अजित पवार इन 2 बिंदुओं पर अभी भी जीत सकते हैं, ऐसा हुआ तो शरद पवार को दे देंगे पटखनी!

अजित पवार के व्हिप को सिर्फ दो बिंदुओं पर कानूनी वैधता हासिल हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अजित पवार के व्हिप को मान्यता मिलती है तो शरद पवार की ओर से किए गए सारे प्रयासों पर पानी फिर जाएगा.

अजित पवार इन 2 बिंदुओं पर अभी भी जीत सकते हैं, ऐसा हुआ तो शरद पवार को दे देंगे पटखनी!
देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में क्या भतीजा अजित पवार चाचा शरद पवार की ताकत को हरा पाते हैं या नहीं.

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में रातोंरात बड़ा उलटफेर के बाद अचानक मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फडणवीस की सरकार को बचाने के लिए बीजेपी हरसंभव कोशिशों में जुटी है. एक तरफ कानूनी दांव-पेच पर पार्टी विचार करने में जुटी है, दूसरी तरफ नितिन गडकरी, पीयूष गोयल जैसे केंद्रीय मंत्रियों से लेकर पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव और सांसदों की टीम को विधायकों से संपर्क के लिए मोर्चे पर लगाया गया है. इस बीच कानूनी विशेषज्ञ का कहना है कि आगे चलकर फ्लोर टेस्ट के दौरान भी विवाद पर मामला सुप्रीम कोर्ट जा सकता है. अजित पवार (Ajit Pawar) के व्हिप (Whip) को सिर्फ दो बिंदुओं पर कानूनी वैधता हासिल हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अजित पवार (Ajit Pawar) के व्हिप (Whip) को मान्यता मिलती है तो शरद पवार की ओर से किए गए सारे प्रयासों पर पानी फिर जाएगा.

अजित पवार और जयंत पाटिल दोनों ने व्हिप जारी किया तो...
संवैधानिक मामलों के जानकार और सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ने कहा, 'फ्लोर टेस्ट के दौरान यदि अजित पवार (Ajit Pawar) और जयंत पाटिल (नए विधायक दल नेता) दोनों ने व्हिप (Whip) जारी कर दिया तो बहुमत की संख्या में विवाद के साथ दलबदल का मामला भी बनेगा. उस स्थिति में स्पीकर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. बहुमत, स्पीकर का चुनाव और दलबदल जैसे मामलों पर विवाद की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट में अगले राउंड में फिर से मामला आ सकता है.'

विराग गुप्ता ने आगे कहा, 'अजित पवार (Ajit Pawar) के व्हिप (Whip) को दो बिंदुओं पर वैधता मिल सकती है. मसलन, शरद पवार ने उन्हें विधायक दल के नेता के पद से हटाया है मगर पार्टी से नहीं हटाया है. दूसरी तरफ तीन दलों द्वारा जिस महाविकास अघाडी गठबंधन की सरकार बनाने की बात की जा रही है, उसके नेता के बारे में औपचारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट को नहीं बताया गया.'

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एनसीपी के कुल 54 विधायक हैं. अगर स्पीकर ने अजित पवार (Ajit Pawar) का व्हिप (Whip) माना तो फिर उनके फैसले के खिलाफ जाने वाले 53 अन्य विधायकों के वोट निरस्त हो जाएंगे. जिससे बहुमत के लिए आंकड़ा 118 रह जाएगा. इतने विधायकों का बंदोबस्त फिलहाल बीजेपी के पास है. बीजेपी के पास अपने 105 और 13 निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है. देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में पिछले दिनों हुई बैठक में 118 विधायक मौजूद रहे हैं.

बीजेपी के नेताओं का मानना है कि शपथ से पहले अजित पवार (Ajit Pawar) ने विधायक दल के नेता की हैसियत से समर्थन पत्र दिया था, इस नाते कानूनी पेच नहीं फंसता. महाराष्ट्र में सरकार तो बन गई, पर क्या स्थिर रह पाएगी, इस सवाल पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने आईएएनएस से कहा, 'अजित पवार (Ajit Pawar) विधायक दल के नेता की हैसियत से बीजेपी को समर्थन दिए, जिससे बीजेपी के विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने, कहीं कोई रोड़ा नहीं है. सदन में पार्टी बहुमत साबित करके रहेगी.'

विधायकों से इस्तीफे दिलाने की भी रणनीति
कर्नाटक में जिस तरह से 'ऑपरेशन कमल' चलाकर बीजेपी ने विरोधी दलों के विधायकों से इस्तीफे दिलाकर बहुमत के आंकड़े को कम कर पूर्व में सरकार बनाई, उस रणनीति पर भी महाराष्ट्र में बीजेपी काम कर सकती है. सूत्र बता रहे हैं कि दलबदल कानून से बचने के लिए किसी पार्टी के दो-तिहाई विधायकों का टूटना जरूरी है. ऐसे में तीनों दलों के कई विधायकों से इस्तीफे दिलाकर बीजेपी बहुमत के आंकड़े को इतना करीब लाना चाहेगी, जहां तक वह पहुंच सके. हालांकि बीजेपी के लिए यह बहुत आसान नहीं है.

इनपुट: IANS

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