक्स के हिसाब से तकरीबन 6 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती है लेकिन इस मामले में सिर्फ 500 रुपए में रजिस्ट्री कर दी गई .
भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जंग जारी
आरोपों को देखें तो पता चलता है कि इस लैंड डील में बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन किया गया है . इसी वजह से सरकार ने फौरन कार्रवाई शुरु कर दी है . हम आपको बता दें कि सिस्टम में ऐसे गड़बड़झाले के खिलाफ ज़ी मीडिया की मुहिम लगातार जारी रहेगी.
(इनपुट-टीम डीएनए)