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DNA एक्सक्लूसिव: सुधीर चौधरी के सवाल, गृहमंत्री अमित शाह के जवाब, पढ़ें पूरा इंटरव्यू

केंद्रीय गृहमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ZEE न्यूज के एडिटर इन-चीफ सुधीर चौधरी साथ खास बातचीत की.

DNA एक्सक्लूसिव: सुधीर चौधरी के सवाल, गृहमंत्री अमित शाह के जवाब, पढ़ें पूरा इंटरव्यू
गृहमंत्री शाह ने महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनाव, धारा 370 समेत कई मुद्दों पर बात की.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amit shah)ने ZEE न्यूज के एडिटर इन-चीफ सुधीर चौधरी साथ खास बातचीत की. गृहमंत्री शाह ने महाराष्ट्र-हरियाणा विधानसभा चुनाव, धारा 370, एनआरसी, राम मंदिर और यूनिफॉर्म सिविल कोड समेत कई मुद्दों पर खुलकर बात की. पढ़ें पूरा इंटरव्यू:

सवाल-हरियाणा-महाराष्ट्र का चुनाव आसान रहने वाला है?
शाह:
 दोनों राज्यों में बीजेपी दो-तिहाई बहुमत से जीतेगी. पांच साल में दोनों सरकारों ने भ्रष्टाचार विहीन शासन दिया. दोनों पहली बार सीएम बने और विकास को आगे बढ़ाया. मोदी सरकार ने विकास के कामों के लिए भरपूर पैसा दिया. महाराष्ट्र के हर गांव में विकास का काम पहुंचा है. हरियाणा में मनोहर लाल ने क्षेत्रवाद, जातिवाद को खत्म किया. दोनों राज्यों के चुनाव में अनुच्छेद 370 हटने का भी प्रभाव है. दुनिया में भारत के बढ़ते सम्मान का भी प्रभाव पड़ रहा है. दोनों राज्यों में मोदी सरकार के अच्छे कामों का प्रभाव पड़ेगा. महाराष्ट्र-हरियाणा में दो-तिहाई बहुमत से जीत पर निश्चिंत हैं.

सवाल: हरियाणा में जाट और महाराष्ट्र में मराठा राजनीति के प्रभाव को तोड़ा ?
शाह:
 जाटों का आज भी बीजेपी सरकार में सम्मानपूर्वक स्थान है. मराठा समाज का भी महाराष्ट्र में सम्मानजनक स्थान है. मराठा नेताओं ने मराठा समाज को आरक्षण नहीं दिलाया. फड़णवीस की अगुवाई वाली बीजेपी 
सरकार ने ये काम किया. महाराष्ट्र-हरियाणा में समाज के हर हिस्से को साथ लेकर चले. 

सवाल: विपक्ष चुनाव में CBI-ED के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है ?
शाह: बदले की कार्रवाई होती तो पहले 5 साल में क्यों नहीं करते. कई सारे मामले हमारे सरकार से पहले के हैं, जांच जारी है. जांच पूरी होती है तो कानून अपना काम करता है. कानूनी कार्रवाई को बदला नहीं कहा जा सकता है. महाराष्ट्र में बैंक वाला केस तो हाईकोर्ट का आदेश है. कांग्रेस-NCP के नेता इकबाल मिर्ची पर सफाई दें. इकबाल मिर्ची की पत्नी के साथ कारोबार की जानकारी दें. अगर गलत हैं तो बताएं कि कोई समझौता नहीं किया. प्रफुल्ल पटेल ने समझौते के बारे में कुछ नहीं कहा. कांग्रेस-NCP के नेता इकबाल मिर्ची पर सफाई दें. 

सवाल: क्या प्रफुल्ल पटेल वाले मामले में देशद्रोह का एंगल है?
शाह:
 जांच एजेंसी मामले में हर पहलू की जांच करे. उनके कारोबारी संबंध मुंबई धमाके के आरोपी की पत्नी से हैं. आरोपी की पत्नी के साथ उनका समझौता रहा है. इकबाल मिर्ची की पत्नी के साथ समझौता हजम नहीं होता. 

