आंकड़ों में भी दिखते हैं कृषि के विकास के लिए मोदी सरकार के कदम : अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि 2009 से 2014 के बीच कृषि के लिए बजटीय आवंटन 1,21,082 करोड़ था जबकि इस सरकार के कार्यकाल में 2004 से 2018 के बीच यह राशि 2,11,694 करोड़ रूपए हो गई. 

आंकड़ों में भी दिखते हैं कृषि के विकास के लिए मोदी सरकार के कदम : अमित शाह
राज्यसभा में अमित शाह ने कहा कहा कि कृषि सदियों से देश की पहचान रही है और भारत को वैज्ञानिक खेती का श्रेय भी प्राप्त है.

नई दिल्ली: भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि कृषि के विकास के लिए सरकार द्वारा की गई पहल के नतीजे आंकड़ों में भी दिखते हैं. अमित शाह ने कहा कि 2009 से 2014 के बीच कृषि के लिए बजटीय आवंटन 1,21,082 करोड़ था जबकि इस सरकार के कार्यकाल में 2004 से 2018 के बीच यह राशि 2,11,694 करोड़ रूपए हो गई.

शाह ने कहा कि मौजूदा सरकार ने बजटीय आवंटन में करीब 75 प्रतिशत की वृद्धि की. उन्होंने कहा कि सरकार ने सूक्ष्म सिंचाई, डेयरी, कृषि बाजार, मत्स्य और जलीय विज्ञान, पशुपालन जैसे क्षेत्रों में भी अतिरिक्त राशि आवंटित की है.

 'कृषि सदियों से देश की पहचान रही है'
अमित शाह ने कहा कि कृषि सदियों से देश की पहचान रही है और भारत को वैज्ञानिक खेती का श्रेय भी प्राप्त है. उन्होंने कहा कि देश की आबादी का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा कृषि पर निर्भर है. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में पैदा होने वाले रोजगार आदि पर भी गौर करें तो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत तक है. उन्होंने कहा कि ‘‘मुक्त व्यापार, मुक्त खेती’’ उनकी पार्टी के नारे हैं और सरकार उसी आधार पर कृषि को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार गठन के समय ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सरकार गरीबों, दलितों, आदिवासियों, किसानों, मजदूरों और गांव की सरकार होगी तथा सरकार उसी दिशा में काम कर रही है.

शाह ने कहा कि 2022 में आजादी के 75 साल पूरा होने पर किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास पर कई टिप्पणियां की गईं. इसे असंभव भी कहा गया. लेकिन भाजपा सरकार ने उन टिप्पणियों को रचनात्मक रूप से लिया है और वह इस दिशा में काम कर रही है. शाह खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में हाल में की गयी वृद्धि और कृषि क्षेत्र में चुनौती पर सदन में अल्पकालिक चर्चा की शुरूआत कर रहे थे.

टीएमसी सदस्यों ने किया हंगामा
अमित शाह ने जब बोलना शुरू किया तो करीब पांच मिनट बाद ही तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया और आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले हो रहे हैं. तृणमूल के कई सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे. तृणमूल सदस्यों के हंगामे के कारण शाह अपनी बात पूरी नहीं कर सके. हंगामे के कारण बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई.

(इनपुट - भाषा)