अमित शाह आज लोकसभा में पेश करेंगे नागरिकता संशोधन विधेयक, कांग्रेस बिल के विरोध में

गृहमंत्री अमित शाह आज लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश करेंगे. हालांकि, असम और उत्तर-पूर्व में बिल को लेकर विरोध जारी है. 

अमित शाह आज लोकसभा में पेश करेंगे नागरिकता संशोधन विधेयक, कांग्रेस बिल के विरोध में
बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को 9 से 11 दिसंबर तक लोकसभा में मौजूद रहने को कहा है.

नई दिल्ली: गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) आज लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) पेश करेंगे. बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को 9 से 11 दिसंबर तक लोकसभा (Lok Sabha) में मौजूद रहने को कहा है. इस बिल के आने के बाद पड़ोसी देशों से आए हिंदू सिख, बौद्ध, जैन, पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल सकेगी. हालांकि, असम और उत्तर-पूर्व में बिल को लेकर विरोध जारी है. उधर, कांग्रेस ने फैसला किया है कि वह इस संसद में इस बिल का विरोध करेगी. सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना भी बिल का समर्थन कर सकती है. 

गौरतलब है कि पिछले बुधवार को ही मोदी कैबिनेट ने बिल को मंजूरी दी थी. कैबिनेट मीटिंग के बाद, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा था कि नागरिकत संशोधन बिल में देश के हितों का ख्याल रखा जाएगा. जावड़ेकर ने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि जब बिल के प्रावधानों की घोषणा की जाएगी तो असम, उत्तर-पूर्व और पूरा देश इसका स्वागत करेगा." 

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कांग्रेस संसद में सीएबी का विरोध करेगी
कांग्रेस ने फैसला किया है कि वह नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) का संसद में विरोध करेगी जिसे सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में पेश करेंगे. सोनिया गांधी के आवास पर संसदीय दल की बैठक के बाद यह फैसला किया गया. बैठक के बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "यह विधेयक हमारे संविधान के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने, संस्कृति, परंपरा और सभ्यता के खिलाफ है."

कांग्रेस ने पहले ही फैसला कर लिया है कि इस बिल का विरोध करने के लिए वह समान सोच वाली पार्टियों से बातचीत करेगी. हालांकि निचले सदन लोकसभा में जहां बीजेपी को बहुमत वहां कांग्रेस ज्यादा कुछ नहीं कर सकेगी लेकिन उच्च सदन राज्यसभा में वह इस विधेयक को रोक सकती है. वामदलों ने भी इस बिल का विरोध करने का निर्णय किया है और वे इसमें संशोधन चाहते हैं. पार्टी ने कहा है कि वह बिल से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का नाम हटाना चाहती है और वह चाहती है कि किसी भी पड़ोसी देश के शरणानार्थी को इस बिल में शामिल किया जाए.