सवाल: शरद पवार का आपने सम्मान किया, फिर आरोप क्यों?
शाह:
 जांच किसी को निशाना बनाकर नहीं की जाती है. तथ्य और दस्तावेजों के आधार पर जांच होती है. आज भी शरद पवार को ED ने दोषी नहीं माना है. हां, एक प्रश्न चिन्ह शरद पवार पर जरूर लगा है
शरद पवार पर हाईकोर्ट के आदेश पर FIR हुई है. सार्वजनिक जीवन में जन्मदिन पर बधाई देना गलत नहीं है. अच्छे काम की तारीफ करना कोई गलत बात नहीं है. 

सवाल: महाराष्ट्र में शिवसेना आपके लिए चुनौती है, ये कैसी दोस्ती है?
शाह:
 महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़णवीस की अगुवाई में चुनाव लड़ा जा रहा है. सरकार बनने के बाद फड़णवीस ही राज्य के मुख्यमंत्री होंगे.

सवाल: फड़णवीस उपमुख्यमंत्री पद शिवसेना को देने के लिए तैयार हैं?
शाह:
 वो परिणाम के बाद की बात है. परिणाम आने के बाद ही बात होगी.  

सवाल: अनुच्छेद 370 हटाना आजाद भारत का सबसे बड़ा फैसला था? 
शाह: 
ये मेरे लिए सौभाग्यपूर्ण दिन और क्षण था. अनुच्छेद 370 हटाने के लिए बिल पेश करना सौभाग्य की बात है. इसे हटाने का फैसला देश के प्रधानमंत्री ने लिया, कैबिनेट ने लिया. इस विभाग का मंत्री होने के नाते मैंने बिल पेश किया. बचपन के नारे को मूर्त रूप देने के वक्त मैं देश का गृहमंत्री था. एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं रहेंगे. 

देखें पूरा इंटरव्यू:

 

सवाल: अनुच्छेद 370 पर फैसले की इनसाइड स्टोरी क्या थी?
शाह: कोई इनसाइड स्टोरी नहीं होती है, एक योग होता है. अनुकूल स्थिति की अनुभूति होने पर ऐसे फैसले लिए जाते हैं. देश की जनता ने हमें 300 से ज्यादा सीटें दी थीं. देश की स्थिति अनुकूल होते ही मोदी जी ने फैसला लिया. 

सवाल: अनुच्छेद 370 हटाने की पूरी तैयारी किस तरह की? 
शाह: जो देश के भले की सोचते हैं वो इस बिल के साथ होने थे. जो वोट बैंक की राजनीति करते हैं, वो इसके खिलाफ होने थे. दो खेमे बहुत स्पष्ट थे, ढेर सारी पार्टियां जो साथी नहीं हैं. जैसे नायडू जी, मायावती जी की केजरीवाल जी की पार्टी. ये सब चुनाव में खिलाफ़ थीं लेकिन 370 पर साथ दिया. ढेर सारे लोगों ने अपनी पार्टी की बात ना मानकर वोट दिया. दोनों सदनों में दो तिहाई से ज्यादा बहुमत से बिल पास हुआ.  

सवाल: आपने नोटिफिकेशन की भी तैयारी की हुई थी?
शाह: नोटिफिकेशन नहीं, कॉन्स्टीट्यूशन ऑर्डर था जो संसद में रखा. संसद ने उसका अनुमोदन किया, ये एक संवैधानिक प्रक्रिया है.  

सवाल: 35A के साथ-साथ अनुच्छेद 370 भी हटाना कैसे संभव?
शाह: अनुच्छेद 370 और 35A साथ नहीं हटाते तो काम अधूरा रहता. अनुच्छेद 370 के इस्तेमाल से पाकिस्तान ने भ्रांति खड़ी की थी. युवाओं में अलगाववाद, आतंकवाद, आज़ादी की भ्रांति खड़ी की थी. 35A अन्याय की धारा थी जिसने कश्मीर का विकास रोका था. 370 ने भ्रष्टाचार को हवा दी, आतंकवाद को खुला मैदान दिया. ये दोनों साथ नहीं हटाते, तो मैं नहीं मानता कि काम पूरा होता. 

