महाराष्ट्र संग्राम पर पहली बार बोले अमित शाह- 'हम शिवसेना की मौजूदा शर्त नहीं मानेंगे'

महाराष्ट्र (Maharashtra) के राजनीतिक हालात पर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हमने गठबंधन में चुनाव लड़ा था, जिसमें हमें जीत भी मिली. अब वे हमारे सामने ऐसी शर्त रख रहे हैं, जिसे हम कतई स्वीकार नहीं करेंगे. अब अकेले हमारे पास बहुमत नहीं है इसलिए सरकार नहीं बना पा रहे हैं. 

महाराष्ट्र संग्राम पर पहली बार बोले अमित शाह- 'हम शिवसेना की मौजूदा शर्त नहीं मानेंगे'
महाराष्ट्र प्रकरण पर पहली बार बोले अमित शाह.

नई दिल्ली: महाराष्ट्र (Maharashtra) के राजनीतिक हालात पर गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि सरकार बनाने के लिए 18 दिनों का समय कम नहीं होता है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल का राष्ट्रपति शासन लगाना बिल्कुल सही फैसला रहा. अगर राज्यपाल इसमें देरी करते तो उनपर आरोप लगते कि वे कहीं ना कहीं बीजेपी की सरकार को चला रहे हैं. गृहमंत्री ने कहा कि सभी दलों के पास सरकार बनाने का छह महीने का वक्त है. ना केवल शिवसेना (Shiv Sena) बल्कि बीजेपी भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है. जिस किसी के पास समर्थन होगा वह राज्यपाल के सामने दावा करें और सरकार बनाएं.

चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना (Shiv Sena) की ओर से ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री की शर्त पर अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मैंने और खुद देवेंद्र फडणवीस ने सैंकड़ो बार चुनावी रैलियों में कहा था कि अगर गठबंधन की सरकार बनती है तो देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री बनेंगे. पूरा चुनाव फडणवीस के नेतृत्व में ही लड़ा गया था.

अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि हमने गठबंधन में चुनाव लड़ा था, जिसमें हमें जीत भी मिली. अब वे हमारे सामने ऐसी शर्त रख रहे हैं, जिसे हम कतई स्वीकार नहीं करेंगे. अब अकेले हमारे पास बहुमत नहीं है इसलिए सरकार नहीं बना पा रहे हैं. 

अमित शाह (Amit Shah) ने शिवसेना (Shiv Sena) को साफ तौर से कहा कि अगर वे झूठ फैलाकर देश की जनता सहानुभूति हासिल करना चाहते हैं तो उन्हें समझ जाना चाहिए की कोई इतना मूर्ख नहीं है. यह जनता की सहानुभूति हासिल करने की झूठी कोशिश है. गृहमंत्री ने कहा कि हम कतई नहीं चाहते हैं कि महाराष्ट्र (Maharashtra) में मध्यावधि चुनाव हो. वैसे ये राज्यपाल का फैसला होगा. 

शाह ने कहा कि चुनाव में साफ तौर से कहा गया था कि अगर गठबंधन सत्ता में आती है तो देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन अब शिवसेना (Shiv Sena) इस बात नहीं मानने पर अड़ी है. हालांकि गृहमंत्री शाह ने ये भी संकेत दिए की अगर शिवसेना (Shiv Sena) नए सिरे से बातचीत करने को तैयार होती है तो उनके लिए रास्ते खुले हुए हैं. वे इस बात पर अड़े रहे की अगर बीजेपी की सरकार बनी तो देवेंद्र फडणवीस ही मुख्यमंत्री बनेंगे.

मालूम हो कि करीब तीन हफ्ते के राजनीतिक उठापटक के बाद महाराष्ट्र में मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लागू हो गया और विधानसभा को निलंबित रखा गया है. केंद्र ने इस स्थिति पर कहा कि कोई विकल्प नहीं बचा था. दिन में तेजी से बदलते घटनाक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को दोपहर के करीब राष्ट्रपति शासन लागू करने के आह्वान के साथ अपनी सिफारिश भेजी. उन्होंने कहा कि उनकी राज्य में सरकार बनाने की कोशिश विफल हो गई है.

इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट की बैठक बुलाई, जिसने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को राज्य में केंद्रीय शासन लागू करने की अपनी सिफारिश से अवगत करा दिया. इस बैठक का आयोजन प्रधानमंत्री के ब्राजील रवाना होने से ठीक पहले किया गया. राष्ट्रपति ने सिफारिश को स्वीकार कर लिया और राज्य में केंद्रीय शासन लागू करने की अधिसूचना पर हस्ताक्षर कर दिया.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया और विधानसभा निलंबित है. उन्होंने कहा कि बीते महीने विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के 20 दिन बाद भी राजनीतिक दल सरकार बनाने में असफल रहे हैं, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लागू किया गया.

गृह मंत्रालय की प्रवक्ता वसुधा गुप्ता ने एक बयान में कहा, 'राज्यपाल ने दोपहर में सभी प्रयासों के बाद भी कोई सफलता नहीं मिलने की बात कहते हुए राष्ट्रपति से सिफारिश की.'

उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को की गई सिफारिश को गृह मंत्रालय को संदर्भित किया गया, जिस पर केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को इसे राष्ट्रपति को भेजने की अनुशंसा की, जिससे संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत उद्घोषणा जारी की जाए और महाराष्ट्र राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए और विधानसभा को निलंबित कर दिया. प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजी, क्योंकि उसके पास कोई विकल्प नहीं बचा था.

288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और चुनावों में 105 सीटों पर जीत दर्ज की. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित हुए थे. शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं.

उद्धव ने क्या कहा था?
शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए अनाधिकारिक माध्यमों से अभी भी संपर्क कर रही है. ठाकरे ने कहा, 'वे हर बार अस्पष्ट और अलग-अलग प्रस्ताव दे रहे हैं. लेकिन हमने कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ जाने का निर्णय लिया है.' इसके थोड़ी ही देर बाद बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने उद्धव के बयान की एक तरह से पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें सरकार गठन के लिए बीजेपी संग गठबंधन को फिर से जिंदा करने पर शिवसेना को समझाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए लगा रखा है.

राणे ने कहा, 'हम 145 सदस्यों के एक सामान्य बहुमत की कोशिश में लगे हुए हैं, हमारा यही लक्ष्य है और हम राज्यपाल को उसे सौंपेंगे. मुझे नहीं लगता कि शिवसेना एनसीपी-कांग्रेस के साथ जाएगी. वे शिवसेना को मोहरा बना रहे हैं.' ठाकरे ने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के उस बयान का जिक्र करते हुए बीजेपी पर हमला बोला, जिसमें उन्होंने कहा कि शिवसेना ने औपचारिक रूप से पहली बार सोमवार को उनसे (कांग्रेस-एनसीपी) संपर्क किया.

उद्धव ने कहा, 'वे हमारे ऊपर बीजेपी को छोड़कर हर किसी से पहले से ही बात करने आरोप लगा रहे हैं. लेकिन अब सच्चाई सामने आ गई है. हमारे पास बातचीत का समय था, लेकिन मैं इस दिशा में नहीं जाना चाहता था, जिस दिशा में चर्चा हो रही है.'

उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल बी.एस. कोश्यारी ने किस तरह उन्हें दो दिन का समय नहीं दिया, लेकिन अब उन्होंने दूसरे दलों को समर्थन पत्र के लिए छह महीने (राष्ट्रपति शासन) का समय दे दिया. ठाकरे ने बीजेपी की चुटकी पर चुटी लेते हुए कहा, 'जब से उन्होंने हमें शुभकामनाएं दी हैं, लगता है यह हमें दिशा दिखा रहा है. हम उन्हें निराश नहीं करेंगे.'

कांग्रेस-एनसीपी के साथ वैचारिक मतभेदों के सवाल पर ठाकरे ने बीजेपी द्वारा विपरीत विचारधारा की पार्टियों से किए गए गठबंधन पर सवाल उठा दिया, जिसमें नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, चंद्रबाबू नायडू और अन्य शामिल हैं.

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