सवाल: 71-72 दिन हो चुके हैं, हालात सामान्य हैं या नहीं?
शाह: हालात सामान्य हैं, 196 में सिर्फ 6 थानों में धारा 144 है. जम्मू-कश्मीर के एक भी थाना क्षेत्र में कर्फ्यू नहीं है. सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम के लिए पुलिस की इजाज़त लेनी है. ये धारा 144 तो देश के कई सारे थानों में आज भी होगी. सारे लैंडलाइन फोन चालू हैं, सारे मोबाइल फोन चालू हैं. सेब देशभर की मंडियों में पहुंच चुके हैं, आवागमन चालू है. सामान्य परिस्थिति की व्याख्या कोई समझाए कि किसे कहते हैं?
मैं मानता हूं परिस्थिति सामान्य है और अच्छे से चल रहा है. 

सवाल: इसके बाद और होम वर्क करने की जरूरत नहीं है? 
शाह: कश्मीर में पाकिस्तान की हरकतें खत्म न होने तक अलर्ट. सरकार, सेना और सशस्त्र बलों को अलर्ट रहना ही चाहिये. पाकिस्तान को लेकर कश्मीर में जो भ्रांति थी, वो खत्म. आज़ादी और स्वायत्तता के समर्थन की भ्रांति खत्म हुई. 

सवाल - 3 पूर्व मुख्यमंत्री हिरासत में हैं, तो प्रक्रिया लोकतांत्रिक कैसे?
शाह: आप पूछते हो तो मैं सुन भी रहा हूं, जवाब भी दे रहा हूं. कांग्रेस, एनसी, पीडीपी पूछते हैं तो मैं उनसे पूछता हूं. 11 साल तक शेख अब्दुल्ला को जेल में रखा गया था. इस दौरान तो अनुच्छेद 370 को भी नहीं हटाया था. 3 साल ऐसे थे, जिनमें 250 दिन से ज्यादा कर्फ्यू रहा. आज कर्फ्यू नहीं है तो उन्हें हालात सामान्य नहीं दिख रहे. मोबाइल 1995 में आया, कश्मीर में हम 2003 में ले गये. हमने 2 महीने बंद रखा तो सामान्य परिस्थिति नहीं लगती? कांग्रेस को कोई अधिकार ही नहीं है मुद्दे उठाने का. कांग्रेस के समय 40 हज़ार लोग मारे गए, हमें क्या पूछते हैं? कश्मीर में युवाओं की 3 पीढ़ियों की शिक्षा बर्बाद हो गई. विकास धरा रह गया, भ्रष्टाचार हुआ, जिम्मेदार कौन है? कांग्रेस पार्टी और एनसी ही जिम्मेदार हैं इसके लिए. 

सवाल - तीनों पूर्व मुख्यमंत्री प्लानिंग में क्या बाधा डाल सकते हैं?
शाह: भावनाएं भड़काना सरल होता है, लेकिन फ़ैसला लिया है. एहतियातन कुछ वक्त बाहर निकलने से रोकना ग़लत नहीं. कई जगह ऐसा हुआ है, बादल साहब कई महीने जेल में रहे. कांग्रेस ने 19 महीने पूरे विपक्ष को जेल में डाल दिया था. कांग्रेस हमसे सवाल कर रही है, उसे अपना अतीत याद नहीं? 370 हटाकर देश की एक बहुत पुरानी समस्या खत्म की. हमने तो एहतियातन उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया है. उन्होंने तो पीएम की कुर्सी बचाने लाखों को जेल में डाला. मीडिया की आज़ादी छीनने वाली कांग्रेस हमसे सवाल न पूछे. 

सवाल- नया व्यक्ति तरीके से चीज़ें देखता है तो फ़ैसलों में मदद मिलती है?
शाह: मुख्य चीज फ़ैसला होता है. प्रधानमंत्री ने फैसला लिया, मेरा काम लागू करना था. ये टीम वर्क होता है, किसी एक व्यक्ति का नहीं होता. 

सवाल - पुराने गृह मंत्री डर जाते होंगे? पीएम दबाव में आ जाते होंगे? 
शाह: ऐसा कहना ठीक नहीं, मोदी जी ने कठोर फ़ैसला लिया. आज़ादी के 70 साल बाद बड़े हौसले से फ़ैसला. मुझे इस बात का आनंद है कि आज कश्मीर में शांति है. पूरी दुनिया कश्मीर के मामले पर भारत के साथ है. विश्व का समर्थन मोदी जी की बड़ी कूटनीतिक विजय है.  

सवाल: अब PoK के बारे में सोचेंगे, अक्साई चिन के बारे में सोचेंगे?
शाह: मैंने ऐसा कोई वादा नहीं किया था. मैंने 1994 में संसद के रिजॉल्यूशन की याद दिलाई थी. जम्मू-कश्मीर शब्द के अंदर ही PoK और अक्साई चिन है. ये देश की संसद का रिजॉल्यूशन है. 

सवाल: 1994 के रिजॉल्यूशन पर अब आप कुछ काम करेंगे? 
शाह: ऐसी चीजें इस तरह के साक्षात्कार में तय नहीं होती हैं. इस तरह की बातें मैं सार्वजनिक नहीं कर सकता हूं. जब फैसला होगा, तब मैं जरूर बता दूंगा. 

सवाल: जम्मू-कश्मीर को 100% सामान्य होने में कितना समय लगेगा? 
शाह: जम्मू-कश्मीर में 100% सामान्य हालात हैं. आज सामान्य परिस्थिति है जम्मू-कश्मीर में, वहां जाने के लिए कोई इजाजत लेने की जरूरत नहीं है. हर जगह से कर्फ्यू हट चुका है, टेलीफोन लाइनें चालू हैं. मोबाइल चालू है, कारोबार भी हो रहा है. 

सवाल: आप इन तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी रिहा कर सकते हैं? 
शाह: वो सुरक्षा एजेंसियों का काम है. समीक्षा कर जब भी फैसला करेंगे रिहाई हो जाएगी. 

सवाल: भ्रष्टाचार पर पिछली सरकार के कामकाज को कैसे देखें? 
शाह: ढेर सारे आरोपों पर FIR उन्हीं की सरकारों के वक्त हुई. इसमें कोई राजनीतिक बदले की भावना नहीं है. राजनीतिक बदले की कार्रवाई होती तो पहले कार्यकाल में होता. जांच एजेंसियां सही तरीके से जांच कर रही हैं. कोर्ट के सामने सारे कागजात रखे जा रहे हैं. बदले की कार्रवाई है तो कोर्ट में जाने की आज़ादी सबको है. क्या कोर्ट भी राजनीतिक बदले की कार्रवाई करता है? क्या, कोर्ट भी राजनीतिक प्रभाव से चलती है क्या? 

सवाल: राजनीतिक बदले की कार्रवाई के शिकार तो आप खुद भी रहे हैं?
शाह: हम तो फौरन कोर्ट में गए, हाईकोर्ट ने कहा कोई केस ही नहीं है. यहां इनके मामले में तो हाईकोर्ट ने वो नहीं कहा, जमानत नहीं दी. मेरे खिलाफ आरोप भी तय नहीं कर पाए, बरी करना पड़ा. 

सवाल: चिदंबरम के लिए लव एंड हेट रिलेशनशिप दिमाग में आता है? 
शाह: चिदंबरम ने मेरे केस में एफिडेविट नहीं बदलवाया था. हिंदू आतंकवाद के केस में एफिडेविट बदलवाया था. उस वक्त भी ED और CBI चिदंबरम के अधीन नहीं थे. आज भी ED और CBI गृह मंत्रालय के प्रभाव में नहीं है. ED और CBI में किसी का कोई निजी दखल नहीं हो सकता है. अगर होता है तो भी कोर्ट में टिकता नहीं है. 

सवाल: टुकड़े-टुक़ड़े गैंग का इलाज निकालने की जरूरत है? 
शाह:
 मुझे इनका इलाज करने की कोई जरूरत नहीं है. देश की जनता ने ही इनका इलाज कर दिया है. मोदी जी के नेतृत्व में BJP को 305 सीट आई. टुकड़े-टुकड़े गैंग को देश की जनता का जवाब है

सवाल: चुनाव के बाद भी राहुल गांधी के भाषण में बदलाव नहीं आया? 
शाह: वो तो राहुल गांधी को तय करना है कि क्या बोलना है क्या नहीं. क्या सीखना है क्या नहीं सीखना है ये राहुल तय करें. 

सवाल: NRC की कामयाबी पर सवाल उठते हैं, इस पर क्या कहेंगे?
शाह: भरोसा है जब भी सरकार तय करेगी, सब ठीक होगा. हम लोग NRC को सफलतापूर्वक लागू कर पाएंगे 

सवाल: असम में बहुत सारे हिंदू NRC की चपेट में आ गए? 
शाह: सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल और NRC दोनों अहम है. दोनों के मिलकर ये पूरी प्रक्रिया समाप्त होगी. NRC में जो कमी रह गई है, उसको दुरुस्त करेंगे. कमियों को ठीक करने के बाद बाद ही NRC लागू करेंगे.

सवाल: राम मंदिर पर SC के फैसले को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति? 
शाह: मुझे नहीं लगता, राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला कोई अस्वीकार करेगा. सब लोग सम्मान के साथ फैसले को स्वीकार करेंगे. हमें SC के फैसले का इंतजार करना चाहिए. अदालत जब भी फैसला देगी, जनता इसको स्वीकार करेगी. देश के कई हिस्से ऐसे हैं जहां धारा 144 लागू है. 

सवाल: राम मंदिर, अनुच्छेद 370 हो गया, अब यूनिफॉर्म सिविल कोड?
शाह: यूनिफॉर्म सिविल कोड जब भी होगा, जनता के साथ चर्चा होगी. इस तरह चीजें सार्वजनिक नहीं होती हैं, एक निर्णय प्रक्रिया होती है. हर बात उचित समय पर बताया जाता है.  

सवाल: लोग कह रहे हैं अर्थव्यवस्था अच्छी नहीं है, इसको लेकर चिंतित हैं? 
शाह: अर्थव्यवस्था को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है. 1990 के बाद वैश्विकरण और उदारीकरण का दौर चला. उसके बाद पूरी दुनिया का अर्थतंत्र एक बना. भारत की GDP के आंकड़े की पिछले साल से तुलना होती है. ग्लोबल स्लोडाउन में सभी अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में गिरावट हुई. आंकड़ों में कितनी गिरावट हुई इसकी तुलना करनी चाहिए. सिर्फ भारत की GDP में गिरावट नहीं हुई है. ग्लोबल स्लोडाउन का इफेक्ट है, जो भारत में भी हुआ है. 

सवाल- वर्ल्ड बैंक ने भारत की कम ग्रोथ रेट का अनुमान जताया?
शाह: दुनिया की तुलना में भारत की ग्रोथ रेट बेहतर है

सवाल: वित्त मंत्री के परिवार में अर्थव्यवस्था को लेकर दो मत ?
शाह:
 क्या एक परिवार में दो मत नहीं हो सकते. वित्त मंत्री ने कभी नहीं कहा कि स्लोडाउन नहीं है. वित्त मंत्री जुझारू तरीके से मंदी का सामना कर रही हैं. 

सवाल: सीतारमण की जगह कोई अर्थशास्त्री वित्त मंत्री हो सकता है?
शाह:
 अर्थशास्त्री को वित्त मंत्री बनाने का अनुभव अच्छा नहीं रहा है. इसीलिए अर्थशास्त्री पर नहीं, कार्यकर्ता पर भरोसा जताया है. 

सवाल: 2014-2019 तक 'वन मैन शो' रहा. दूसरे कार्यकाल में क्या टूमैन शो है?
जवाब:
  ये सब मीडिया का प्रोपेगेंडा है. सरकार प्रधानमंत्री के निर्णय और कैबिनेट से चलती है. जब मैं संगठन में था तब भी टूमैन शो की बात होती थी. पार्टी का अध्यक्ष पीएम मोदी के साथ मिलकर संगठन चलाएगा. पीएम मोदी संगठन के साथ मिलकर सरकार चलाऐंगे. 

सवाल: पीएम मोदी ग्लोबल मुद्दों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं?
जवाब:
 पीएम मोदी का ध्यान हर छोटे मुद्दे पर है. हर छोटे मुद्दे पर पीएम की पैनी नज़र रहती है. सही समय पर सटीक मार्गदर्शन पीएम देते हैं.